नांदेड़ की शादी: 3,465 ग्रामीणों को 1 लाख का बीमा कवर, पेठकर परिवार की अनोखी पहल

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 26-05-2026
Nanded's Unique Wedding: The Pethkar Family Provides Accident Insurance Worth ₹1 Lakh to 3,465 Villagers—Setting a Shining Example of Humanity.
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आवाज द वॉयस/ नई दिल्ली  

महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के कंधार तालुका के बहादरपुरा गांव में 20 मई को हुई एक शादी ने सिर्फ दो लोगों को नहीं, बल्कि पूरे गांव को एक ऐसे भावनात्मक अनुभव से जोड़ दिया, जिसकी चर्चा अब दूर-दूर तक हो रही है। यह विवाह सिद्धेश्वर पेठकर और मंजुषा का था, लेकिन यह आयोजन केवल एक पारंपरिक वैवाहिक उत्सव बनकर नहीं रह गया, बल्कि यह इंसानियत, सामाजिक जिम्मेदारी और सामूहिक सुरक्षा की एक जीवंत मिसाल बन गया।

आमतौर पर शादियों में भव्यता, दिखावा और खर्च की होड़ देखने को मिलती है, लेकिन पेठकर परिवार ने इस परंपरा को एक बिल्कुल अलग दिशा दी। सिद्धेश्वर और उनके बड़े भाई अनूप पेठकर ने अपने परिवार की ओर से इस खुशी के अवसर को पूरे गांव के जीवन से जोड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने इस शादी को केवल निजी आनंद तक सीमित न रखते हुए, इसे एक सामुदायिक सुरक्षा कवच में बदल दिया।

इस अनोखी पहल के तहत गांव के लगभग 3,465 निवासियों—कुछ रिपोर्टों में यह संख्या करीब 3,456 भी बताई जाती है—को दुर्घटना बीमा के दायरे में शामिल किया गया। प्रत्येक व्यक्ति के लिए 1 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कवर सुनिश्चित किया गया, जिससे कुल बीमित राशि लगभग 33.6 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। यह अपने आप में एक असाधारण और अभूतपूर्व कदम था, जिसने पूरे गांव को एक सुरक्षा के भाव से भर दिया।

इस पूरी योजना के पीछे पेठकर परिवार की वह गहरी समझ थी, जो ग्रामीण जीवन की वास्तविक कठिनाइयों को करीब से देखती है। अनूप पेठकर ने बताया कि नांदेड़ के ग्रामीण इलाकों में सांप के काटने, बिजली गिरने और अन्य आकस्मिक दुर्घटनाओं के कारण होने वाली मौतें और गंभीर घटनाएं असामान्य नहीं हैं। ऐसे में उनके लिए यह विचार केवल एक सामाजिक प्रयोग नहीं था, बल्कि एक भावनात्मक जिम्मेदारी थी—कि शादी की खुशी को समाज के दुख-दर्द से भी जोड़ा जाए।

इस उद्देश्य को साकार करने के लिए गांव की ग्राम पंचायत के नाम पर एक सामूहिक बीमा पॉलिसी ली गई। यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी पात्र ग्रामीण इस सुरक्षा से वंचित न रह जाए, पूरे गांव की मतदाता सूची बीमा कंपनी को सौंपी गई। यह प्रक्रिया न केवल व्यवस्थित थी, बल्कि अत्यंत समावेशी भी थी, जिससे हर व्यक्ति को इस योजना का हिस्सा बनाया जा सका।

हालांकि इस विशाल पहल के वित्तीय विवरण को पेठकर परिवार ने गोपनीय रखने का निर्णय लिया। सिद्धेश्वर पेठकर ने विनम्रता से कहा कि उनकी संस्कृति में दान का ढिंढोरा पीटना उचित नहीं माना जाता। उनके अनुसार यह कार्य किसी प्रचार या पहचान के लिए नहीं था, बल्कि लोगों का आशीर्वाद और उनके जीवन में सुरक्षा की भावना जोड़ने के उद्देश्य से किया गया एक सच्चा प्रयास था।

इस विवाह समारोह में उत्साह का स्तर भी असाधारण था। 4,500 से अधिक मेहमान इस भव्य आयोजन का हिस्सा बने, जिससे पूरा गांव उत्सव के माहौल में डूब गया। लेकिन इस पूरे समारोह की सबसे खास बात सिर्फ भीड़ या भव्यता नहीं थी, बल्कि वह भावना थी जिसने हर किसी के दिल को छू लिया—कि एक शादी पूरे समुदाय के लिए सुरक्षा और आश्वासन का प्रतीक बन सकती है।

गांव के निवासी मोहन शेकापुरे ने इस अनुभव को बेहद भावुक शब्दों में याद करते हुए कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया था। उनके अनुसार यह एक भव्य शादी थी, लेकिन जिस तरह से पूरे गांव को बीमा सुरक्षा दी गई, उसने इसे जीवन भर याद रहने वाला अवसर बना दिया।

वहीं गांव के सरपंच बलिराम पेठकर ने भी इस पहल की सराहना करते हुए इसे एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह संभवतः पहली ऐसी घटना है, जिसमें किसी शादी के उपहार के रूप में पूरे गांव को दुर्घटना बीमा कवर प्रदान किया गया हो। उनके अनुसार यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक नई सोच का रास्ता खोलता है—जहां व्यक्तिगत खुशियां सामूहिक भलाई में बदल सकती हैं।

यह बीमा पॉलिसी एक वर्ष के लिए वैध है और भविष्य में इसके नवीनीकरण पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे इस पहल की निरंतरता बनी रह सके।

इस पूरी घटना ने यह साबित कर दिया कि जब सोच केवल व्यक्तिगत लाभ से आगे बढ़कर समाज के लिए कुछ करने की हो, तो एक साधारण सा विवाह भी इतिहास बन सकता है। बहादरपुरा गांव की यह शादी अब सिर्फ एक पारिवारिक स्मृति नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश बन चुकी है—कि सच्ची खुशियां वही हैं, जो दूसरों के जीवन में सुरक्षा और उम्मीद की रोशनी जला दें।