मुख्य निर्वाचन आयुक्त के कार्यकाल के दौरान संप्रग सरकार ने कोई दबाव नहीं डाला: एस. वाई. कुरैशी

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 15-07-2026
the UPA government during my tenure as Chief Election Commissioner: S.Y. Qureshi
the UPA government during my tenure as Chief Election Commissioner: S.Y. Qureshi

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली


 
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के दूसरे कार्यकाल के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) रहे एस. वाई. कुरैशी ने कहा है कि अपने कार्यकाल में उन्हें सरकार की ओर से किसी भी तरह के दबाव का सामना नहीं करना पड़ा।
 
साथ ही कुरैशी ने कहा कि उस समय चुनाव आयोग की छवि ऐसी थी कि ‘‘कोई ऐसा करने की हिम्मत भी नहीं कर सकता था।’’
 
‘पीटीआई वीडियो’ को दिए एक साक्षात्कार में कुरैशी ने यह भी कहा कि चुनाव की तारीखों की जानकारी सरकार को भी सबसे अंत में मिलती थी।
 
यह पूछे जाने पर कि 30 जुलाई 2010 से 10 जून 2012 तक मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान क्या उन्हें सरकार की ओर से किसी दबाव का सामना करना पड़ा था, कुरैशी ने कहा, ‘‘ नहीं, बिल्कुल नहीं। दबाव का कोई सवाल ही नहीं, क्योंकि निर्वाचन आयोग की छवि ऐसी थी कि कोई भी हमसे संपर्क करने की हिम्मत नहीं कर सकता था।’’
 
उन्होंने कहा, ‘‘जहां तक चुनाव की तारीखों का सवाल है, मुझे पता है कि खुफिया ब्यूरो के अधिकारी केवल यह पता लगाने के लिए निर्वाचन भवन के आसपास सक्रिय रहते थे कि चुनाव कब होने वाले हैं। सरकार को हमेशा सबसे अंत में पता चलता था कि हम चुनाव कब कराने जा रहे हैं।’’
 
कुरैशी ने कहा, ‘‘हम चुनाव की घोषणा प्रेस कॉन्फ्रेंस में करते थे और उसी समय सरकार को भी इसकी जानकारी मिलती थी।’’
 
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि अब स्थिति बदल गई है, तो कुरैशी ने कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता।
 
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं पता। मुझे ऐसा नहीं लगता। मुझे उम्मीद है कि ऐसा नहीं है, लेकिन मेरे पास इसकी कोई जानकारी नहीं है।’’
 
कुरैशी ने ये बातें अपनी नयी पुस्तक ‘इंडिया एंड आई: ए हंड्रेड मेमोरीज़, नॉट ए मेमॉयर’ के विमोचन से पहले ‘पीटीआई वीडियो’ को दिए साक्षात्कार में कहीं। हैचेट इंडिया द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में उनके जीवन से जुड़े 100 महत्वपूर्ण प्रसंगों का वर्णन है।
 
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब विपक्षी दल वर्तमान निर्वाचन आयोग पर सरकार के साथ मिलीभगत के आरोप लगा रहे हैं।
 
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि निर्वाचन आयोग सरकार के इशारे पर काम कर रहा है और उसके अनुसार फैसले ले रहा है। हालांकि निर्वाचन आयोग और सरकार दोनों ने इन आरोपों को खारिज किया है।