India's Defence Budget 2026–27: Major preparations to strengthen security and become self-reliant
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने साल 2026–27 के लिए जो रक्षा बजट पेश किया है, वह अब तक का सबसे बड़ा रक्षा बजट माना जा रहा है। इस बार रक्षा मंत्रालय के लिए कुल 7.85 लाख करोड़ रुपये रखे गए हैं। यह सभी मंत्रालयों में सबसे ज्यादा है और पिछले साल की तुलना में करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखाता है। सरकार का साफ कहना है कि देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और आने वाले समय की चुनौतियों को देखते हुए सेना को और मजबूत बनाया जाएगा।
इस बजट का सबसे बड़ा मकसद सेना को भविष्य के लिए तैयार करना है। आज के समय में लड़ाई सिर्फ जमीन, समुद्र या आसमान तक सीमित नहीं रह गई है। अब ड्रोन, साइबर तकनीक और नई मशीनों की भी अहम भूमिका हो गई है। इसी वजह से सरकार ने नए लड़ाकू विमान, युद्धपोत, पनडुब्बियां, ड्रोन और आधुनिक हथियारों की खरीद के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि तय की है। इससे थलसेना, नौसेना और वायुसेना की ताकत और क्षमता बढ़ेगी।
इस बार के रक्षा बजट में ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर खास ध्यान दिया गया है। पहले भारत को रक्षा उपकरणों के लिए दूसरे देशों पर काफी निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब सरकार चाहती है कि ज्यादातर हथियार और तकनीक देश में ही बनें। इसी सोच के तहत 1.39 लाख करोड़ रुपये सिर्फ घरेलू कंपनियों से रक्षा सामान खरीदने के लिए रखे गए हैं। इसके अलावा पूंजीगत खरीद का 75 प्रतिशत हिस्सा भारतीय कंपनियों के लिए तय किया गया है। इससे देश की रक्षा कंपनियों, छोटे उद्योगों और स्टार्टअप्स को बड़ा फायदा मिलेगा और रोजगार के नए मौके भी पैदा होंगे।
रक्षा अनुसंधान और विकास यानी रिसर्च के क्षेत्र में भी सरकार ने बजट बढ़ाया है। डीआरडीओ के लिए 29,100.25 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इससे नई मिसाइलें, रडार सिस्टम, आधुनिक हथियार और नई तकनीक पर काम और तेज होगा। सरकार का लक्ष्य है कि भारत आने वाले समय में सिर्फ अपनी जरूरतें ही पूरी न करे, बल्कि दूसरे देशों को भी रक्षा उपकरण बेच सके।
सरकार ने इस बजट में पूर्व सैनिकों और सेना से जुड़े लोगों का भी खास ख्याल रखा है। ईसीएचएस और पेंशन के लिए 12,100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे देश के 34 लाख से ज्यादा पेंशन पाने वाले पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को मदद मिलेगी। यह कदम यह दिखाता है कि सरकार सेना के जवानों और उनके परिवारों की जिम्मेदारी को गंभीरता से लेती है।
सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। सीमा सड़क संगठन के लिए 7,394 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इस पैसे से सीमा क्षेत्रों में सड़कें, पुल, सुरंगें और हवाई पट्टियां बनाई जाएंगी। इससे सेना को तेजी से आवाजाही में मदद मिलेगी और सीमाई इलाकों के विकास को भी रफ्तार मिलेगी।
कुल मिलाकर रक्षा बजट 2026–27 देश की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह बजट न सिर्फ सेना की ताकत बढ़ाने पर ध्यान देता है, बल्कि देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और सैनिकों के कल्याण को भी प्राथमिकता देता है। सरकार का संदेश साफ है कि भारत अपनी सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और भविष्य की तैयारी को लेकर पूरी तरह गंभीर है।