आवाज़ द वॉयस | नई दिल्ली
“या अल्लाह! सबको सेहत और तंदुरुस्ती अता फ़रमा, हिंदुस्तान समेत पूरी दुनिया में अमन क़ायम कर, और हमारे दिलों से दुश्मनी और नफ़रत निकाल दे…”
इन दुआओं की गूंज के साथ शब-ए-बारात की पाक रात भारत के कोने-कोने में इबादत, तौबा और मग़फिरत की रौशनी से जगमगाती रही। फज्र की नमाज़ तक मस्जिदों में सजदे लगते रहे, कुरआन की तिलावत और सामूहिक दुआओं का सिलसिला बिना रुके चलता रहा। गुरुग्राम की साइबर सिटी की जामा मस्जिद से लेकर कश्मीर की वादियों, दिल्ली, मुंबई, अजमेर और दक्षिण भारत तक—हर जगह यही मंज़र था, मानो पूरी रात इबादत के नूर में डूब गई हो।
#WATCH | Shab-e-Barat being observed at Nizamuddin Darga, in Delhi.
— ANI (@ANI) February 3, 2026
Shab-e-Barat, also known as the 'night of forgiveness', is observed on the 14th and 15th night of Sha'aban, the eighth month in the Islamic calendar. pic.twitter.com/sO75AkzSHk
शब-ए-बारात के मौके पर देशभर की मस्जिदों और दरगाहों में अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ी। दिल्ली की निज़ामुद्दीन दरगाह में रात ढलते ही ज़िक्र-ओ-अज़कार की महफ़िलें सज गईं। दरगाह परिसर में लोग हाथ उठाकर अपने गुनाहों की माफी मांगते, बीमारों की शिफ़ा और दुनिया में अमन की दुआ करते नज़र आए। राजस्थान की अजमेर शरीफ़ दरगाह में भी ख्वाजा गरीब नवाज़ के आस्ताने पर लाखों ज़ायरीनों ने हाज़िरी दी और रहमत व बरकत की दुआएं मांगीं। उत्तर भारत से दक्षिण तक, लगभग हर बड़ी-छोटी दरगाह पर यही रूहानी माहौल दिखाई दिया।
People lit candles at the graves of their loved ones on the eve of Shab-e-Baraat in Srinagar. pic.twitter.com/4XvHTudUe8
— Basit Zargar (باسط) (@basiitzargar) March 7, 2023
शब-ए-बारात की रात की एक अहम परंपरा अपने दिवंगत बुज़ुर्गों और रिश्तेदारों की कब्रों पर फातिहा पढ़ना—भी पूरे एहतिराम के साथ निभाई गई। दिल्ली, लखनऊ, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई और श्रीनगर समेत कई शहरों के कब्रिस्तानों में मोमबत्तियों और दीयों की रौशनी दिखी। लोग अपने माता-पिता, रिश्तेदारों और अज़ीज़ों की मग़फिरत के लिए दुआ करते रहे। यह दृश्य सिर्फ़ आस्था का नहीं, बल्कि यादों, रिश्तों और इंसानी जज़्बातों का भी आईना था।
Mirwaiz Umar Farooq (@MirwaizKashmir) posts,
— Press Trust of India (@PTI_News) February 3, 2026
"As mosques across the region light up in devotion on this sacred night, Jama Masjid Srinagar stays shut under watch. Yet another closure, and I remain detained at home. Shab-e-Baraat joins a long list since 2019 when prayers at the… pic.twitter.com/lIZOs4BRlg
कश्मीर में शब-ए-बारात की रात कब्रिस्तानों में दीये जलाए गए और लोगों ने अपने अज़ीज़ों की कब्रों पर दुआएं पढ़ीं। हालांकि, इसी बीच श्रीनगर की जामा मस्जिद के बंद रहने को लेकर एक बार फिर सवाल उठे। मीरवाइज उमर फारूक ने सोशल मीडिया पर लिखा कि 2019 के बाद से शब-ए-बारात समेत कई अहम मौकों पर घाटी की सबसे बड़ी मस्जिद में नमाज़ अदा करने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने इसे ‘नॉर्मलसी’ और ‘नया कश्मीर’ के दावों के उलट बताते हुए कहा कि बंद दरवाज़े और ख़ामोशी अपने-आप में कई सवाल खड़े करते हैं।
Shab-e-baraat MUBARAK pic.twitter.com/IyK2A41v0O
— Waris Pathan (@warispathan) April 20, 2019
मुंबई में शब-ए-बारात की रात इबादत करने वालों की भारी भीड़ को देखते हुए रेलवे को विशेष इंतज़ाम करने पड़े। पश्चिम रेलवे ने चर्चगेट-विरार रूट पर देर रात विशेष लोकल ट्रेनें चलाईं, ताकि मस्जिदों और कब्रिस्तानों से लौट रहे अकीदतमंदों को किसी तरह की परेशानी न हो। प्लेटफॉर्म्स और ट्रेनों में दिखी भीड़ इस बात की गवाह थी कि महानगर की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी भी इस पाक रात में ठहरकर इबादत में शामिल हो गई।
दक्षिण भारत में भी शब-ए-बारात पूरे एहतराम और रूहानियत के साथ मनाई गई। तमिलनाडु के कोयंबटूर में जमातुल सालीहीन मस्जिद में रातभर नमाज़, तिलावत और दुआओं का सिलसिला चला। कर्नाटक, केरल और तेलंगाना के कई शहरों में मस्जिदों को सजाया गया और लोगों ने रमज़ान से पहले इस रात को आत्मशुद्धि और आत्ममंथन का अवसर बनाया। कश्मीर में हज़रतबल सहित कई ज़ियारत स्थलों पर भी रातभर जागरण और इबादत जारी रही, जहां प्रशासन ने व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष इंतज़ाम किए।
Western Railway will run a special Churchgate–Virar slow local for Shab-e-Baraat, departing Churchgate at 2:35 am and reaching Virar at 4:15 am, easing late-night festive travel for city commuters too.
— Mid Day (@mid_day) February 1, 2026
The return Virar–Churchgate train leaves Virar at 1:42 am, arrives Churchgate… pic.twitter.com/XR6quSdDeH
इस्लामी परंपरा में शब-ए-बारात को ‘मग़फिरत की रात’, ‘नजात की रात’ और ‘लैलतुल मुबारकाह’ कहा जाता है। यह शाबान महीने की पंद्रहवीं रात होती है, जिसे रमज़ान से पहले आत्मसंयम, तौबा और तैयारी का अहम पड़ाव माना जाता है। उलेमा के मुताबिक, इस रात अल्लाह अपने बंदों की सच्ची तौबा क़बूल करता है, गुनाहों को माफ़ करता है और आने वाले साल के लिए रहमतों के फ़ैसले फ़रमाता है। यही वजह है कि मुसलमान इस रात नफ़्ल नमाज़, कुरआन की तिलावत, ज़िक्र और दुआ में मशगूल रहते हैं।
शब-ए-बारात की रूहानियत सोशल मीडिया पर भी साफ़ नज़र आई। देश के अलग-अलग हिस्सों से मस्जिदों की जगमगाती तस्वीरें, कब्रिस्तानों में दीये जलाते लोग और दरगाहों पर उमड़ी भीड़ के वीडियो साझा किए गए। “शब-ए-बारात मुबारक” के संदेशों के साथ लोगों ने एक-दूसरे के लिए अमन, सेहत और खुशहाली की दुआएं कीं। डिजिटल दुनिया में भी इस पाक रात का पैग़ाम—माफी, मोहब्बत और इंसानियत—खूब गूंजा।
NEWS || শ্বাব-ই-বৰাতঃ আশা, দয়া আৰু আত্মশুদ্ধিৰ পবিত্ৰ নিশা
— Awaz The Voice Assam (@AssamAwaz) February 3, 2026
Read More: https://t.co/eMfkeebzCh#ShabeBarat #indian #islam #Ramadan pic.twitter.com/QcWK84cksw
इस रात की सबसे बड़ी खूबसूरती यह रही कि दुआओं का दायरा सिर्फ़ निजी ज़िंदगी तक सीमित नहीं था। मस्जिदों में उठे हाथों में पूरी दुनिया के लिए शांति, इंसाफ़ और भाईचारे की कामना शामिल थी। कहीं फ़िलस्तीन, कहीं कश्मीर, कहीं युद्धग्रस्त इलाक़ों के लिए अमन की दुआ मांगी गई, तो कहीं भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब और आपसी सौहार्द के लिए।
शब-ए-बारात 2026 इस मायने में भी ख़ास रही कि इसने एक बार फिर याद दिलाया मज़हब का असली पैग़ाम नफ़रत नहीं, बल्कि माफी, रहमत और इंसानियत है। यह रात लोगों को अपने गिरेबान में झांकने, गलतियों पर शर्मिंदा होने और बेहतर इंसान बनने का संकल्प लेने का मौका देती है।
Thousands of devotees join night long vigil on the occasion of Shab-e-Meraj at Hazratbal shrine in Srinagar pic.twitter.com/u2d72YtEns
— Basit Zargar (باسط) (@basiitzargar) February 18, 2023
पूरे देश में मनाई गई शब-ए-बारात की यह पाक रात, दुआओं, इबादत और इंसानी एकजुटता का ऐसा मंज़र पेश कर गई, जिसने यह एहसास और गहरा कर दिया कि जब दिलों से नफ़रत निकलती है, तो समाज में अमन अपने-आप जगह बना लेता है।