कश्मीर की ‘बेस्ट टीचर’: इरफ़ाना तबस्सुम की मेहनत ने रच दिया इतिहास

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 04-02-2026
Kashmir: The story of Irfana Tabassum's struggle – from zero resources to a successful school.
Kashmir: The story of Irfana Tabassum's struggle – from zero resources to a successful school.

 

आवाज़ द वॉइस/ श्रीनगर

श्रीनगर के रहलपुरा इलाके का एक सरकारी प्राइमरी स्कूल आज शिक्षा और मेहनत की मिसाल बन चुका है। इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा श्रेय उस शिक्षक का जाता है जिन्होंने न केवल बच्चों की पढ़ाई की स्थिति को सुधारने का काम किया, बल्कि पूरे इलाके में शिक्षा के महत्व को भी दोबारा जीवित किया। बेस्ट टीचर अवॉर्ड से सम्मानित इरफ़ाना तबस्सुम ने इस स्कूल को एकदम शून्य स्थिति से उत्कृष्ट स्तर तक पहुँचाया।

इरफ़ाना तबस्सुम जम्मू-कश्मीर एजुकेशन डिपार्टमेंट की जुड़ी हुई हैं। 2007 में उन्होंने एजुकेशन डिपार्टमेंट में जनरल लाइन टीचर के रूप में अपनी सेवाएँ शुरू कीं। इस दौरान उन्होंने विभिन्न शैक्षिक परियोजनाओं में सक्रिय भूमिका निभाई और शिक्षण की नई विधाओं, टीचर ट्रेनिंग और आधुनिक शिक्षण तकनीकों का अनुभव प्राप्त किया। इस अनुभव ने उन्हें बड़े चैलेंज लेने का आत्मविश्वास दिया।

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2013 में इरफ़ाना तबस्सुम को रहलपुरा के एक सरकारी प्राइमरी स्कूल की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिसकी स्थिति अत्यंत चिंताजनक थी। उस समय स्कूल में कोई छात्र नहीं था, स्कूल भवन टूटी-फूटी हालत में था और छात्र रजिस्ट्रेशन का काम पूरी तरह ठप पड़ा हुआ था।

लेकिन इरफ़ाना ने हार नहीं मानी। उन्होंने सबसे पहले स्कूल का वातावरण सुधारने की दिशा में कदम उठाया। पुराने और टूटे फर्नीचर को ठीक किया, क्लासरूम व्यवस्थित किए और बच्चों और अभिभावकों को आकर्षित करने के लिए सुबह की असेंबली में माइक्रोफोन का इस्तेमाल किया। उन्होंने इलाके के लोगों से संपर्क बनाकर उन्हें यह विश्वास दिलाया कि स्कूल अब बच्चों की पढ़ाई के लिए सुरक्षित और गुणवत्ता वाला स्थल बन चुका है।

इरफ़ाना तबस्सुम ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार स्कूल में FLN (फाउंडेशनल लर्निंग) और स्किलफुल लर्निंग लागू की। क्लासरूम में एजुकेशनल चार्ट्स लगाए गए, छात्रों के लिए प्रोफ़ाइल सिस्टम बनाया गया, मासिक पाठ्यक्रम की योजना तैयार की गई और नियमित मूल्यांकन रिकॉर्ड बनाए गए। उन्होंने बच्चों को सिर्फ़ किताबों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें गार्डनिंग, खेलकूद और प्रैक्टिकल गतिविधियों से जोड़कर उनके कौशल विकास पर भी ध्यान दिया। इस प्रक्रिया ने बच्चों को न केवल पढ़ाई में रुचि दिलाई, बल्कि उन्हें जीवन कौशल भी सिखाए।

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इरफ़ाना के अथक प्रयासों के चलते स्कूल के लिए अतिरिक्त ज़मीन भी हासिल की गई। अब स्कूल के पास लगभग छह से सात कनाल ज़मीन है, जिसे भविष्य में नए भवन, खेल के मैदान और अन्य शैक्षिक सुविधाओं के लिए विकसित किया जा सकता है। उन्होंने सरकार से स्कूल को मिडिल या हाई स्कूल में अपग्रेड करने की मांग भी की है, ताकि इलाके के बच्चों को और बेहतर शिक्षा सुविधाएँ मिल सकें।

इरफ़ाना तबस्सुम की मेहनत और प्रतिबद्धता का ही परिणाम है कि आज स्कूल में सत्तर से अधिक बच्चे नियमित रूप से पढ़ाई कर रहे हैं। इस उपलब्धि के लिए उन्हें बडगाम डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन, ज़ोनल एजुकेशन ऑफिस और जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा कई पुरस्कार मिल चुके हैं। 5 सितंबर को लेफ्टिनेंट गवर्नर की ओर से उन्हें स्टेट टीचर अवॉर्ड प्रदान किया गया, जो उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है।

इरफ़ाना तबस्सुम बताती हैं कि सफलता का राज़ ईमानदारी, लगन और अपने पेशे से सच्चा प्रेम है। उनका मानना है कि हर शिक्षक को अपने प्रोफेशन के प्रति ईमानदार रहना चाहिए और समाज में ज्ञान का प्रकाश फैलाना चाहिए। उनके अनुसार शिक्षक केवल छात्रों को किताबों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि उनमें नैतिकता, अनुशासन और समाजिक जिम्मेदारी का भाव भी विकसित करते हैं।

इरफ़ाना का यह सफर केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि पूरे कश्मीर के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है। उन्होंने यह साबित किया कि अगर इरादा मजबूत हो, तो ज़ीरो रोल से भी सफलता की नींव रखी जा सकती है। उनके प्रयासों ने यह दिखा दिया कि शिक्षा का असली मूल्य केवल अंक और परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व और कौशल का विकास भी है।

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आज, रहलपुरा का यह सरकारी प्राइमरी स्कूल न केवल पढ़ाई में उत्कृष्टता का प्रतीक बन गया है, बल्कि पूरे इलाके के लिए शिक्षा और समाजिक सुधार की मिसाल भी बन चुका है। इरफ़ाना तबस्सुम की प्रतिबद्धता और मेहनत ने यह संदेश दिया है कि चुनौतियाँ चाहे कितनी भी बड़ी हों, सच्ची लगन और ईमानदारी से उन्हें पार किया जा सकता है। उनके इस संघर्ष और सफलता की कहानी न केवल शिक्षकों के लिए बल्कि सभी समाजिक क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों के लिए प्रेरणादायक है।

इरफ़ाना का मानना है कि शिक्षक केवल अपने छात्रों के भविष्य को नहीं, बल्कि समाज के भविष्य को भी आकार देते हैं। उनका यह दृष्टिकोण और समर्पण कश्मीर के शिक्षा क्षेत्र में नए अध्याय की शुरुआत करता है। यही कारण है कि आज वह सिर्फ़ राहुलपुरा ही नहीं, बल्कि पूरे कश्मीर के लिए प्रेरणा और आदर्श बन चुकी हैं।