डॉ. अफला रफीक : 13 गोल्ड मेडल, अब NEET PG में ऑल इंडिया 21वीं रैंक

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 03-10-2026
Dr. Afla Rafiq: 13 gold medals, now All India Rank 21 in NEET PG.
Dr. Afla Rafiq: 13 gold medals, now All India Rank 21 in NEET PG.

 

आवाज़ द वाॅयस/ नई दिल्ली

 मंगलुरु की डॉ. अफला रफीक ने मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केएस हेगड़े मेडिकल एकेडमी की छात्रा रहीं डॉ. अफला ने NEET PG 2026 परीक्षा में ऑल इंडिया 21वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने 720 में से 614 अंक प्राप्त किए। इससे पहले MBBS की पढ़ाई के दौरान वह 13 गोल्ड मेडल जीतकर अपनी मेहनत और शैक्षणिक क्षमता का परिचय दे चुकी हैं।

डॉ. अफला फिलहाल केएस हेगड़े अस्पताल में MBBS इंटर्नशिप कर रही हैं। इंटर्नशिप की व्यस्त दिनचर्या के बीच NEET PG की तैयारी करना उनके लिए आसान नहीं था। अस्पताल की जिम्मेदारियां थीं। पढ़ाई का दबाव था। इसके साथ निजी जीवन की भी अपनी व्यस्तताएं थीं। इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई के लिए रोजाना समय निकालने की कोशिश जारी रखी।

NEET PG 2026 में डॉ. अफला रफीक की 21वीं रैंक को उनकी लगातार तैयारी का परिणाम माना जा रहा है। परीक्षा में देशभर से बड़ी संख्या में मेडिकल उम्मीदवार शामिल हुए थे। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज यानी NBEMS के आंकड़ों के मुताबिक NEET PG 2026 के लिए 2,73,096 उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इनमें से 2,65,980 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए।

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डॉ. अफला की तैयारी की कहानी केवल परीक्षा के अंतिम महीनों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने MBBS के शुरुआती वर्षों से ही प्रतियोगी परीक्षा की दिशा में तैयारी शुरू कर दी थी। हालांकि इंटर्नशिप के दौरान उनकी तैयारी अधिक नियमित हुई। उन्होंने अपनी पढ़ाई को एक तय रूटीन के साथ आगे बढ़ाया। उनका जोर बार बार रिविजन करने और सवाल हल करने पर रहा।

डॉ. जैनब वोरा के साथ बातचीत में डॉ. अफला ने अपनी तैयारी के कई पहलुओं के बारे में बताया। वह डॉ. जैनब वोरा को अपना मेंटर मानती हैं। बातचीत में उन्होंने बताया कि इंटर्नशिप के दौरान भी उन्होंने पढ़ाई को रोजाना की आदत बनाए रखने की कोशिश की। व्यस्त शेड्यूल के बावजूद वह लाइब्रेरी जाती थीं और रोज कम से कम 100 MCQs यानी बहुविकल्पीय प्रश्न हल करने पर ध्यान देती थीं।

उनकी तैयारी में नोट्स का रिविजन भी अहम हिस्सा रहा। डॉ. अफला के अनुसार , "उन्होंने अपने नोट्स को छह बार दोहराया। इसके साथ Grand Tests यानी GTs और Tests and Discussions यानी T&Ds में भी नियमित रूप से हिस्सा लिया। हर टेस्ट के बाद वह अपने प्रदर्शन की समीक्षा करती थीं। गलत हुए सवालों को समझना और कमजोर हिस्सों पर दोबारा काम करना उनकी रणनीति का हिस्सा था।"

NEET PG जैसी प्रतियोगी परीक्षा में केवल पढ़ाई का समय ही महत्वपूर्ण नहीं होता। लंबे समय तक तैयारी जारी रखना भी चुनौती होती है। डॉ. अफला ने बातचीत में बताया कि कई बार Grand Test में उनके अंक एक ही स्तर के आसपास बने रहे। ऐसे समय में निराशा होना स्वाभाविक था। लेकिन उन्होंने अपनी तैयारी को रोकने के बजाय गलतियों की समीक्षा पर ध्यान दिया।

उनकी कहानी में परिवार और दोस्तों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। तैयारी के दौरान उनके पति उन्हें लगातार प्रोत्साहित करते रहे। परिवार और दोस्तों से मिले सहयोग ने उन्हें मुश्किल दौर में अपनी पढ़ाई जारी रखने में मदद की। डॉ. अफला ने यह भी बताया कि उन्होंने तैयारी के दौरान दोस्तों से पूरी तरह दूरी नहीं बनाई। उनके लिए पढ़ाई और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी था।

यही कारण रहा कि उन्होंने दोस्तों से मिलना जुलना पूरी तरह बंद नहीं किया। उनका मानना था कि पढ़ाई के साथ मानसिक रूप से संतुलित रहना भी जरूरी है। लेकिन इसके साथ उन्होंने अपने बनाए रूटीन का पालन करने को प्राथमिकता दी। उनके लिए निरंतरता तैयारी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रही।

डॉ. अफला की शैक्षणिक यात्रा मंगलुरु से जुड़ी रही है। वह मूल रूप से बाजपे की रहने वाली हैं। उन्होंने आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई बाजपे के अंसार स्कूल से की। इसके बाद उन्होंने मंगलुरु के सेंट मैरी हाई स्कूल में पढ़ाई की। यहां उन्होंने SSLC परीक्षा में 97 प्रतिशत अंक हासिल किए।

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स्कूल के बाद उन्होंने मंगलुरु के श्री चैतन्य PU कॉलेज में दाखिला लिया। यहां भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने 96 प्रतिशत अंक प्राप्त किए और शीर्ष रैंक हासिल की। इसके बाद मेडिकल शिक्षा के लिए उन्होंने केएस हेगड़े मेडिकल एकेडमी का रुख किया।

MBBS के दौरान भी उनकी उपलब्धियों का सिलसिला जारी रहा। उन्होंने कुल 13 गोल्ड मेडल हासिल किए। मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई के दौरान लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद NEET PG में भी उनका प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। 614 अंक के साथ AIR 21 हासिल करना उनकी शैक्षणिक यात्रा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है।

अब डॉ. अफला की नजर पोस्टग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा पर है। वह रेडियोलॉजी में विशेषज्ञता हासिल करना चाहती हैं। NEET PG 2026 में उनकी रैंक उन्हें देश के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में पोस्टग्रेजुएट सीट के लिए मजबूत स्थिति में रखती है। हालांकि अंतिम कॉलेज और सीट का चयन काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान होगा।

डॉ. अफला रफीक की कहानी उन मेडिकल छात्रों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो NEET PG जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। उनकी तैयारी में कोई एक तरीका नहीं था। उन्होंने नियमित पढ़ाई, रिविजन, MCQs, Grand Tests और अपनी गलतियों की समीक्षा को साथ लेकर चलने की कोशिश की। इंटर्नशिप के दौरान भी पढ़ाई जारी रखना उनकी तैयारी की एक खास बात रही।

उनकी तैयारी का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि उन्होंने केवल परीक्षा के नजदीक आकर पढ़ाई तेज नहीं की। उन्होंने MBBS के शुरुआती वर्षों से ही अपनी नींव मजबूत करने पर ध्यान दिया। इंटर्नशिप के दौरान इसे और व्यवस्थित किया। इससे उन्हें क्लिनिकल विषयों से जुड़े सवालों को समझने में भी मदद मिली।

डॉ. अफला का कहना है," बार बार रिविजन ने परीक्षा के दौरान क्लिनिकल सवालों को लेकर उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। NEET PG में मेडिकल छात्रों के लिए केवल तथ्यों को याद रखना पर्याप्त नहीं होता। सवालों को समझना और सही विकल्प तक पहुंचना भी महत्वपूर्ण होता है। इसी वजह से उन्होंने नियमित प्रश्न अभ्यास को अपनी तैयारी का हिस्सा बनाए रखा।"

डॉ. अफला रफीक मोहम्मद रफीक और फातिमा रफीक की बेटी हैं। उनके परिवार के लिए भी यह उपलब्धि खास है। 13 गोल्ड मेडल के बाद NEET PG 2026 में ऑल इंडिया 21वीं रैंक ने उनकी शैक्षणिक यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।

डॉ. अफला की उपलब्धि मंगलुरु के मेडिकल शिक्षा क्षेत्र के लिए भी उल्लेखनीय है। एक ओर उन्होंने MBBS के दौरान लगातार बेहतर प्रदर्शन किया। दूसरी ओर इंटर्नशिप जैसी व्यस्त अवधि में NEET PG की तैयारी जारी रखी। अंततः 614 अंक के साथ 21वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की।

अब उनका अगला लक्ष्य रेडियोलॉजी में पोस्टग्रेजुएट पढ़ाई करना है। आने वाले समय में उनकी मेडिकल यात्रा किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर नजर रहेगी। फिलहाल NEET PG 2026 में डॉ. अफला रफीक की 21वीं रैंक और MBBS के दौरान जीते 13 गोल्ड मेडल उनकी मेहनत, निरंतरता और अनुशासित तैयारी की कहानी बताते हैं।