आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी के कारण नदियों में धीरे-धीरे ऑक्सीजन कम होती जा रही है, जिससे मछलियों और नदियों में रहने वाले अन्य जीवों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। एक नए अध्ययन में यह चेतावनी दी गई है।
चीन के शोधकर्ताओं ने उपग्रहों और कृत्रिम मेधा (एआई) के जरिए वर्ष 1985 से दुनियाभर की 21,000 से अधिक नदियों में ऑक्सीजन स्तर का अध्ययन और विश्लेषण किया।
‘साइंस एडवांसेज’ पत्रिका में शुक्रवार को प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, 1985 से अब तक नदियों में ऑक्सीजन का स्तर औसतन 2.1 प्रतिशत घट गया है।
पहली नजर में यह गिरावट बहुत बड़ी नहीं लगती, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका असर लगातार बढ़ता जाता है और यदि यही रफ्तार रही या और इसमें तेजी आयी तो इस सदी के अंत तक पूर्वी अमेरिका, भारत और उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की कई नदियों में ऑक्सीजन का स्तर इतना कम हो सकता है कि मछलियों का दम घुटने लगे और ये ‘ऑक्सीजन रहित’ बन जाए।
वैज्ञानिकों ने बताया कि रसायन विज्ञान और भौतिकी के मूल सिद्धांत के अनुसार गर्म पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है। मानव गतिविधियों से बढ़ रहे जलवायु परिवर्तन के कारण पानी गर्म हो रहा है और इससे अधिक ऑक्सीजन वातावरण में निकल जाती है।
अध्ययन में पाया गया कि यदि ऑक्सीजन घटने की मौजूदा रफ्तार जारी रही, तो इस सदी के अंत तक दुनिया की नदियां औसतन चार प्रतिशत अतिरिक्त ऑक्सीजन खो देंगी और कुछ मामलों में यह गिरावट पांच प्रतिशत के करीब पहुंच सकती है।
अध्ययन के प्रमुख लेखक एवं नानजिंग स्थित ‘चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज’ के पर्यावरण वैज्ञानिक ची गुआन के अनुसार, यही वह स्थिति है जब ऑक्सीजन की कमी यानी ‘डीऑक्सीजनेशन’, मछलियों व नदियों पर निर्भर लोगों के लिए गंभीर समस्या बन जाती है।
‘जीवनविहीन क्षेत्र’ बढ़ने का खतरा