आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) के निवर्तमान चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) संजीव कुमार सिंह ने मंगलवार को कहा कि कंपनी की गुजरात के झगड़िया में 50,000 टन प्रतिवर्ष क्षमता वाली परियोजना से कंपनी की आय और रणनीतिक प्रदर्शन मजबूत हो सकता है, जिससे उसे भविष्य में नवरत्न का दर्जा हासिल करने में मदद मिल सकती है।
झगड़िया परियोजना को गुजरात कॉपर परियोजना (जीसीपी) के नाम से जाना जाता है। यह गुजरात के भरूच में स्थित 50,000 टन प्रतिवर्ष क्षमता वाली सेकेंडरी कॉपर स्मेल्टर एवं रिफाइनरी है।
हिंदुस्तान कॉपर ने गुजरात कॉपर संयंत्र को फिर से शुरू करने के लिए लोहुम मटेरियल्स के साथ राजस्व-साझेदारी मॉडल के तहत साझेदारी की है।
सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ हिंदुस्तान कॉपर के लिए यह परियोजना वित्तीय प्रदर्शन और परिसंपत्तियों की उत्पादकता को मजबूत करने में योगदान दे सकती है। भारत सरकार के लागू ढांचे के अधीन यह परियोजना आय, लाभप्रदता, परिचालन आकार और रणनीतिक प्रदर्शन बढ़ाकर कंपनी को भविष्य में नवरत्न का दर्जा हासिल करने की दिशा में भी मदद कर सकती है।’’
अनुपम मिश्रा एक जुलाई से कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) का कार्यभार संभालेंगे।
हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) खान मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत एक ‘मिनीरत्न’ केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (सीपीएसई) है।
लोक उद्यम विभाग द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सार्वजनिक उपक्रमों को दिया जाने वाला नवरत्न दर्जा कंपनियों को अधिक वित्तीय एवं परिचालन स्वायत्तता प्रदान करता है। इसके तहत कंपनियां सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना अपनी आंतरिक परियोजनाओं में 1,000 करोड़ रुपये या अपनी शुद्ध संपत्ति (नेटवर्थ) के 15 प्रतिशत तक निवेश कर सकती हैं।