नई दिल्ली
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने केंद्रीय बजट 2026-27 को ‘विकसित भारत’ (Vikas Bharat) के लक्ष्य की ओर बढ़ने का स्पष्ट रोडमैप बताया है। उन्होंने कहा कि रेलवे के लिए घोषित ₹2,78,000 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक बजट इस दिशा में एक निर्णायक और ठोस कदम है, जो देश की कनेक्टिविटी, अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाएगा।
एएनआई को दिए एक साक्षात्कार में अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस बजट में घोषित सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर यात्रा समय को काफी हद तक कम करेंगे और इससे लोगों की ज़िंदगी में गुणात्मक बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि यह बजट युवाओं और महिलाओं को समर्पित है और ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना से प्रेरित है।
रेल मंत्री ने कहा,“आज का बजट देश के युवाओं और नारी शक्ति को समर्पित है। यह राष्ट्र के प्रति कर्तव्य भावना से प्रेरित है और समावेशी विकास को सुनिश्चित करता है। रेलवे का ₹2.78 लाख करोड़ का बजट विकसित भारत की दिशा में मज़बूत कदम है।”
उन्होंने दक्षिण भारत के लिए घोषित हाई-स्पीड नेटवर्क को “साउथ हाई-स्पीड ट्रायंगल/डायमंड” बताते हुए कहा कि चेन्नई–बेंगलुरु–हैदराबाद को जोड़ने वाला यह नेटवर्क तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक—इन पांचों राज्यों में तेज़ आर्थिक वृद्धि का इंजन बनेगा। उनके अनुसार, यह परियोजना दक्षिण भारत के लिए “बड़ी जीत” साबित होगी।
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि करीब 4,000 किलोमीटर लंबे हाई-स्पीड कॉरिडोर देश में लगभग ₹16 लाख करोड़ के निवेश को आकर्षित करेंगे। इसके अलावा मुंबई–पुणे–हैदराबाद को जोड़ने वाला कॉरिडोर भी एक बड़ा आर्थिक क्षेत्र बनकर उभरेगा। उत्तर भारत में दिल्ली–वाराणसी–सिलीगुड़ी हाई-स्पीड कॉरिडोर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ते हुए यात्रा, पर्यटन और व्यापार को नई गति देगा।
बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने माल परिवहन को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए नई डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की घोषणा भी की। इसके तहत पूर्व में दानकुनी को पश्चिम में सूरत से जोड़ने का प्रस्ताव है। साथ ही अगले पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों को चालू करने की योजना है, जिसकी शुरुआत ओडिशा के एनडब्ल्यू-5 से होगी। इससे खनिज-समृद्ध क्षेत्रों और बंदरगाहों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
यात्री परिवहन को टिकाऊ और आधुनिक बनाने के लिए सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को ‘ग्रोथ कनेक्टर्स’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इनमें मुंबई–पुणे, पुणे–हैदराबाद, हैदराबाद–बेंगलुरु, हैदराबाद–चेन्नई, चेन्नई–बेंगलुरु, दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी शामिल हैं।
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इन परियोजनाओं से यात्रा समय में ऐतिहासिक कमी आएगी—चेन्नई से बेंगलुरु सिर्फ 1 घंटा 13 मिनट, बेंगलुरु से हैदराबाद 2 घंटे और चेन्नई से हैदराबाद लगभग 2 घंटे 55 मिनट में पूरा होगा। उन्होंने कहा कि ये तीनों शहर आईटी, टेक्नोलॉजी और उद्योग के बड़े केंद्र हैं और हाई-स्पीड कनेक्टिविटी से दक्षिण भारत में विकास का नया गुणक (growth multiplier) तैयार होगा।
कुल मिलाकर, सरकार का दावा है कि बजट 2026-27 में रेलवे और परिवहन पर दिया गया ज़ोर न सिर्फ यात्रा को तेज़ और पर्यावरण के अनुकूल बनाएगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, रोज़गार और क्षेत्रीय संतुलन को भी नई मजबूती देगा—जो ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने की दिशा में अहम कदम है।




