'लगातार 8वीं बार मौजूदगी बढ़ती वैश्विक पहचान को दर्शाती है': G7 में शामिल होने से पहले PM मोदी

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 13-06-2026
'8th consecutive presence reflects growing global profile': PM Modi ahead of participation in G7
'8th consecutive presence reflects growing global profile': PM Modi ahead of participation in G7

 

नई दिल्ली
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि एवियन में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में भारत की मौजूदगी देश में अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के भरोसे और भारत के बढ़ते वैश्विक कद को दिखाती है। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली न केवल अपने हितों का प्रतिनिधित्व करेगी, बल्कि 'ग्लोबल साउथ' की आकांक्षाओं को भी सामने रखेगी। उन्होंने फ्रांस की आधिकारिक यात्रा और स्लोवाकिया की राजकीय यात्रा पर रवाना होने से पहले अपने संदेश में ये बातें कहीं।
 
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर, प्रधानमंत्री मोदी 13-14 जून 2026 को नीस में और 16-19 जून 2026 को एवियन और पेरिस में फ्रांस की आधिकारिक यात्रा करेंगे। यात्रा के स्लोवाकिया चरण के दौरान, वह प्रधानमंत्री फिको के साथ बातचीत करेंगे और सहयोग के नए रास्ते तलाशेंगे। प्रधानमंत्री राष्ट्रपति पेलेग्रिनी से भी मुलाकात करेंगे। यह यात्रा व्यापार, निवेश और ऑटोमोबाइल व रेलवे निर्माण सहित विभिन्न क्षेत्रों में स्लोवाकिया के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराएगी। पीएम मोदी ने कहा, "स्लोवाकिया से मैं एवियन जाऊंगा, जहां मैं 16 और 17 जून 2026 को G7 शिखर सम्मेलन में भाग लूंगा। G7 में भारत की मौजूदगी हमारे साझेदारों के हम पर भरोसे और हमारी बढ़ती वैश्विक पहचान को दर्शाती है।"
 
उन्होंने इस बात पर जोर दिया, "यह लगातार 8वां G7 शिखर सम्मेलन है जिसमें भारत को आमंत्रित किया गया है। G7 में, भारत न केवल अपनी बात रखेगा, बल्कि 'ग्लोबल साउथ' की आकांक्षाओं को भी आवाज देगा।" पीएम मोदी ने भरोसा जताया कि फ्रांस और स्लोवाक गणराज्य की उनकी यात्राएं यूरोप और G7 दोनों के साथ भारत के गहरे होते संबंधों को और मजबूत करेंगी, और इस महाद्वीप व उससे आगे अपनी साझेदारियों का दायरा बढ़ाने की हमारी अटूट प्रतिबद्धता को दिखाएंगी।
 
विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को कहा कि भारत फ्रांस के एवियन में 52वें G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेगा। यह शिखर सम्मेलन में एक साझेदार देश के तौर पर भारत की 13वीं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगातार सातवीं भागीदारी होगी। 15 से 17 जून तक होने वाले इस समिट में भारत एक पार्टनर देश के तौर पर हिस्सा लेगा। इससे भारत और 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) के लिए अहम मुद्दों पर दुनिया के नेताओं के साथ बातचीत करने का मौका मिलेगा।
 
फ्रांस की अध्यक्षता में होने वाला G7 समिट ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया बड़े जियोपॉलिटिकल (भू-राजनीतिक) संकटों से जूझ रही है—खासकर एनर्जी, सप्लाई चेन और सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर चुनौतियां सामने हैं। फ्रांस के रिसॉर्ट शहर में होने वाले इस समिट में जियोपॉलिटिकल संकट, आर्थिक सहयोग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और विकास से जुड़ी पार्टनरशिप पर फोकस किए जाने की उम्मीद है।
 
समिट के दूसरे दिन, भारत मिडिल ईस्ट में तेज़ी से बदलते हालात और ग्लोबल आर्थिक असंतुलन की गंभीर चुनौती पर होने वाली अहम चर्चाओं में अपनी बात रखेगा। समिट के आउटरीच सेशन में नई दिल्ली की भागीदारी—भले ही वह सदस्य देश न हो—यह दिखाती है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत को आकार देने में उसकी भूमिका कितनी बढ़ रही है।
2003 में G8 समिट और 2019 में बियारिट्ज़ में G7 समिट की मेज़बानी के बाद, फ्रांस का एवियन शहर एक बार फिर ग्लोबल डिप्लोमेसी का केंद्र बनने जा रहा है। यहां नेता आर्थिक अनिश्चितता और कई जियोपॉलिटिकल तनावपूर्ण स्थितियों से जूझ रही दुनिया के लिए रास्ता खोजने के मकसद से इकट्ठा होंगे।