बड़े यूपीआई भुगतान पर शुल्क: छह साल बाद क्यों बदली मुफ्त लेनदेन की व्यवस्था

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 16-09-2026
Fees on large UPI payments: Why free transactions have changed after six years
Fees on large UPI payments: Why free transactions have changed after six years

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
किसी व्यापारी के 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 'मर्चेंट डिस्काउंट रेट' (एमडीआर) यानी शुल्क लगाना उस व्यवस्था में बदलाव है, जिसमें पिछले छह वर्षों से यूपीआई भुगतान मुफ्त रखने की लागत मुख्य रूप से बैंकों, भुगतान कंपनियों और सरकार के बजटीय प्रोत्साहन से उठाई जा रही थी।
 
मंगलवार शाम जारी आधिकारिक बयान में 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत की दर से एमडीआर लगाए जाने की बात कही गई। हालांकि, यह शुल्क ग्राहक की जगह व्यापारी से वसूला जाएगा और दो व्यक्तियों के बीच होने वाले लेनदेन को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
 
इसके साथ जनवरी, 2020 से लागू शून्य एमडीआर व्यवस्था बदल गई। पुरानी व्यवस्था का मकसद डिजिटल भुगतान को तेजी से बढ़ावा देना था। उस समय यह मॉडल समझ में आता था क्योंकि यूपीआई अभी विस्तार के दौर में था। लेकिन आज इसका पैमाना बिल्कुल बदल चुका है।
 
अगस्त, 2026 में यूपीआई पर 2,451 करोड़ लेनदेन किए गए और उनका कुल मूल्य 29.9 लाख करोड़ रुपये रहा। इतने बड़े पैमाने पर भुगतान नेटवर्क को 24 घंटे चलाने, उसकी क्षमता बढ़ाने, साइबर सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने की लागत भी बढ़ी है