आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को टोक्यो में जापान के अपने पूर्व समकक्षों योशीहिदे सुगा और फुमियो किशिदा से मुलाकात की.
मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार एवं टैरिफ नीति को लेकर नयी दिल्ली और वाशिंगटन के संबंधों में जारी तनाव के बीच जापान की दो दिवसीय यात्रा पर शुक्रवार सुबह टोक्यो पहुंचे। उन्होंने जापान की प्रतिनिधि सभा (संसद का निचला सदन) के अध्यक्ष फुकुशिरो नुकागा से भी मुलाकात की.
मोदी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि किशिदा के साथ उनकी “शानदार मुलाकात” हुई.
उन्होंने लिखा, “वह (किशिदा) हमेशा से भारत-जापान के बीच घनिष्ठ संबंधों के प्रबल समर्थक रहे हैं. हमने व्यापार, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और मानव संसाधन के क्षेत्र में हमारी द्विपक्षीय साझेदारी की प्रगति पर चर्चा की। हमने प्रौद्योगिकी और सेमीकंडक्टर जैसे उभरते क्षेत्रों में मौजूद अपार संभावनाओं पर भी बातचीत की.
वहीं, विदेश मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “दोनों पक्षों ने भारत-जापान संबंधों में प्रगति और पारस्परिक समृद्धि एवं तरक्की के लिए भारत-जापान साझेदारी को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की.
मोदी ने सुगा से हुई मुलाकात के बारे में भी पोस्ट किया, जो वर्तमान में जापान-भारत एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने सुगा से भारत-जापान सहयोग के कई आयामों के बारे में बात की.
मोदी ने लिखा, “हमारे बीच इस बात पर चर्चा हुई कि प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई), व्यापार, निवेश और अन्य क्षेत्रों में घनिष्ठ सहयोग कैसे बनाया जाए।”
विदेश मंत्रालय ने कहा कि मोदी ने दोनों देशों के बीच दोस्ती और व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने में जापान-भारत एसोसिएशन की ओर से निभाई गई भूमिका की भी सराहना की.
मंत्रालय के मुताबिक, जापानी प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष नुकागा के साथ मुलाकात में मोदी ने “भारत-जापान के बीच मजबूत दोस्ताना रिश्तों पर चर्चा की, जिसमें संसदीय आदान-प्रदान, मानव संसाधन विकास, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, एआई, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग पर विशेष ध्यान दिया गया.”
इससे पहले, एक व्यापार मंच को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत और जापान स्थिरता, विकास और समृद्धि के लिए एशियाई सदी को मिलकर आकार देंगे.
जापान की दो दिवसीय यात्रा के बाद मोदी 31 अगस्त और एक सितंबर को तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन जाएंगे.