दिल्ली सरकार डीएसईयू के पुनर्गठन पर कर रही विचार

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 14-08-2026
Delhi government is considering restructuring DSEU
Delhi government is considering restructuring DSEU

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
दिल्ली सरकार दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय (डीएसईयू) के पुनर्गठन या इसमें विलय किए गए सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों को अलग करने पर विचार कर रही है। एक विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के कामकाज से जुड़ी कुछ समस्याएं सामने आने के बाद इस कदम पर विचार किया जा रहा है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

सरकार विश्वविद्यालय के कामकाज को लेकर विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट का मूल्यांकन कर रही है।
 
एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘समिति की रिपोर्ट की समीक्षा की जा रही है और जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। रिपोर्ट में यह पाया गया है कि विश्वविद्यालय के कामकाज में कुछ समस्याएं हैं।’’
 
अधिकारी ने बताया कि दो विकल्पों पर विचार किया जा रहा है—डीएसईयू के ढांचे में बदलाव करना या पॉलिटेक्निक संस्थानों को विश्वविद्यालय से अलग करना, ताकि तकनीकी शिक्षा को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।
 
उन्होंने कहा, ‘‘आगे बढ़ने के लिए दो विकल्प हैं—या तो विश्वविद्यालय के ढांचे में फिर से बदलाव किया जाए या कम से कम पॉलिटेक्निक संस्थानों को इससे अलग किया जाए, ताकि तकनीकी शिक्षा को सही तरीके से आगे बढ़ाया जा सके। समिति की रिपोर्ट का मूल्यांकन किया जा रहा है और विशेषज्ञों से संपर्क किया जा रहा है।’’
 
इस साल की शुरुआत में अधिकारियों ने कहा था कि सरकार डीएसईयू के समग्र कामकाज की समीक्षा के लिए हितधारकों और विशेषज्ञों के साथ व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श के संबंध में विचार कर रही है। इसमें सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों और कौशल केंद्रों के विश्वविद्यालय में विलय के प्रभाव का आकलन भी शामिल है।
 
अधिकारियों ने बताया था कि विश्वविद्यालय की व्यापक समीक्षा के लिए पूर्व में गठित चार-सदस्यीय समिति की 30 जनवरी को बैठक हुई थी। बैठक में डीएसईयू के प्रशासनिक ढांचे, शैक्षणिक प्रक्रियाओं, शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती, मानव संसाधन, पाठ्यक्रमों की रूपरेखा, विलय किए गए परिसरों में उपलब्ध संपत्तियों और सुविधाओं के उपयोग तथा अन्य प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा की गई थी।
 
इस समीक्षा का महत्व इसलिए बढ़ गया है, क्योंकि छात्र और कर्मचारी कथित कुप्रबंधन, बुनियादी ढांचे की कमियों, शुल्क में बढ़ोतरी, शिक्षकों से जुड़े मुद्दों और घटते नामांकन को लेकर लगातार शिकायतें करते रहे हैं।