आवाज़ द वॉयस | नई दिल्ली
केंद्रीय बजट 2026-27 के पेश होते ही देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था और विकास के विमर्श में नई ऊर्जा दिखाई देने लगी है। जहां एक ओर विपक्ष इस बजट को लेकर आलोचनात्मक रुख अपनाए हुए है, वहीं सरकार और नीति जगत से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियों ने इसे दूरदर्शी, जिम्मेदार और विकसित भारत की ओर तेज़ी से बढ़ता कदम बताया है। बजट को लेकर लगातार आ रही प्रतिक्रियाओं के बीच सत्तापक्ष का कहना है कि यह दस्तावेज़ केवल राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं, बल्कि अगले कई दशकों के विकास का स्पष्ट रोडमैप है।
केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने बजट 2026 की जमकर सराहना करते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की ठोस अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और इसमें सुधार, समावेशन और दीर्घकालिक विकास की स्पष्ट झलक मिलती है। रिजिजू के अनुसार, बजट में पूर्वोत्तर भारत के विकास, एक्सप्रेस हाईवे, बौद्ध सर्किट और अल्पसंख्यकों के लिए घोषित बड़े पैकेज इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार संतुलित और समग्र विकास के रास्ते पर चल रही है।
उन्होंने कहा कि यह बजट केवल शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि एक मजबूत और भरोसेमंद योजना है। “एक मंत्री होने के नाते ही नहीं, बल्कि एक भारतीय नागरिक के तौर पर भी मैं इस बजट को लेकर उत्साहित हूं,” रिजिजू ने कहा। उनके मुताबिक, पूर्वोत्तर राज्यों में कनेक्टिविटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने से न केवल क्षेत्रीय असंतुलन कम होगा, बल्कि राष्ट्रीय एकता भी मजबूत होगी। विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि बजट के सभी प्रावधान आम लोगों—खासकर गरीब और मध्यम वर्ग—के हित में हैं, लेकिन विपक्ष अक्सर खुद को जनता से अलग एक ‘विशेष वर्ग’ की तरह पेश करता है।
इसी क्रम में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बजट 2026-27 को ‘फ्यूचर रेडी’ करार देते हुए कहा कि यह दस्तावेज़ 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की नींव रखता है। उन्होंने कहा कि बजट में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर विशेष ज़ोर दिया गया है और युवाओं के री-स्किलिंग के लिए कई योजनाएं घोषित की गई हैं, जिससे भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।
पीयूष गोयल के अनुसार, इनलैंड वॉटरवे, हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, टियर-2 और टियर-3 शहरों का विकास और युवाओं के कौशल उन्नयन जैसे कदम देश के औद्योगिक और आर्थिक भविष्य को नई दिशा देंगे। उन्होंने विपक्ष की आलोचना को “टूटी हुई रिकॉर्ड” बताते हुए सवाल किया कि क्या वे एमएसएमई के विकास के खिलाफ हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने बजट की उन घोषणाओं को रेखांकित किया, जो उद्योग और व्यापार के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही हैं—जिनमें रिकॉर्ड 12.2 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय शामिल है।
UNION BUDGET 2026-27 PROPOSES A SCHEME TO SUPPORT STATES IN ESTABLISHING FIVE REGIONAL MEDICAL HUBS TO PROMOTE MEDICAL TOURISM
— PIB India (@PIB_India) February 1, 2026
🔸National Institute of Hospitality proposed to be set up by upgrading the existing National Council for Hotel Management and Catering Technology… pic.twitter.com/h2xYgXTdk8
तकनीकी क्षेत्र में भी बजट 2026 ने बड़ा संदेश दिया है। सरकार ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की घोषणा की है, जिसके तहत इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के लिए 40,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य भारत की बौद्धिक संपदा (IPR) और घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करना है, ताकि देश वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर निर्णायक भूमिका निभा सके।
यात्रा और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में भी बजट ने बड़ी छलांग लगाई है। सात नए हाई-स्पीड रेल रूट्स, समर्पित फ्रेट कॉरिडोर और अगले पांच वर्षों में 20 राष्ट्रीय जलमार्गों को चालू करने की योजना भारत के परिवहन ढांचे को पूरी तरह बदलने वाली मानी जा रही है। इसके साथ ही 10,000 करोड़ रुपये के निवेश से शिपिंग कंटेनर के घरेलू निर्माण की पहल, भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक तेज़ी से पहुंचाने में मदद करेगी।
नीति और अर्थशास्त्र जगत से भी बजट को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। भारत के पूर्व G20 शेरपा और नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने इसे “बहुत जिम्मेदार और वित्तीय रूप से संतुलित” बजट बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक भू-राजनीति, सप्लाई चेन में टूटन और आर्थिक अनिश्चितता के दौर में यह बजट राजकोषीय अनुशासन और दीर्घकालिक विकास के बीच सही संतुलन बनाता है। कांत के अनुसार, भारत को शेयर बाजार की अल्पकालिक हलचलों के बजाय अगले तीन दशकों में 8-9 प्रतिशत की विकास दर पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और अत्याधुनिक तकनीकों पर बजट के फोकस को भारत के लिए “टेक्नोलॉजिकल लीपफ्रॉग” का अवसर बताया। खासतौर पर डेटा सेंटर्स के लिए 22 साल की टैक्स छूट को उन्होंने बजट का सबसे स्मार्ट कदम करार दिया, जिससे भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई-एंड कंप्यूटिंग का वैश्विक हब बन सकता है। उन्होंने यह भी ज़ोर दिया कि केरल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में घोषित औद्योगिक कॉरिडोर केवल खनिज संसाधनों की उपलब्धता तक सीमित न रहें, बल्कि उनके प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर भी ध्यान दें।
युवाओं और खेल के क्षेत्र में भी बजट 2026 ने नई उम्मीद जगाई है। केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि यह बजट युवाओं के लिए रोजगार सृजन और खेल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर केंद्रित है। खेलो इंडिया मिशन के माध्यम से सरकार देशभर में खेल प्रतिभाओं को निखारने, कोचिंग और स्पोर्ट्स साइंस को प्रशिक्षण से जोड़ने तथा भारत को स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र बनाने की दिशा में काम करेगी।
The Finance Minister has presented the Budget for 2026-27, and I have a brief opening statement on it.
— Congress (@INCIndia) February 1, 2026
Every pre-budget commentator and writer, and every student of economics, must be astonished by what he or she heard in the Finance Minister’s speech to Parliament today.
I… pic.twitter.com/sB5BIQuSWX
वहीं, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्ष के तीखे हमलों का तथ्यों के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह बजट छोटे और मध्यम उद्योगों, किसानों, ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों, महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों के लिए ठोस योजनाएं लेकर आया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक आलोचना का स्वागत है, लेकिन वह तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए।
सीतारमण के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सरकार ने ऐसे उपाय किए हैं, जिससे आम लोगों को बाहरी आर्थिक झटकों से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि बजट का उद्देश्य यही है कि छोटे लोग अपनी ज़िंदगी में बड़े उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रहें।
कुल मिलाकर, बजट 2026-27 को लेकर सरकार, नीति विशेषज्ञों और कई क्षेत्रों से आ रही सकारात्मक प्रतिक्रियाएं यह संकेत देती हैं कि यह दस्तावेज़ केवल एक साल का हिसाब-किताब नहीं, बल्कि अगले कई दशकों की विकास यात्रा का खाका है। ‘युवाशक्ति’, सुधार, इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक, समावेशन और पर्यावरणीय सततता—इन सभी स्तंभों पर खड़ा यह बजट ‘विकसित भारत’ के सपने को ज़मीन पर उतारने की दिशा में एक मजबूत कदम के रूप में देखा जा रहा है।
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