संयुक्त राष्ट्र प्रमुख से मिले जयशंकर, भारत की वैश्विक भूमिका पर चर्चा

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 14-07-2026
Jaishankar meets UN chief; discusses India's global role.
Jaishankar meets UN chief; discusses India's global role.

 

न्यूयॉर्क

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात कर पश्चिम एशिया, यूक्रेन, सूडान सहित कई महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच मजबूत सहयोग की समीक्षा की और बदलते वैश्विक परिदृश्य में बहुपक्षीय संस्थाओं की भूमिका पर भी विचार साझा किए।

बैठक के बाद सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी देते हुए जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव के साथ वैश्विक घटनाक्रमों पर सार्थक बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच मजबूत साझेदारी अंतरराष्ट्रीय शांति, विकास और सहयोग को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

इस मुलाकात से पहले भारत ने आधिकारिक तौर पर वर्ष 2028-29 के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के अस्थायी सदस्य के रूप में अपनी उम्मीदवारी का अभियान शुरू किया। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि दुनिया ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां संघर्ष, हिंसा और अस्थिरता लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

उन्होंने कहा कि भारत की उम्मीदवारी ऐसे समय आई है जब दुनिया कई जटिल चुनौतियों का सामना कर रही है। इसलिए सदस्य देशों के लिए यह जानना स्वाभाविक है कि भारत वैश्विक समुदाय के सामने क्या दृष्टि और क्या अनुभव प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि भारत केवल अपनी सोच ही नहीं, बल्कि शांति और सुरक्षा के क्षेत्र में अपने लंबे योगदान के आधार पर भी दुनिया का विश्वास हासिल करना चाहता है।

जयशंकर ने इस अवसर पर भारत का वैश्विक दृष्टिकोण "शांति" (SHANTI) भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि SHANTI का अर्थ है "Securing Holistic Advancement through Norms, Trust and Integrity", यानी नियमों, विश्वास और ईमानदारी के आधार पर समग्र प्रगति सुनिश्चित करना। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में शांति, विकास और समृद्धि को अलग अलग नहीं देखा जा सकता। यदि वैश्विक व्यवस्था मजबूत होगी और अंतरराष्ट्रीय नियमों का सम्मान होगा, तभी सभी देशों का संतुलित विकास संभव है।

विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भारत के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के बाद से अब तक भारत लगभग तीन लाख सैनिक और कर्मियों को दुनिया भर के करीब 50 शांति मिशनों में भेज चुका है। वर्तमान में भी भारत के 4,300 से अधिक शांति सैनिक संयुक्त राष्ट्र के 11 में से 10 सक्रिय मिशनों में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत भविष्य में भी आधुनिक तकनीक से लैस, प्रभावी और स्पष्ट जनादेश वाले शांति अभियानों का समर्थन करता रहेगा।

उन्होंने महिलाओं की भूमिका पर भी जोर देते हुए कहा कि भारत "महिला, शांति और सुरक्षा" एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उनका मानना है कि स्थायी शांति और समावेशी विकास में महिलाओं की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है।

जयशंकर ने कहा कि भारत केवल शांति स्थापना में ही नहीं, बल्कि विकास सहयोग के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि भारत की सहायता से 79 देशों में विभिन्न विकास परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। भारत हमेशा संवाद, कूटनीति और सहयोग के माध्यम से वैश्विक विवादों के समाधान का समर्थक रहा है। साथ ही उसने वैश्विक दक्षिण यानी विकासशील देशों की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से उठाया है।

उन्होंने विश्वास जताया कि यदि भारत सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य चुना जाता है तो परिषद के निर्णयों में अधिक संतुलन, व्यापक परामर्श और वैश्विक हितों का बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से भारत की उम्मीदवारी का समर्थन करने की अपील भी की।

भारत इससे पहले आठ बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है। वर्ष 2021-22 में भारत का पिछला कार्यकाल पूरा हुआ था। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार और समकालीन वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप उसके विस्तार की मांग करता रहा है।

संयुक्त राष्ट्र में अपने कार्यक्रमों के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ब्रसेल्स रवाना होंगे, जहां वह भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद की तीसरी बैठक में हिस्सा लेंगे। इस दौरान उनकी यूरोपीय संघ और बेल्जियम के वरिष्ठ नेताओं के साथ व्यापार, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण वार्ताएं भी प्रस्तावित हैं।