Joint declarations on farmers' rights, digital agriculture and food security at the BRICS meeting
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारत की अध्यक्षता में इंदौर में आयोजित ब्रिक्स देशों की बैठक में खाद्य सुरक्षा, किसानों के अधिकारों, डिजिटल कृषि और जलवायु-लचीली खेती को लेकर शनिवार को संयुक्त घोषणाएं की गईं जिनमें बीज प्रणालियों में किसानों के अधिकारों और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के लिए फोरम की स्थापना शामिल है।
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पांच दिवसीय बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया कि ब्रिक्स के सदस्य देशों ने कृषि सहयोग बढ़ाने के लिए कई नयी संस्थागत पहलों पर सहमति जताई है जिनमें से कई पहलों का समन्वय भारत करेगा।
चौहान के अनुसार सदस्य देशों ने बीज प्रणालियों में किसानों के अधिकारों और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के लिए ‘‘ग्लोबल फोरम ऑन फार्मर्स राइट्स इन सीड सिस्टम्स’’ स्थापित करने पर सहमति जताई है।
उन्होंने बताया कि इस मंच का समन्वय भारत करेगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स देशों ने कृषि आदानों, आनुवंशिक संसाधनों और सूचना साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए ‘‘ब्रिक्स एग्रीन नेटवर्क’’ के गठन का भी निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि इस नेटवर्क का समन्वय भी भारत करेगा।
चौहान ने बताया कि सदस्य देशों ने ‘‘ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज’’ संबंधी पहल को आगे बढ़ाने और इसके संचालन तंत्र पर चर्चा जारी रखने पर सहमति व्यक्त की है।
उनके अनुसार यह पहल खाद्यान्न व्यापार और आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाने में सहायक हो सकती है।
कृषि मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए ‘एग्रोइकोलॉजी’ और पुनर्योजी कृषि के क्षेत्र में ‘‘ब्रिक्स सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस नेटवर्क’’ स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया है। इस पहल का प्रारंभिक समन्वय भारत के भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अधीन संस्थान द्वारा किया जाएगा।