हेरिटेज वॉक की जनक बनीं कथक नृत्यांगना नवीना जाफा

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 12-06-2026
Dr. Navina Jafa: A Bridge-Builder of Kathak, Heritage, and Cultural Diplomacy
Dr. Navina Jafa: A Bridge-Builder of Kathak, Heritage, and Cultural Diplomacy

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली  

“संस्कृति सिर्फ़ स्मारक नहीं, यह हमारी जीवन शैली और पहचान है।” यह शब्द डॉ. नवीना जाफा के हैं, जो भारत की प्रतिष्ठित कथक नृत्यांगना, सांस्कृतिक रणनीतिकार और इतिहासकार हैं। जन्म मुस्लिम परिवार में हुआ, लेकिन उनके कार्य और दृष्टिकोण भारतीय उपमहाद्वीप की विविधता और बहुलवाद को प्रतिबिंबित करते हैं। कथक के मंच से लेकर हेरिटेज वॉक्स और वैश्विक सांस्कृतिक परियोजनाओं तक, डॉ. जाफा ने कला और समाज को जोड़ने का अनूठा तरीका अपनाया है। उनके काम ने न केवल कलाकारों को सशक्त बनाया है, बल्कि भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत को जीवंत और वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया है।

डॉ. नवीना जाफा का जन्म डोमिनिका (Dominica), वेस्ट इंडीज़ में हुआ था। डॉ. नवीना जाफा एक बहुप्रतिभाशाली सांस्कृतिक रणनीतिकार, स्थिरता समर्थक, कथक नृत्यांगना और इतिहासकार हैं। वे विरासत, पर्यटन और समुदायिक अंतर्दृष्टि को जोड़कर सशक्त, नवाचारी और टिकाऊ भविष्य के लिए काम करती हैं। उनका जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ था, लेकिन उनकी सांस्कृतिक दृष्टि और कार्य भारतीय संस्कृति की विविधता और बहुलवाद (pluralism) को दर्शाती है। नवीना ने हिंदू, पारसी और सूफी परंपराओं सहित विभिन्न भारतीय सांस्कृतिक धारणाओं को अपने काम में शामिल किया है।
 
डॉ. जाफा का मानना है कि नृत्य केवल कला नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति के संवाद का माध्यम है। मंच पर प्रदर्शन करते समय, म्यूज़िशियंस, ऑडियंस और लाइट्स के बीच संतुलन बनाना, मल्टी-स्किलिंग और सहज संवाद की क्षमता विकसित करता है। उनके गुरुओं में पंडित बिरजू महाराज और डॉक्टर कपिलासन जैसी हस्तियां शामिल हैं, जिन्होंने उन्हें नृत्य और संस्कृति के बीच गहरे संबंध को समझने का अवसर दिया।
 
 
उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी बेहद प्रभावशाली है। डॉ. जाफा ने इतिहास और कला इतिहास (Art History) में गहन अध्ययन किया है। वे फुलब्राइट स्कॉलर रह चुकी हैं और Smithsonian Center for Folklife and Cultural Heritage, वाशिंगटन डी.सी. में सांस्कृतिक प्रबंधन और प्रतिनिधित्व पर कार्य कर चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के लिए ‘संस्कृति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ से जुड़े प्रोजेक्ट्स में योगदान दिया है।
 
कथक में उनकी विशेष शैली उन्हें केवल तकनीकी नृत्यांगना ही नहीं, बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप के साझा इतिहास और गंगा-जमुनी तहज़ीब को जीवंत करने वाली विदुषी बनाती है। समीक्षक उनके नृत्य को ‘देह-इतिहास’ (History-in-the-body) कहते हैं, यानी शरीर के माध्यम से इतिहास को याद करना और सहेजना।
 
डॉ. जाफा ने ‘परफॉर्मिंग हेरिटेज’ के माध्यम से कथक को सांस्कृतिक पर्यटन और शिक्षा से जोड़ा। उन्होंने भारत में हेरिटेज वॉक्स (Heritage Walks) की अवधारणा को लोकप्रिय किया, जहां दर्शक केवल इमारतें नहीं देखते, बल्कि इतिहास की कहानियों, संगीत, अभिनय और नृत्य के माध्यम से उसे अनुभव करते हैं। उनके इस काम को SAGE Publications द्वारा प्रकाशित मार्गदर्शिका पुस्तक “Exhibiting India: The Art of Heritage Walks” में भी शामिल किया गया है।
 
 
उनके हेरिटेज वॉक्स ने देश-विदेश के राष्ट्रपतियों, राजनयिकों, कॉर्पोरेट दिग्गजों और छात्रों के लिए विशेष पर्यटन आयोजित किए हैं, जिनमें लद्दाख, स्पीति, दिल्ली, दक्षिण भारत और पश्चिम बंगाल जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया।
 
सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय है। कोविड-19 के दौरान उन्होंने लगभग 7,000 कलाकारों, नट, सपेरा और बेहरूपियों को राशन और आर्थिक मदद दिलाई। ग्रामीण कलाकारों और शिल्पकारों को मुख्यधारा के पर्यटन से जोड़कर उनकी वित्तीय और आर्टिस्टिक सस्टेनेबिलिटी सुनिश्चित करना उनका प्रमुख उद्देश्य रहा है।
 
डॉ. जाफा का मानना है कि युवा पीढ़ी को कला और विरासत के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए डिजिटल माध्यमों का संतुलित उपयोग करना चाहिए। उन्होंने ‘कथक टेल्स’ जैसे एपिसोड-रिल्स तैयार किए हैं, जो कथक नृत्य की गहराई और सांस्कृतिक संदर्भ को मनोरंजक और शिक्षाप्रद रूप में प्रस्तुत करते हैं।
 
 
वर्तमान में, डॉ. जाफा कथक नृत्य, अभिनय और समुदाय विकास के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने के लिए ‘कल्चरल स्किल कॉरिडोर’ की अवधारणा पर काम कर रही हैं, जिससे भारत और एशिया के अन्य देशों में सांस्कृतिक पहचान और साझी विरासत को प्रदर्शित किया जा सके।
 
डॉ. जाफा का संदेश स्पष्ट है: जीवन को पूरी तरह जीएं, वर्तमान पल में सर्वोत्तम दें, कला के माध्यम से समाज में सकारात्मक प्रभाव डालें और हर चुनौती को क्रिएटिव अवसर के रूप में देखें। उनके शब्दों में, “भारत की संस्कृति एक नदी की तरह बहती है, कभी रुकती नहीं। इसे समझना, जीना और आगे बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी है।”
 
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