अजमेर में दशहरा : 65 फीट का होगा रावण,झपकेंगी आंखें और हिलेंगे हाथ,पुतले को अंतिम रूप दे रहे शब्बीर

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 03-10-2026
Dussehra in Ajmer: 65-foot-tall Ravana to feature blinking eyes and moving hands; Shabbir putting the finishing touches on the effigy.
Dussehra in Ajmer: 65-foot-tall Ravana to feature blinking eyes and moving hands; Shabbir putting the finishing touches on the effigy.

 

किशोर सोलंकी / अजमेर ( राजस्थान)

दशहरा महोत्सव की आहट के साथ ही अजमेर में तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर के पटेल मैदान में इस बार भी दशहरा उत्सव का आयोजन किया जाएगा। मैदान में रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के विशाल पुतले तैयार किए जा रहे हैं। इन पुतलों को आकर्षक बनाने के लिए कारीगर दिन रात मेहनत कर रहे हैं। इस बार रावण के पुतले में कुछ ऐसी तकनीकी खूबियां जोड़ी जा रही हैं, जो रावण दहन के दौरान लोगों का ध्यान खींचेंगी।

रावण की आंखें झपकेंगी। उसके हाथ में मौजूद तलवार हिलती हुई दिखाई देगी। दहन के समय उसके मुंह से अंगारे निकलने की व्यवस्था भी की जा रही है। मुकुट पर रंग बिरंगी रोशनी लगाई जाएगी। इन विशेषताओं के कारण अजमेर के लोगों में इस बार के दशहरा महोत्सव को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।

फतेहपुर सीकरी से आए अनुभवी कारीगर शब्बीर अहमद फारुखी और उनकी टीम पुतलों को अंतिम रूप देने में जुटी है। करीब 15 कारीगर इस काम में लगे हुए हैं। इनकी कोशिश है कि दशहरा के दिन तक सभी पुतले तैयार हो जाएं और रावण दहन का आयोजन आकर्षक तरीके से किया जा सके।

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65 फीट ऊंचा होगा रावण का पुतला

अजमेर के पटेल मैदान में इस बार रावण का पुतला करीब 65 फीट ऊंचा बनाया जा रहा है। वहीं, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों की ऊंचाई लगभग 45 फीट होगी। तीनों पुतलों को तैयार करने का काम अजमेर नगर निगम के लिए किया जा रहा है।

कारीगर शब्बीर अहमद फारुखी पिछले 32 वर्षों से रावण और अन्य पुतले बनाने का काम कर रहे हैं। लंबे अनुभव के कारण उन्हें पुतलों की बनावट, उनके संतुलन और दहन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की अच्छी जानकारी है। उनकी टीम पारंपरिक कारीगरी के साथ नई तकनीकों का इस्तेमाल भी कर रही है।

दशहरा के अवसर पर रावण दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पटेल मैदान पहुंचते हैं। ऐसे में पुतलों की ऊंचाई, सजावट और उनकी बनावट पर खास ध्यान दिया जा रहा है। रावण के साथ कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले भी उत्सव का प्रमुख आकर्षण होंगे।

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रावण की झपकती आंखें और हिलती तलवार होंगी खास

इस बार अजमेर के दशहरा महोत्सव में रावण का पुतला केवल अपनी ऊंचाई के कारण ही चर्चा में नहीं रहेगा। इसमें कुछ तकनीकी बदलाव भी किए जा रहे हैं। रावण की आंखों में ऐसी व्यवस्था लगाई जा रही है, जिससे उसकी पलकें झपकती दिखाई देंगी।

इसके अलावा रावण के हाथ में तलवार होगी। उसके हाथों को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि वे हिलते हुए नजर आएं। दहन के समय रावण के मुंह से अंगारे निकलने की व्यवस्था भी की जा रही है। वहीं, उसके मुकुट में आकर्षक रोशनी लगाई जाएगी।

इन विशेषताओं का उद्देश्य रावण के पुतले को पहले से अधिक जीवंत और आकर्षक रूप देना है। पारंपरिक दशहरा उत्सव में अब इस तरह के तकनीकी प्रयोग दर्शकों के लिए अतिरिक्त आकर्षण बन रहे हैं। हालांकि, इन व्यवस्थाओं की अंतिम प्रस्तुति दहन के दिन ही देखने को मिलेगी।

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500 बांस और कई क्विंटल सामग्री का इस्तेमाल

इतने बड़े पुतलों को तैयार करना आसान काम नहीं है। इनके निर्माण में बड़ी मात्रा में बांस, कागज, कपड़ा और दूसरी सामग्री की जरूरत पड़ती है। कारीगरों के अनुसार, इस बार तीनों पुतलों को तैयार करने में लगभग 500 बांस इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

इसके साथ ही करीब पांच से छह क्विंटल रद्दी कागज और अन्य सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। इसमें कपड़ा, बोरी, टाट, सूत, नारियल, गोल्डन पेपर और अभ्रक जैसी चीजें शामिल हैं। पुतलों की बाहरी बनावट तैयार करने और विभिन्न हिस्सों को जोड़ने के लिए मैदा से बनाई गई लेई का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

पुतलों की ऊंचाई अधिक होने के कारण उनके ढांचे को मजबूत रखना जरूरी है। बांस का ढांचा तैयार करने के बाद उस पर अलग अलग सामग्री लगाई जाती है। इसके बाद चेहरे, हाथ, मुकुट और दूसरे हिस्सों को आकार दिया जाता है। अंत में रंगाई, सजावट और तकनीकी उपकरण लगाने का काम होता है।

कारीगरों के लिए यह काम केवल पुतले तैयार करने तक सीमित नहीं है। उन्हें यह भी ध्यान रखना पड़ता है कि पुतले मैदान में ठीक से खड़े रहें और दहन के समय निर्धारित तरीके से जलें। इसलिए निर्माण के हर चरण में सावधानी बरती जाती है।

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शब्बीर अहमद फारुकी / शाकिर अहमद फारुखी

अशोक वाटिका भी तैयार की जा रही है

दशहरा महोत्सव के लिए रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों के अलावा अशोक वाटिका भी तैयार की जा रही है। यह आयोजन की सजावट और प्रस्तुति का हिस्सा होगी। इससे मैदान में उत्सव का माहौल तैयार करने में मदद मिलेगी।

अशोक वाटिका का संबंध रामायण में वर्णित उस स्थान से है, जहां रावण ने माता सीता को रखा था। दशहरा से जुड़े आयोजनों में रामायण के प्रसंगों को दिखाने के लिए इस तरह की सजावट की जाती है। इससे दर्शकों को उत्सव की धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से जुड़ने का अवसर मिलता है।

पटेल मैदान में चल रही तैयारियों के बीच कारीगरों की टीम पुतलों के अलग अलग हिस्सों को पूरा करने में लगी हुई है। समय पर काम पूरा करना उनके लिए अहम है, क्योंकि दशहरा के दिन से पहले सभी व्यवस्थाएं तैयार होनी चाहिए।

अजमेर में दशहरा महोत्सव को लेकर उत्साह

दशहरा देश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक त्योहारों में से एक है। इस दिन भगवान राम की ओर से रावण पर विजय की स्मृति में रावण दहन किया जाता है। कई शहरों में रामलीला, सांस्कृतिक कार्यक्रम और मेले भी आयोजित होते हैं।

अजमेर में भी दशहरा महोत्सव लोगों के लिए सामूहिक उत्सव का अवसर होता है। परिवारों के साथ लोग मैदान में पहुंचते हैं और रावण दहन देखते हैं। बच्चों के लिए ऊंचे पुतले, रोशनी और आतिशी दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र बनते हैं।

इस बार 65 फीट ऊंचा रावण, 45 फीट के कुंभकरण और मेघनाथ तथा रावण की आंखों और हाथों में किए जा रहे तकनीकी प्रयोग उत्सव को खास बना सकते हैं। अब लोगों को दशहरा के दिन का इंतजार है, जब पटेल मैदान में तैयारियां पूरी होने के बाद इन विशाल पुतलों का दहन किया जाएगा