Land grabbing case: Court seeks details of interrogation of Abhishek Banerjee's PA
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार से कहा कि वह तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय की पूछताछ से जुड़े रिकॉर्ड पेश करे।
रॉय ने आरोप लगाया था कि जांच करने वालों ने जमीन हड़पने के कथित मामले में उनसे बहुत कम पूछताछ की थी।
इसके अलावा, शीर्ष अदालत ने रॉय को गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा अगली सुनवाई (सात सितंबर) तक के लिए बढ़ा दी।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ रॉय की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कलकत्ता उच्च न्यायालय के छह अगस्त के आदेश को चुनौती दी गई थी।
उच्च न्यायालय ने साल्बोनी भूमि कब्जाने के मामले में रॉय को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद, छह अगस्त को ही शीर्ष अदालत ने इस मामले में रॉय की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी।
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान, रॉय की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि पूरी पूछताछ की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई थी और उनके मुवक्किल ने पूछे गए सभी सवालों के जवाब दिए थे।
शंकरनारायण ने पहले दी गई इस जानकारी में सुधार किया कि रॉय ने चुप रहने के अपने अधिकार का इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा कि पीठ के समक्ष दाखिल एक अतिरिक्त हलफनामे से पता चलता है कि रॉय ने खुद के खिलाफ गवाही न देने के अधिकार का इस्तेमाल नहीं किया था और जांच में पूरा सहयोग किया था।
हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि जांच करने वालों ने रॉय से उस अपराध के बारे में कम सवाल पूछे, जिसकी जांच हो रही थी, जबकि उनके परिवार तथा तृणमूल कांग्रेस के कामकाज, भर्ती और फंडिंग के बारे में अधिक सवाल पूछे गये।
उन्होंने कहा, ‘‘पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई है।’’ उन्होंने यह भी बताया कि रॉय से रोजाना आठ से नौ घंटे तक पूछताछ की जाती थी और अलग-अलग प्राथमिकी के सिलसिले में उन्हें बारी-बारी से बुलाया जाता था।