आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
वैज्ञानिकों ने एक ऐसे प्रयोगात्मक अणु की पहचान की है जो अल्जाइमर रोग से लड़ने में मस्तिष्क की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली को फिर से सक्रिय कर सकता है। ओएलई (OLE) नामक यह अणु मस्तिष्क की प्रतिरक्षा कोशिकाओं माइक्रोग्लिया को पुनः प्रोग्राम कर उनकी सुरक्षात्मक क्षमता बहाल करने में सक्षम पाया गया है। अध्ययन के अनुसार, इस उपचार से विषैले बीटा-अमाइलॉइड प्लाक का जमाव कम हुआ और स्मृति से जुड़े परीक्षणों में बेहतर परिणाम देखने को मिले।
यह शोध स्पेन के इंस्टीट्यूट फॉर न्यूरोसाइंसेज और स्विट्जरलैंड के ईपीएफएल के वैज्ञानिकों ने किया। अध्ययन के निष्कर्ष प्रतिष्ठित पत्रिका सेल डेथ एंड डिजीज में प्रकाशित हुए हैं।
अल्जाइमर रोग की प्रमुख पहचान मस्तिष्क में बीटा-अमाइलॉइड प्लाक का जमा होना है। सामान्य परिस्थितियों में माइक्रोग्लिया इन हानिकारक जमावों को हटाने का काम करती हैं, लेकिन बीमारी बढ़ने के साथ उनकी कार्यक्षमता कमजोर पड़ जाती है। इससे मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने लगता है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि PM20D1 जीन द्वारा निर्मित OLE अणु माइक्रोग्लिया को फिर से सक्रिय कर सकता है। उपचार के बाद ये कोशिकाएं बीटा-अमाइलॉइड प्लाक के आसपास पहुंचकर उनके चारों ओर एक सुरक्षात्मक परत बना लेती हैं। इससे प्लाक और तंत्रिका कोशिकाओं के बीच सीधा संपर्क कम हो जाता है तथा मस्तिष्क ऊतकों पर पड़ने वाला हानिकारक प्रभाव घट जाता है।
इस प्रभाव का परीक्षण वैज्ञानिकों ने आनुवंशिक रूप से संशोधित सी. एलिगेंस कृमियों और चूहों पर किया। इन जीवों में OLE उपचार से प्रोटीन के हानिकारक जमाव में कमी आई और उनकी गतिविधियों तथा स्मृति संबंधी प्रदर्शन में सुधार देखा गया।
मुख्य शोधकर्ता जोसे विसेंटे सांचेज़ म्यूट के अनुसार, यह खोज महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहली बार ऐसा अणु मिला है जो अल्जाइमर में क्षतिग्रस्त हो चुकी माइक्रोग्लिया की सुरक्षात्मक भूमिका को पुनः स्थापित कर सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह शोध भविष्य में अल्जाइमर के नए और अधिक प्रभावी उपचार विकसित करने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।