लाल कुआं की पतंगों में भाईचारे और देशभक्ति का संदेश

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 14-08-2026
Lal Kuan's Kite Market: Where the spirit of patriotism shines in a sky adorned with the colors of Hindu-Muslim unity.
Lal Kuan's Kite Market: Where the spirit of patriotism shines in a sky adorned with the colors of Hindu-Muslim unity.

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली
 
राजधानी दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त की तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। बाजारों में तिरंगे की रंगत दिखाई देने लगी है, वहीं पुरानी दिल्ली का ऐतिहासिक लाल कुआँ पतंग बाजार भी रंग-बिरंगी पतंगों से सज चुका है। आज भी दिल्ली में पतंग उड़ाने के शौकीनों की कमी नहीं है और स्वतंत्रता दिवस से पहले लाल कुआँ का यह पारंपरिक बाजार इसका जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया है। यहां न केवल दिल्ली बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों तक पतंगों की आपूर्ति की जाती है।

सौ वर्षों से भी अधिक पुराना यह पतंग बाजार इन दिनों खासा गुलजार है। बाजार की दुकानों पर तरह-तरह की पतंगें लटकी दिखाई दे रही हैं और ग्राहकों की आवाजाही बढ़ गई है। रंग-बिरंगी, कार्टून और 3D प्रिंट वाली पतंगों से लेकर तिरंगे और पारंपरिक डिजाइन की पतंगें लोगों को आकर्षित कर रही हैं। स्वतंत्रता दिवस से पहले बाजार में बच्चों से लेकर अनुभवी पतंगबाजों तक के लिए अलग-अलग तरह की पतंगें उपलब्ध हैं।
 
लेकिन लाल कुआँ का यह बाजार केवल पतंगों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है। यह पुरानी दिल्ली की उस गंगा-जमुनी तहजीब और साझा संस्कृति की भी तस्वीर पेश करता है, जहां अलग-अलग धर्मों के लोग एक-दूसरे के त्योहारों और खुशियों में बराबर की भागीदारी निभाते हैं। खास बात यह है कि यहां बड़ी संख्या में पतंग कारोबारी मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, जो पूरे उत्साह के साथ पतंगों का कारोबार कर रहे हैं और स्वतंत्रता दिवस की खुशियों में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
 
 
पतंगों के रंगों में दिखाई दे रही देशभक्ति
 
भारत में 15 अगस्त केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि देश की आजादी, एकता और विविधता का उत्सव है। दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस की कल्पना लंबे समय से पतंगों और आसमान में उड़ते रंगों के बिना अधूरी मानी जाती रही है। लाल कुआँ का पतंग बाजार इस परंपरा को आज भी जिंदा रखे हुए है।
 
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिल्ली की छतों पर पतंग उड़ाने की पुरानी परंपरा बाजार की रौनक को और बढ़ा देती है। तिरंगे रंगों वाली पतंगें खास तौर पर लोगों का ध्यान खींच रही हैं। बच्चों के लिए कार्टून कैरेक्टर और 3D प्रिंट वाली पतंगों की मांग है, जबकि देशभक्ति की भावना से जुड़े तिरंगे और पारंपरिक डिजाइन भी खरीदारों को आकर्षित कर रहे हैं।
 
बाजार में ₹1 से लेकर बड़ी और डिजाइनर पतंगों तक हर वर्ग के खरीदार के लिए विकल्प मौजूद हैं। बेहद सस्ती छोटी पतंगें बच्चों के बीच लोकप्रिय हैं, जबकि अनुभवी पतंगबाज बेहतर गुणवत्ता वाली पतंगों की तलाश में यहां पहुंच रहे हैं।
 
दुकानदारों के मुताबिक बरेली, रामपुर और जयपुर की पतंगों की भी अपनी खास पहचान है। वहीं अनुभवी पतंगबाजों में बरेली और लखनऊ की पतंगों को लेकर खास पसंद देखने को मिलती है। दुकानदार बताते हैं कि स्वतंत्रता दिवस के दौरान बच्चों के बीच रंगीन और प्रिंटेड पतंगों की सबसे अधिक मांग रहती है। दूसरी ओर, वर्षों से पतंगबाजी करने वाले लोग पतंग की गुणवत्ता, आकार और उड़ान को प्राथमिकता देते हैं और पेशेवर पतंगों की खरीद करते हैं।
 
 
सात पीढ़ियों से पतंग के कारोबार से जुड़ा परिवार
 
लाल कुआँ के इस बाजार की खासियत सिर्फ इसकी उम्र नहीं, बल्कि यहां पीढ़ियों से चली आ रही पतंग बनाने और बेचने की परंपरा भी है। सात पीढ़ियों से पतंग के कारोबार से जुड़े व्यापारी फैसल हुसैन इस बाजार की साझा संस्कृति और भाईचारे को बेहद खास मानते हैं।
 
फैसल हुसैन कहते हैं, “हमारे लिए कोई त्योहार छोटा-बड़ा या किसी एक धर्म का नहीं होता। स्वतंत्रता दिवस हो या कोई और मौका, हम बस यही चाहते हैं कि लोग खुश रहें। पतंग उड़ाना खुशी का प्रतीक है और हम उसी खुशी का हिस्सा बनते हैं।” उनकी यह बात लाल कुआँ के बाजार की उस तस्वीर को सामने रखती है, जहां कारोबार के साथ-साथ लोगों के बीच रिश्ते और साझा खुशियां भी महत्वपूर्ण हैं। यहां दुकानदारों के लिए ग्राहक का धर्म नहीं, बल्कि उसकी पसंद और खुशी मायने रखती है।
 
दिल्ली ही नहीं, दूसरे राज्यों से भी पहुंचते हैं ग्राहक
 
स्वतंत्रता दिवस के आसपास लाल कुआँ का पतंग बाजार दिल्ली-एनसीआर के अलावा आसपास के राज्यों के खरीदारों से भी गुलजार हो जाता है। दुकानदारों के मुताबिक दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और एनसीआर के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग पतंग खरीदने लाल कुआँ पहुंचते हैं। यह बाजार वर्षों से पतंग प्रेमियों के लिए एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां उपलब्ध पतंगों की विविधता और कीमतों की रेंज इसे हर आयु और हर वर्ग के लोगों के लिए आकर्षक बनाती है। यही वजह है कि स्वतंत्रता दिवस से पहले बाजार में खरीदारी का सिलसिला तेज हो जाता है।
 
पतंग के साथ सुरक्षा का भी संदेश
 
लाल कुआँ के दुकानदार सिर्फ पतंग बेचने तक सीमित नहीं हैं। बाजार में पतंगों के साथ सूत की डोर यानी सादी डोर भी उपलब्ध है। व्यापारी इसे सुरक्षित पतंगबाजी की दिशा में महत्वपूर्ण मानते हैं। उनका कहना है कि त्योहार और खुशी तभी सार्थक हैं, जब उन्हें जिम्मेदारी और दूसरों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए मनाया जाए।
 
व्यापारियों का मानना है कि पतंगबाजी खुशी और उत्सव का प्रतीक है, इसलिए इसे किसी के लिए परेशानी या नुकसान का कारण नहीं बनना चाहिए। सुरक्षित डोर का इस्तेमाल और जिम्मेदारी के साथ पतंग उड़ाना जरूरी है।
 
 
त्योहार धर्म से ऊपर, खुशी सबकी
 
लाल कुआँ की गलियों में मौजूद यह बाजार भारत की उस साझा संस्कृति की याद दिलाता है, जहां त्योहारों की खुशी किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं रहती। यहां मुस्लिम दुकानदार हिंदू ग्राहकों और अन्य समुदायों के लोगों को पतंग बेचते हैं और स्वतंत्रता दिवस की खुशियों का हिस्सा बनते हैं।
 
यही दृश्य भारत की सामाजिक विविधता और आपसी मेल-जोल को मजबूत करता है। देश में अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग जब एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होते हैं, तो यह केवल सामाजिक सहभागिता नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बन जाता है। लाल कुआँ का पतंग बाजार इसी परंपरा को अपने तरीके से आगे बढ़ाता दिखाई देता है।
 
आज जब कभी-कभी धर्म के नाम पर समाज को बांटने वाली बातें सुनाई देती हैं, ऐसे समय में लाल कुआँ का यह बाजार भाईचारे, सद्भाव और साझा भारतीय पहचान का सकारात्मक संदेश देता है। यहां हिंदू और मुस्लिम दुकानदार, ग्राहक और पतंग प्रेमी एक ही बाजार में एक-दूसरे के साथ त्योहार की खुशियां साझा करते नजर आते हैं।
 
 
व्यापार से आगे, लोगों को जोड़ने की डोर
 
लाल कुआँ के व्यापारियों के लिए पतंग का कारोबार सिर्फ रोजी-रोटी का जरिया नहीं है। यह एक ऐसी परंपरा है, जिसने पीढ़ियों को जोड़ा है और अलग-अलग समुदायों के लोगों को भी एक-दूसरे के करीब लाया है। बाजार के कारोबारी मानते हैं कि व्यापार केवल मुनाफा कमाने का माध्यम नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ने का जरिया भी हो सकता है। एक दुकान से खरीदी गई पतंग किसी बच्चे की खुशी बनती है, किसी परिवार के लिए त्योहार की याद बनती है और स्वतंत्रता दिवस पर वही पतंग देशभक्ति के रंगों के साथ आसमान में उड़ती दिखाई देती है।
 
15 अगस्त को जब दिल्ली की छतों पर पतंगें उड़ेंगी और आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाएगा, तो उनमें सिर्फ कागज और डोर नहीं होगी। उनमें आजादी की खुशी, देश के प्रति प्रेम और लोगों को जोड़ने वाली साझा भावना भी होगी।
 
लाल कुआँ का यह सौ साल से भी अधिक पुराना पतंग बाजार इसी संदेश को जीवंत करता है कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता में एकता और साझा संस्कृति में है। यहां मुस्लिम दुकानदारों के हाथों से निकली पतंगें हिंदू, मुस्लिम और हर समुदाय के लोगों की खुशियों का हिस्सा बनती हैं। यही इस बाजार की सबसे खूबसूरत पहचान है।
 
 
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल कुआँ की दुकानों में सजी तिरंगे रंगों की पतंगें मानो यही कहती हैं कि देशभक्ति किसी एक धर्म, भाषा या समुदाय की भावना नहीं, बल्कि हर भारतीय की साझा भावना है। जब अलग-अलग रंग एक ही आसमान में साथ उड़ते हैं, तो वे भारत की तस्वीर को और खूबसूरत बना देते हैं। लाल कुआँ का पतंग बाजार इसलिए सिर्फ दिल्ली का एक पुराना बाजार नहीं, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता, सांप्रदायिक सौहार्द, साझा संस्कृति और देशभक्ति की ऐसी जीवंत तस्वीर है, जहां हर पतंग अपने साथ खुशी और भाईचारे का संदेश लेकर आसमान की ओर उड़ती है।
 
ALSO WATCH: