फज़ल पठान/ मुंबई
सृष्टि बनाने वाले ने इंसान को अक्ल की नायाब नेमत देकर इस ज़मीन का निगहबान बनाया। लेकिन अफसोस कि उसी इंसान ने अपने स्वार्थ के लिए कुदरत की बलि चढ़ाने का सिलसिला शुरू कर दिया है। इसी पृष्ठभूमि में मुंबई में 'पर्यावरण की हिफाज़त' के मौज़ू पर एक अहम सेमिनार हुआ।
विज़डम फाउंडेशन की तरफ से मुंबई प्रेस क्लब में 'एक मानवता, एक निवासस्थान' के मौज़ू पर एक खास सेमिनार का आयोजन किया गया था। अलग-अलग धर्मों के रहनुमा, जानकार और विचारक एक ही मंच पर आए और उन्होंने अपने-अपने धर्मग्रंथों में पर्यावरण की हिफाज़त की तालीम पर बात की।
इस सेमिनार में अलग-अलग धर्मों की नैतिक और रूहानी रवायतों पर तफ्सील से चर्चा हुई। इस बात पर सभी की सहमति थी कि भले ही धर्मों का दायरा अलग हो, लेकिन हर धर्म ने कुदरत का एहतराम करने और उसकी हिफाज़त करने का ही रास्ता दिखाया है। यह साफ तौर पर कहा गया कि दुनिया के सभी जीवों का बनाने वाले की हर रचना पर बराबर का हक है, इसलिए इंसान इस ज़मीन पर अपनी मिल्कियत नहीं जता सकता।
धार्मिक रहनुमाओं को एक साथ लाने की वजह क्या?
प्रोग्राम की शुरुआत में विज़डम फाउंडेशन की डायरेक्टर डॉ. ज़ीनत शौकत अली ने सेमिनार की पृष्ठभूमि बताई। उन्होंने आज के दौर में हो रहे पर्यावरण के नुकसान और उससे पैदा हुए भयानक संकटों पर चिंता ज़ाहिर की।
हाज़िरीन को संबोधित करते हुए डॉ. ज़ीनत शौकत अली ने कहा, "पर्यावरण को हो रहे नुकसान और इससे इंसानी ज़िंदगी के सामने खड़े हुए बड़े खतरों को देखते हुए, अब अलग-अलग धर्मों के रहनुमाओं को एक मंच पर लाना ज़रूरी था। हमने लोगों को कुदरत के प्रति उनके फर्ज़ और ज़िम्मेदारियों की याद दिलाने के लिए यह फैसला लिया।"
इस्लाम में कुदरत का मुकाम
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना ज़हीर अब्बास रिज़वी ने पवित्र कुरान और इस्लामी तारीख के कई अहम वाकये लोगों के सामने रखे। यह साफ करते हुए कि इंसान को कुदरत का मालिक नहीं बल्कि रक्षक बनाया गया है, मौलाना रिज़वी ने कहा, "पवित्र कुरान में इंसान को साफ तौर पर बताया गया है कि यह ज़मीन तुम्हारी निजी जागीर नहीं है, बल्कि यह तुम्हें दी गई एक मुकद्दस अमानत है। जिसके हाथ में अमानत सौंपी जाती है, उसकी ईमानदारी से हिफाज़त करना ही उसका सबसे बड़ा फर्ज़ बन जाता है।"
पैगंबर मुहम्मद के दौर के एक अहम कानून का हवाला देते हुए उन्होंने आगे कहा, "पैगंबर मुहम्मद की हिजरत के दूसरे साल जब कानून बनाए गए थे, तब एक साफ नियम तय किया गया था। मुस्लिम फौज या लोग किसी शहर या जगह को जीतकर वहां दाखिल हों, तब भी वहां के पेड़ों, पौधों, हरियाली, खेती और फसलों को बिल्कुल भी नुकसान नहीं पहुंचाना है। इसी से हमें पर्यावरण की हिफाज़त का सबसे बड़ा सबक मिलता है।"
'कयामत करीब हो, तब भी एक पौधा ज़रूर लगाएं'
जमीयत उलेमा महाराष्ट्र के उपाध्यक्ष मौलाना मुहम्मद आरिफ उमरी ने हदीस शरीफ का एक बेहद जज़्बाती पैगाम लोगों को दिया। उन्होंने कहा कि कुदरत के पेड़-पौधे और बेलें ईश्वर का ही रूप हैं।
पेड़ लगाने की अहमियत बताते हुए मौलाना उमरी ने कहा, "हदीस शरीफ में कहा गया है कि अगर तुम्हारे हाथ में कोई पौधा हो और तुम उसे ज़मीन में लगाने वाले हो, और उसी वक्त तुम्हें लगे कि कयामत करीब आ गई है, यह मालूम होने के बावजूद कि उस पौधे के पेड़ बनने के लिए वक्त नहीं बचा है, तुम्हें उस पौधे को ज़मीन में लगा ही देना चाहिए।"
कुदरत की नेमतों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने आगे कहा, "पवित्र कुरान में कहा गया है कि जहां नदियां, पेड़ और हरियाली है, उन जगहों को रहमत की जगहें कहा गया है। यह कुदरत ईश्वर की तरफ से हमें दी गई रहमत है और इस रहमत की कद्र करना हमारी मज़हबी और अखलाकी ज़िम्मेदारी है।"
गीता में 'धरती माता'
इस्कॉन गुड़गांव चौपाटी के खजांची और जानकार केशवचंद्र दास ने श्रीमद्भगवद्गीता की फिलॉसफी को आम बोलचाल की ज़बान में समझाया। उन्होंने कुदरत और इंसान के रिश्ते को बहुत ही सटीक तरीके से पेश किया।
हमारी ज़िम्मेदारी का एहसास कराते हुए केशवचंद्र दास ने कहा, "श्रीमद्भगवद्गीता में ज़मीन को हमारी माता और इंसान को उसका बेटा कहा गया है। अपनी मां का खयाल रखना, उस पर ज़ुल्म न करना और उसे नुकसान न पहुंचाना हर बेटे का पहला फर्ज़ है। हम ज़िंदगी भर कुदरत से क्या हासिल कर सकते हैं, इसके बजाय हर किसी को यह सोचना चाहिए कि हम इस दुनिया और कुदरत को क्या दे रहे हैं।"
ईसाई धर्म की तालीम
बिशप एवलिन डिसिल्वा ने ईसाई रवायत में पर्यावरण को दी जाने वाली अहमियत को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि दुनिया भर का ईसाई समाज हर साल इस अरसे को पर्यावरण की हिफाज़त के संकल्प के तौर पर मनाता है।
पर्यावरण की हिफाज़त के आलमी कार्यक्रम के बारे में बताते हुए बिशप डिसिल्वा ने कहा, "दुनिया भर के ईसाई भाई हर साल 1 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच कुदरत का त्योहार मनाते हैं। हर साल इसके लिए एक खास थीम तय की जाती है। इस साल जीवन जल के कॉन्सेप्ट को लेकर हम लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा कर रहे हैं।"
पोप के नज़रिए का ज़िक्र करते हुए उन्होंने आखिर में कहा, "मौजूदा पोप लियो ने दुनिया को एक बहुत बड़ा पैगाम दिया है। अगर हमने इस पर्यावरण और कुदरत की हिफाज़त नहीं की, तो हम ईश्वर के दरबार में पापी ठहरेंगे।"
इंसानी ज़मीर को आवाज़ देने वाला प्रोग्राम
मुंबई प्रेस क्लब में हुए इस सेमिनार ने लोगों के दिलों में कुदरत के प्रति एहतराम को और बढ़ा दिया। सिर्फ भाषणों में कुदरत की बातें करने के बजाय अपने-अपने धर्मों की तालीम को अपनाकर अमली तौर पर पर्यावरण को बचाना चाहिए, इस बात पर सबने ज़ोर दिया। विज़डम फाउंडेशन की इस अनोखी पहल की मुंबई के अलग-अलग तबकों में खूब तारीफ हो रही है।