मलिक असगर हाशमी/ नई दिल्ली
पुरानी दिल्ली का स्वतंत्रता दिवस पतंगबाजी के बिना अधूरा माना जाता है। हर साल 15 अगस्त को यहां का आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से पट जाता है। पुरानी दिल्ली की छतों पर पेंच लड़ाने का अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। पतंग कटते ही चारो तरफ बो काटा का शोर गूंज उठता है। शाहजहानाबाद की यह पतंगबाजी परंपरा आज देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर में अपनी खास पहचान बना चुकी है।
यदि आप पुरानी दिल्ली में नहीं रहते हैं और इस बार स्वतंत्रता दिवस पर यहां की पतंगबाजी का अनुभव करना चाहते हैं तो आपके लिए एक बेहतरीन मौका आया है। इस खास अनुभव के लिए आपको थोड़ी जेब ढीली करनी पड़ेगी।
पुरानी दिल्ली की ऐतिहासिक हवेली धर्मपुरा में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तीन दिवसीय पतंगबाजी उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन 14 अगस्त से 16 अगस्त तक चलेगा। प्रतिदिन शाम 4:00 बजे से आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम के लिए प्रति व्यक्ति 2500 रुपये का टिकट रखा गया है।

5 साल या उससे अधिक उम्र के बच्चों और बड़ों के लिए टिकट अनिवार्य किया गया है। यह आयोजन किसी आम छत पर नहीं बल्कि यूनेस्को से सम्मानित और संरक्षित 137 साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत हवेली धर्मपुरा की छत पर हो रहा है।
इस विशेष आयोजन में शामिल होने वाले पर्यटक चांदनी चौक और जामा मस्जिद के भव्य दृश्यों के बीच पुरानी दिल्ली के आसमान को पतंगों से भरते देख सकेंगे। हवेली की विशाल छत पर मेहमानों के लिए खड़े होकर और बैठकर पतंगबाजी का आनंद लेने का पूरा प्रबंध किया गया है।
दो घंटे की अवधि वाले इस इवेंट के दौरान मेहमानों को पतंग और मांझा दिया जाएगा। आप वहां खुद पतंग उड़ा सकते हैं और दूसरों की पतंग काट कर उत्सव मना सकते हैं। इस दौरान हवेली का स्टाफ मेहमानों को दिल्ली की पतंगबाजी की पुरानी परंपराओं और इतिहास के बारे में विस्तार से जानकारी देगा।
पतंगबाजी के साथ-साथ इस टिकट पैकेज में खान-पान का विशेष ध्यान रखा गया है। मेहमानों को कार्यक्रम के दौरान चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक्स परोसी जाएगी। इसके बाद पुरानी दिल्ली के मशहूर जायकों से भरा 4-कोर्स हाई-टी मेनू सर्व किया जाएगा।
इसमें पुरानी दिल्ली की प्रसिद्ध कुरकुरी पालक पत्ता चाट और सदियों पुरानी दुकानों के पारंपरिक समोसे शामिल होंगे। शाम के समय जब ढलते सूरज की लालिमा जामा मस्जिद के मीनारों पर पड़ेगी, तब यह नजारा देखने लायक होगा।
हवेली धर्मपुरा चांदनी चौक की संकरी गली कत्रा नीलब के पास स्थित है। इसका निर्माण सन 1887 में हुआ था। मुगल और उत्तर-मुगलकालीन वास्तुकला की यह इमारत कभी अपनी भव्यता के लिए जानी जाती थी। समय के साथ यह हवेली बदहाली का शिकार हो गई थी।
दिल्ली नगर निगम ने इसे जर्जर और खतरनाक इमारत घोषित कर दिया था। इमारत के निचले हिस्सों में सीलन भर गई थी। कमरे छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दिए गए थे। दीवारें दरक चुकी थीं और नक्काशीदार खंभों पर सिंथेटिक पेंट की मोटी परतें चढ़ी हुई थीं। तारों और पाइपों के मकड़जाल ने इमारत की असली सुंदरता को पूरी तरह से ढक दिया था।
इस ऐतिहासिक विरासत को नया जीवन देने का काम पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल और सिद्धांत गोयल ने शुरू किया। हवेली की बहाली का यह काम बेहद चुनौतीपूर्ण था। दिल्ली में हवेलियों के संरक्षण का इससे पहले कोई ठोस उदाहरण मौजूद नहीं था।

लगभग 50 कुशल कारीगरों और मजदूरों ने 6 साल तक लगातार काम किया। संरक्षण कार्य के दौरान अंतरराष्ट्रीय मानकों का कड़ाई से पालन किया गया। ऐतिहासिक ढांचे में कम से कम बदलाव किए गए। पुराने पत्थरों और चूने की पारंपरिक सामग्री का इस्तेमाल करके नक्काशी को दोबारा उभारा गया।
आज हवेली धर्मपुरा अपने पुराने शाही वैभव में लौट आई है। इस हवेली में लकड़ी की बारीक नक्काशी वाली छतें और पुराने झरोखे बने हैं। पत्थर पर तराशी गई मूर्तियां और संगमरमर का आंगन इसकी खूबसूरती को बढ़ाते हैं।
इसी ऐतिहासिक संरक्षण कार्य के लिए हवेली धर्मपुरा को यूनेस्को एशिया-पैसिफिक अवार्ड से सम्मानित किया गया था। वर्तमान में यह इमारत एक प्रीमियम हेरिटेज होटल और रेस्टोरेंट के रूप में काम कर रही है। यह शाहजहानाबाद की अन्य जर्जर हवेलियों के संरक्षण के लिए एक मिसाल बन चुकी है।
15 अगस्त पर पुरानी दिल्ली में पतंग उड़ाने की परंपरा का ऐतिहासिक महत्व भी है। यह केवल एक खेल या मनोरंजन का माध्यम नहीं है। सन 1928 में जब साइमन कमीशन भारत आया था, तब स्वतंत्रता सेनानियों ने साइमन गो बैक लिखे पतंग उड़ाकर अपना विरोध दर्ज कराया था।
तब से ही पतंग उड़ाना भारतीय स्वाधीनता संग्राम और आजादी के जश्न का एक अभिन्न हिस्सा बन गया। पुरानी दिल्ली के लोग इस दिन को एक बड़े त्योहार की तरह मनाते हैं। हर घर की छत पर लाउडस्पीकर बजते हैं और पूरा परिवार एक साथ एकत्र होता है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पुरानी दिल्ली के तंग रास्तों में गाड़ियों की आवाजाही बंद रहती है। सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम रहते हैं। इस आयोजन में शामिल होने के लिए आने वाले लोगों को दिल्ली मेट्रो का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। हेरिटेज हवेली पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन जामा मस्जिद और चांदनी चौक हैं। मेट्रो स्टेशन से रिक्शा लेकर या पैदल गलियों का आनंद लेते हुए हवेली धर्मपुरा तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।
हवेली धर्मपुरा की छत से मिलने वाला 360-डिग्री व्यू इस अनुभव को और ज्यादा खास बनाता है। एक तरफ लाल किले की प्राचीर दिखाई देती है तो दूसरी तरफ जामा मस्जिद के गुंबद नजर आते हैं।
खुले आसमान में तैरती हजारों पतंगें और ढलती शाम की रोशनी फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए एक बेहतरीन अवसर प्रदान करती है। यह आयोजन उन लोगों के लिए सबसे उपयुक्त है जो भीड़भाड़ वाली सड़कों से दूर एक सुरक्षित और शांत माहौल में दिल्ली के पारंपरिक उत्सव का हिस्सा बनना चाहते हैं।
इस इवेंट के लिए बुकिंग प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। छत पर क्षमता सीमित होने के कारण केवल निश्चित संख्या में ही प्रवेश दिया जा रहा है। यदि आप भी इस स्वतंत्रता दिवस वीकेंड पर पुरानी दिल्ली के आसमान में पतंगबाजी का रोमांच और पुरानी दिल्ली के पारंपरिक स्वादों का मज़ा लेना चाहते हैं, तो हवेली धर्मपुरा में अपना स्लॉट पहले से बुक कर सकते हैं।
यह आयोजन निश्चित तौर पर आपको पुरानी दिल्ली के उस दौर में ले जाएगा जब सादगी, तहजीब और सामूहिक उल्लास जीवन का मुख्य आधार हुआ करते थे।
From every doorstep to every heart, let the Tiranga fly high! 🇮🇳
— India in Hamburg (@IndiainHamburg) August 11, 2026
As India marks its 80th Independence Day, join the #HarGharTiranga campaign from 9–17 August 2026 and proudly hoist the National Flag.
📸 Capture your moment with the Tiranga and upload your selfie at… pic.twitter.com/67LEpQTwBC
हवेली धर्मपुरा कैसे पहुंचें?
1. मेट्रो द्वारा (सबसे आसान और उत्तम तरीका)
हवेली धर्मपुरा तक पहुंचने के लिए दिल्ली मेट्रो सबसे आरामदायक जरिया है। आपके पास दो प्रमुख मेट्रो विकल्प उपलब्ध हैं:

2. निजी वाहन या कैब द्वारा
यदि आप अपनी कार या ऑनलाइन कैब (जैसे Uber या Ola) से आ रहे हैं तो ध्यान रखें कि वाहन सीधे हवेली के दरवाजे तक नहीं जा सकता क्योंकि गलियां संकरी हैं।
स्वतंत्रता दिवस पतंगबाजी इवेंट की बुकिंग कैसे करें?
हवेली धर्मपुरा में 14 से 16 अगस्त तक आयोजित होने वाले स्वतंत्रता दिवस पतंग उत्सव के लिए सीटें सीमित रखी जाती हैं। आप निम्नलिखित तरीकों से अपनी बुकिंग कर सकते हैं:
1.आधिकारिक वेबसाइट या इवेंट टिकटिंग प्लेटफॉर्म पर जाएं:
आप ऑनलाइन टिकटिंग प्लेटफॉर्म (जैसे BookMyShow या Paytm Insider) पर जाएं और खोज बार में "Kite Flying at Haveli Dharampura" खोजें। इसके अलावा आप हवेली धर्मपुरा की आधिकारिक वेबसाइट havelidharampura.com पर भी जा सकते हैं।
2.दिनांक और समय (स्लॉट) चुनें:
14, 15 या 16 अगस्त में से अपनी पसंद की तारीख चुनें। इवेंट का मुख्य समय शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक का है। अपनी सुविधा अनुसार उपलब्ध स्लॉट का चयन करें।
3.टिकट की संख्या और विवरण दर्ज करें:
प्रति व्यक्ति टिकट का मूल्य ₹2500 है (5 वर्ष और उससे अधिक आयु के लिए टिकट अनिवार्य है)। अपनी आवश्यकतानुसार सदस्यों की संख्या दर्ज करें।
4.ऑनलाइन भुगतान पूरा करें और ई-पास प्राप्त करें:
क्रेडिट/डेबिट कार्ड, UPI या नेट बैंकिंग के माध्यम से भुगतान प्रक्रिया पूरी करें। भुगतान सफल होने पर आपको ईमेल और व्हाट्सएप पर ई-टिकट/क्यूआर कोड प्राप्त होगा, जिसे प्रवेश द्वार पर दिखाना होगा।
5.फोन या डायरेक्ट कॉल के माध्यम से बुकिंग (वैकल्पिक):
यदि आप ऑनलाइन बुकिंग में कठिनाई महसूस करते हैं, तो आप हवेली धर्मपुरा के आधिकारिक संपर्क नंबरों पर सीधे कॉल करके या [email protected] पर ईमेल भेजकर भी अपनी टेबल/स्लॉट बुक करा सकते हैं।

यात्रा के लिए जरूरी सुझाव
1. साइमन कमीशन का विरोध (1928) – स्वतंत्रता से जुड़ा पहला अध्याय
स्वतंत्रता दिवस पर पतंगबाजी की नींव वर्ष 1928 में पड़ी थी। जब ब्रिटिश सरकार ने भारत के राजनीतिक सुधारों की समीक्षा के लिए 'साइमन कमीशन' का गठन किया, तो उसमें किसी भी भारतीय को शामिल नहीं किया गया। इसके विरोध में पूरे देश में रोष फैल गया।
2. 15 अगस्त 1947: आजादी का उल्लास और आसमान का रंग
15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ और प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले पर तिरंगा फहराया, तब पुरानी दिल्ली के लोगों ने अपनी खुशी का इजहार करने के लिए छतों का रुख किया।
3. मुगलकालीन परंपराओं से जुड़ाव
15 अगस्त से पहले भी पुरानी दिल्ली में पतंगबाजी का शौक मौजूद था। मुगल काल में शाहजहां के समय से ही पतंग उड़ाना बादशाहों और आम जनता का पसंदीदा खेल हुआ करता था। वसंत पंचमी और रक्षाबंधन के मौके पर भी पतंगें उड़ाई जाती थीं। 1947 के बाद इस सांस्कृतिक खेल को स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय पर्व के साथ स्थायी रूप से जोड़ दिया गया।

4. पुरानी दिल्ली की 'छत संस्कृति' और पेंच लड़ाना
पुरानी दिल्ली की बनावट ऐसी है कि यहां घर एक-दूसरे से सटे हुए हैं। स्वतंत्रता दिवस के दिन यह 'छत संस्कृति' (Roof Culture) अपने चरम पर होती है:
निष्कर्ष
आज के समय में जब डिजिटल तकनीक और स्क्रीन ने पारंपरिक खेलों की जगह ले ली है, तब भी 15 अगस्त को पुरानी दिल्ली का आसमान हजारों रंग-बिरंगी पतंगों से सराबोर दिखाई देता है। यह परंपरा पुरानी दिल्ली वासियों के लिए अपनी ऐतिहासिक जड़ों, आजादी के संघर्ष और अपनी अनूठी संस्कृति को जीवित रखने का एक तरीका है।