भारत ने 44 साल बाद जीता एशियाई खेलों का हॉकी स्वर्ण, सलीमा टेटे का दिखा जलवा

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 03-10-2026
India wins Asian Games hockey gold after 44 years; Salima Tete shines.
India wins Asian Games hockey gold after 44 years; Salima Tete shines.

 

आवाज द वाॅयस/काकामिगहारा

भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियाई खेलों में 44 साल का इंतजार खत्म कर दिया। भारत ने शुक्रवार, 2 अक्टूबर को आइची नागोया एशियाई खेलों के महिला हॉकी फाइनल में गत चैंपियन चीन को 1 0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस जीत के साथ भारत ने 1982 के बाद पहली बार एशियाई खेलों में महिला हॉकी का स्वर्ण पदक जीता। टीम ने लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई भी कर लिया।

फाइनल मुकाबला शुरू से ही कड़ा रहा। भारत ने शुरुआती मिनटों में आक्रामक खेल दिखाया और 10वें मिनट में बढ़त हासिल कर ली। यह गोल लालरेमसियामी ने किया। उन्होंने शानदार रिवर्स हिट लगाकर गेंद को गोलपोस्ट के ऊपरी हिस्से में पहुंचा दिया। चीन की गोलकीपर के पास इस तेज शॉट को रोकने का कोई मौका नहीं था।

भारत का यह गोल एक बेहतरीन टीम मूव का नतीजा था। सलीमा टेटे ने सर्कल के अंदर सटीक पास दिया। इसके बाद साक्षी ने गेंद को लालरेमसियामी तक पहुंचाया। लालरेमसियामी ने बिना ज्यादा समय गंवाए जोरदार रिवर्स हिट लगाया और भारत को फाइनल में 1 0 की बढ़त दिला दी।

लालरेमसियामी का निर्णायक गोल

भारत के लिए मुकाबले का सबसे अहम क्षण 10वें मिनट में आया। चीन के खिलाफ फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में शुरुआती बढ़त हासिल करना महत्वपूर्ण था। लालरेमसियामी ने इस मौके को पूरी तरह भुनाया।

सलीमा टेटे और साक्षी की भूमिका भी इस गोल में महत्वपूर्ण रही। दोनों खिलाड़ियों ने गेंद को सर्कल तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया। इसके बाद लालरेमसियामी ने शानदार फिनिश किया।

गोल के बाद भारत को लगातार चीन के दबाव का सामना करना पड़ा। चीन ने धीरे धीरे गेंद पर अपना नियंत्रण बढ़ाया। भारतीय सर्कल में कई बार प्रवेश किया। हालांकि भारतीय डिफेंस ने अपनी पकड़ बनाए रखी।

चीन ने बढ़ाया दबाव

पहली बढ़त के बाद भारतीय टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी बढ़त को बचाए रखना थी। चीन ने लगातार हमले किए। उसने भारतीय डिफेंस पर दबाव बनाया और पेनल्टी कॉर्नर हासिल किए।

इसी दौरान नवनीत कौर ने अहम भूमिका निभाई। चीन को मिले पेनल्टी कॉर्नर के प्रयास के दौरान नवनीत कौर ने गोललाइन पर महत्वपूर्ण बचाव किया। उनके इस प्रयास ने चीन को बराबरी करने का मौका नहीं दिया।

भारत की गोलकीपर सविता पुनिया ने भी फाइनल में शानदार प्रदर्शन किया। मुकाबले के एक अहम चरण में चीन को पेनल्टी स्ट्रोक मिला। सविता ने एक हाथ से शानदार बचाव करते हुए चीन के प्रयास को रोक दिया। सविता ने शॉट को सही समय पर पढ़ा और गोल होने से बचा लिया। यह बचाव भारत की 1 0 की बढ़त के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा।

हाफ टाइम तक भारत आगे

चीन के लगातार प्रयासों के बावजूद भारत ने हाफ टाइम तक अपनी 1 0 की बढ़त कायम रखी। पहले हाफ में भारतीय टीम को कई बार दबाव झेलना पड़ा, लेकिन डिफेंस ने चीन को बराबरी का गोल नहीं करने दिया।

दूसरे हाफ में भी चीन ने अपने हमले तेज कर दिए। तीसरे क्वार्टर में चीन ने कई पेनल्टी कॉर्नर हासिल किए। भारतीय खिलाड़ियों ने इन सभी मौकों का सामना मजबूती से किया। सलीमा टेटे सहित भारतीय खिलाड़ियों ने पेनल्टी कॉर्नर रोकने के लिए खुद को गेंद के सामने रखा। टीम ने रक्षात्मक खेल में धैर्य बनाए रखा।

भारत को पता था कि एक गोल की बढ़त काफी नहीं है। चीन किसी भी समय मुकाबले को बराबरी पर ला सकता था। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने दबाव के बीच अपनी रणनीति नहीं छोड़ी।

चीन ने गोलकीपर तक हटा दिया

मुकाबले के आखिरी चरण में चीन ने बराबरी का गोल करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। चीन ने अपना गोलकीपर भी मैदान से बाहर कर दिया। उसकी जगह एक अतिरिक्त आउटफील्ड खिलाड़ी को मैदान में उतारा गया।

इस फैसले का मकसद भारतीय गोल पर लगातार दबाव बनाना था। चीन को बराबरी का गोल चाहिए था, जबकि भारत अपनी 1 0 की बढ़त बचाने में जुटा था। भारतीय टीम ने इस दौरान संयम बनाए रखा। खिलाड़ियों ने गेंद पर नियंत्रण रखने की कोशिश की और चीन को साफ मौका नहीं दिया। भारतीय डिफेंस ने लगातार हमलों का सामना किया।

आखिरकार चीन को बराबरी का गोल नहीं मिला। मुकाबला 1 0 के स्कोर पर समाप्त हुआ। भारत ने एशियाई खेलों में महिला हॉकी का स्वर्ण पदक जीत लिया।

44 साल बाद भारत की वापसी

भारतीय महिला हॉकी के लिए यह जीत ऐतिहासिक है। भारत ने इससे पहले एशियाई खेलों में महिला हॉकी का स्वर्ण पदक 1982 में जीता था। उस समय नई दिल्ली में एशियाई खेल आयोजित हुए थे।

इसके बाद भारत को कई बार पदक के करीब पहुंचने का मौका मिला। भारतीय टीम 1998 और 2018 में एशियाई खेलों के फाइनल तक पहुंची। हालांकि दोनों मौकों पर टीम को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

अब 2026 के आइची नागोया एशियाई खेलों में भारत ने चीन को हराकर 44 साल का इंतजार खत्म कर दिया है।इस जीत के साथ भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियाई स्तर पर अपनी मजबूत मौजूदगी भी दर्ज कराई है। फाइनल में टीम को लगातार चीनी दबाव का सामना करना पड़ा, लेकिन खिलाड़ियों ने आखिरी सीटी तक बढ़त बनाए रखी।

पूरे टूर्नामेंट में भारत का शानदार प्रदर्शन

भारत का एशियाई खेलों का अभियान भी प्रभावशाली रहा। टीम ने पूल ए में चार मुकाबले खेले और चारों में जीत दर्ज की। इस प्रदर्शन के साथ भारत अपने पूल में शीर्ष पर रहा।सेमीफाइनल में भारत का सामना जापान से हुआ। भारतीय टीम ने इस मुकाबले में 7 2 की शानदार जीत दर्ज की और फाइनल में जगह बनाई।

पूल चरण में भारत ने पाकिस्तान को भी 7 1 से हराया था। इस मुकाबले में भारतीय टीम ने आक्रामक हॉकी का प्रदर्शन किया। पूरे टूर्नामेंट में भारत की फॉरवर्ड लाइन ने लगातार दबाव बनाया और टीम ने कई मौकों पर गोल करने की क्षमता दिखाई।

फाइनल में हालांकि मुकाबला पूरी तरह अलग रहा। चीन ने भारत को खुलकर खेलने का ज्यादा मौका नहीं दिया। इसके बावजूद भारत ने एक गोल की बढ़त हासिल की और फिर उसे अंत तक बचाए रखा।

लॉस एंजिल्स ओलंपिक का टिकट

एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने का एक और बड़ा फायदा भारत को मिला है। इस जीत के साथ भारतीय महिला हॉकी टीम ने लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई कर लिया है।

यानी एशियाई खेलों का यह स्वर्ण पदक भारत के लिए सिर्फ एक महाद्वीपीय खिताब नहीं है। इससे टीम को अगले ओलंपिक की तैयारी के लिए भी सीधा रास्ता मिल गया है।भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए 2026 का यह अभियान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि टीम ने पूरे टूर्नामेंट में आक्रामक क्षमता के साथ रक्षात्मक मजबूती भी दिखाई। फाइनल इसका सबसे बड़ा उदाहरण रहा।

भारत की स्वर्णिम वापसी

चीन के खिलाफ 1 0 की जीत में लालरेमसियामी का गोल निर्णायक रहा। लेकिन इस जीत की कहानी केवल एक गोल तक सीमित नहीं है। भारतीय टीम ने पूरे मुकाबले में दबाव झेला, कई पेनल्टी कॉर्नर का सामना किया और आखिरी मिनटों में चीन के अतिरिक्त खिलाड़ी के साथ किए गए हमलों को भी रोका।

सविता पुनिया का पेनल्टी स्ट्रोक बचाना और नवनीत कौर का गोललाइन क्लियरेंस भी फाइनल के अहम पल रहे। सलीमा टेटे ने आक्रमण के साथ साथ रक्षात्मक प्रयासों में भी योगदान दिया।

44 साल बाद एशियाई खेलों में महिला हॉकी का स्वर्ण भारत के नाम हुआ है। 1982 के बाद शुरू हुआ इंतजार 2026 में खत्म हुआ। अब इस स्वर्ण पदक के साथ भारतीय महिला हॉकी टीम की नजर लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक पर होगी।

AEO के लिए प्रमुख सवाल

भारत ने एशियाई खेलों में महिला हॉकी का स्वर्ण कब जीता?
भारत ने 2 अक्टूबर 2026 को चीन को 1 0 से हराकर महिला हॉकी का स्वर्ण पदक जीता।

भारत ने चीन को कितने गोल से हराया?
भारत ने चीन को 1 0 से हराया।

भारत के लिए निर्णायक गोल किसने किया?
लालरेमसियामी ने 10वें मिनट में निर्णायक गोल किया।

भारत ने महिला हॉकी का एशियाई खेलों का स्वर्ण आखिरी बार कब जीता था?
भारत ने इससे पहले 1982 में महिला हॉकी का एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक जीता था।

भारत को इस जीत से क्या फायदा हुआ?
स्वर्ण पदक जीतने के साथ भारत ने लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई कर लिया।