बीबीसी की टॉप तस्वीरों में शामिल हुई असम के हाफिज अहमद की तस्वीर

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 13-06-2026
Photo of Assam's Hafiz Ahmed featured among BBC's top photos.
Photo of Assam's Hafiz Ahmed featured among BBC's top photos.

 

अरीफुल इस्लाम / गुवाहाटी

हम अक्सर टीवी या मोबाइल की स्क्रीन पर दिखने वाले कलाकारों और उनकी प्रतिभा की तारीफ करते हैं। लेकिन कैमरे के पीछे रहकर उन खूबसूरत पलों को कैद करने वाले लोग भी कमाल के हुनरमंद होते हैं। असम के गुवाहाटी के रहने वाले फोटो जर्नलिस्ट हाफिज अहमद इसका एक बेहतरीन उदाहरण हैं। उनकी खींची एक अनोखी तस्वीर ने इस समय पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन यानी बीबीसी ने हाफिज अहमद की इस तस्वीर को अपनी नौ सबसे बेहतरीन तस्वीरों की सूची में दूसरा स्थान दिया है।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की रिहर्सल और मोंडेरियन कला का संयोग

हाफिज अहमद ने यह ऐतिहासिक तस्वीर इसी साल 16जनवरी को खींची थी। गुवाहाटी के सरोशजैत में स्थित अर्जुन भोगेश्वर बरुआ खेल परियोजना स्टेडियम में बोरो समुदाय के कलाकारों ने पारंपरिक बागरुम्बा नृत्य पेश किया था। इस बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराना था। हाफिज अहमद ने बताया कि यह तस्वीर मुख्य कार्यक्रम से एक दिन पहले अंतिम पूर्वाभ्यास यानी फाइनल रिहर्सल के दौरान ली गई थी।

उन्होंने यह तस्वीर स्टेडियम की गैलरी के सबसे ऊपरी हिस्से से खींची थी। हाफिज के मुताबिक उन्होंने इसे एक सामान्य प्रक्रिया के तहत क्लिक किया था। जैसे वे रोज अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को रिहर्सल से पहले और बाद की तस्वीरें भेजते हैं, वैसे ही इसे भी भेजा था।

उन्हें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि इस फोटो को इतनी बड़ी वैश्विक पहचान मिलेगी। बाद में कला पारखियों ने महसूस किया कि इस तस्वीर का विजुअल पैटर्न प्रसिद्ध अमूर्त कलाकार पीट मोंडेरियन की पेंटिंग शैली से काफी मेल खाता है।

अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ काम और मुख्यमंत्री की बधाई

हाफिज अहमद लंबे समय से अमेरिकी फोटो एजेंसी जूमा प्रेस के लिए फ्रीलांस काम कर रहे हैं। उन्होंने जनवरी में अन्य खबरों के साथ इस तस्वीर को भी जूमा प्रेस को भेजा था। बाद में बीबीसी ने वैश्विक एजेंसियों के माध्यम से इस तस्वीर का चयन अपनी प्रतिष्ठित सूची के लिए किया।

इस बड़ी कामयाबी के बाद सोशल मीडिया पर हाफिज को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा के कार्यालय ने भी उन्हें इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए विशेष बधाई संदेश भेजा है।

अपनी इस सफलता पर हाफिज अहमद ने असम सरकार और मुख्यमंत्री का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एक बहुत ही सुंदर और भव्य कार्यक्रम आयोजित करके असम की समृद्ध संस्कृति को विश्व पटल पर स्थापित करने का सराहनीय प्रयास कर रहे हैं।

सरकार की इन अनूठी पहलों के कारण ही बिहू, झुमुर और बागरुम्बा जैसे लोक नृत्यों को आज दुनिया के कोने-कोने में जाना जा रहा है। अगर सरकार ऐसा मंच तैयार नहीं करती तो उन्हें शायद कभी ऐसी अद्भुत तस्वीर खींचने का मौका ही नहीं मिलता।

करियर की शुरुआत और समाचार फोटोग्राफी की चुनौतियां

हाफिज अहमद को बचपन से ही समाचार फोटोग्राफी और पत्रकारिता में गहरी रुचि थी। उन्होंने सेंटिनल अखबार के साथ जुड़कर अपने फोटो पत्रकारिता करियर की औपचारिक शुरुआत की थी। वर्तमान में वे कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के साथ एक फ्रीलांस कंट्रीब्यूटर के रूप में काम कर रहे हैं।

वे नियमित रूप से इन वैश्विक मंचों को पूर्वोत्तर भारत की तस्वीरें भेजते हैं। इन एजेंसियों में जूमा प्रेस, रॉयटर्स और अनादोलू जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इसके साथ ही वे गुवाहाटी से राष्ट्रीय समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया यानी पीटीआई के लिए भी नियमित रूप से काम करते हैं।

न्यूज फोटोग्राफी की मुश्किलों के बारे में बात करते हुए हाफिज ने बताया कि इस पेशे में हर दिन नई चुनौतियां सामने आती हैं। समाचार फोटोग्राफी में आप किसी अच्छे समय या परफेक्ट लाइट का इंतजार नहीं कर सकते। मैदान पर घटनाएं अचानक घटती हैं और आपको हर सेकंड कैमरे के साथ बिल्कुल तैयार रहना पड़ता है। जरा सी चूक से एक बड़ा और ऐतिहासिक पल हाथ से निकल सकता है।

पुरस्कारों से आगे काम के प्रति समर्पण

हाफिज अहमद को उनके बेहतरीन काम के लिए अब तक कई सम्मान और पुरस्कार मिल चुके हैं। हाल ही में गुवाहाटी के दिसपुर प्रेस क्लब के स्थापना दिवस समारोह में भी उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया था। हालांकि हाफिज का मानना है कि वे कभी भी किसी पुरस्कार या सम्मान की लालसा में काम नहीं करते हैं।

उन्हें अपना काम दिल से पसंद है और उनकी कोशिश हमेशा एक ऐसी कहानी बयां करने वाली तस्वीर लेने की होती है जो समाज को प्रभावित कर सके। बीबीसी जैसी संस्था से मिला यह सम्मान उनके लिए पूरी तरह से अप्रत्याशित था। वे कहते हैं कि इस तरह की सराहना उन्हें भविष्य में और अधिक मेहनत करने की प्रेरणा देती है।

हाफिज अहमद मूल रूप से गोलाघाट के बेनेनाखोवा के रहने वाले हैं। साल 2012 में उन्होंने लालमती स्थित आईआईई से फोटोग्राफी का एक प्रोफेशनल कोर्स किया था। इसके बाद उन्होंने कृष्णाकांत संदिकी ओपन यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री भी हासिल की।

तब से लेकर आज तक वे लगातार मीडिया जगत से जुड़े हुए हैं। चूहे के बिलों में होने वाले अवैध खनन यानी रैट-होल माइनिंग के दौरान उनके द्वारा ली गई एक ग्राउंड रिपोर्टिंग तस्वीर ने भी पहले काफी सुर्खियां बटोरी थीं। वह फोटो हाफिज के दिल के बेहद करीब है।

फिलहाल गुवाहाटी को अपना बसेरा बना चुके हाफिज के लिए फोटोग्राफी केवल एक पेशा नहीं बल्कि उनका सबसे बड़ा जुनून है। उनका मानना है कि एक अकेली तस्वीर में इतनी ताकत होती है कि वह बिना शब्दों के पूरी दुनिया में खबर फैला सकती है।