इस्लामाबाद [पाकिस्तान]
पाकिस्तान में महंगाई दर सितंबर में घटकर 10.3 प्रतिशत हो गई, जो अगस्त में 11.1 प्रतिशत थी। हालांकि, यह सरकार के अनुमान से ज़्यादा रही क्योंकि बिजली और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने खाने-पीने की चीज़ों की महंगाई में कमी से मिली राहत को बेअसर कर दिया। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो के आंकड़ों से पता चला है कि सितंबर में उपभोक्ता कीमतों में महीने-दर-महीने 1.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के अनुसार, महंगाई का ताज़ा आंकड़ा योजना आयोग की उम्मीदों से ज़्यादा रहा, जो खाने-पीने की चीज़ों की कीमतों में सुधार के बावजूद पाकिस्तानी परिवारों पर लगातार दबाव को दर्शाता है। शहरी इलाकों में महंगाई दर 10.1 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 10.5 प्रतिशत रही।
खाने-पीने की चीज़ों की महंगाई में काफी कमी आई; शहरों में यह 8.1 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 7.7 प्रतिशत हो गई। हालांकि, ऊर्जा से जुड़ी महंगाई इसके उलट रही और शहरी इलाकों में 11.5 प्रतिशत तथा ग्रामीण इलाकों में 13.1 प्रतिशत तक पहुँच गई। पेट्रोल की कीमतें एक साल पहले की तुलना में 39 प्रतिशत ज़्यादा थीं, जबकि बिजली 33 प्रतिशत महंगी हो गई। परिवहन सेवाओं में भी सालाना 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ बढ़ गया।
सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) को बताया है कि अगर वैश्विक हालात स्थिर रहते हैं और ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत लगभग 80 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो वित्त वर्ष के दौरान महंगाई दर औसतन 7.5 प्रतिशत के आसपास रह सकती है। हालांकि, अगर दिसंबर तक तेल की कीमतें 100 अमेरिकी डॉलर के आसपास बनी रहती हैं, तो सरकार का अनुमान है कि सालाना महंगाई दर 8.2 प्रतिशत तक पहुँच सकती है। अधिकारियों को उम्मीद है कि कीमतों का दबाव दिसंबर तक ज़्यादा बना रहेगा और उसके बाद धीरे-धीरे कम होगा।
खाने-पीने की चीज़ों की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव बना हुआ है। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के अनुसार, प्याज की कीमतों में सालाना 125 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई, जबकि गेहूं की कीमतें 41 प्रतिशत बढ़ीं और गेहूं का आटा 32 प्रतिशत महंगा हो गया। इस बीच, सरकार 7,65,000 टन गेहूं आयात करने की तैयारी कर रही है। इसके उलट, आलू, चिकन, अंडे और चीनी की कीमतों में काफी गिरावट आई। खाने-पीने की चीज़ों और ऊर्जा को छोड़कर, कोर महंगाई दर 8.1% से 8.6% के बीच रही। फिर भी, 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, बिजली, ईंधन और ट्रांसपोर्टेशन की लागत में लगातार बढ़ोतरी पाकिस्तान में महंगाई के हालात के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।