सीपीआरआई ने हिमाचल के आलू उत्पादकों को ‘लेट ब्लाइट’ के खतरे को लेकर किया सतर्क

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 14-07-2026
CPRI alerts Himachal potato growers about the threat of late blight
CPRI alerts Himachal potato growers about the threat of late blight

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
 केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) के शिमला प्रभाग ने हिमाचल प्रदेश के आलू उत्पादकों को ‘लेट ब्लाइट’ के संभावित प्रकोप को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।
 
‘लेट ब्लाइट’ आलू और टमाटर की फसलों में ‘फाइटोफ्थोरा इन्फेस्टन्स’ नामक कवक (फंगस) के कारण फैलता है। यह ठंडे, नम और बारिश वाले मौसम में तेजी से फैलता है और पूरी फसल को कुछ ही दिनों में नष्ट कर सकता है।
 
संस्थान के ‘इंडो-ब्लाइटकास्ट’ पूर्वानुमान मॉडल के अनुसार, मौजूदा मौसमी परिस्थितियों में यह फैल सकता है और आने वाले दिनों में इसके प्रकोप का खतरा बढ़ सकता है।
 
सीपीआरआई के पादप संरक्षण प्रभाग के प्रमुख संजीव शर्मा ने सोमवार को किसानों से समय रहते एहतियाती उपाय अपनाने का आग्रह किया।
 
उन्होंने सलाह दी कि जिन खेतों में अभी तक ‘लेट ब्लाइट’ के लक्षण दिखाई नहीं दिए हैं और फफूंदनाशी का छिड़काव नहीं किया गया है, वहां संवेदनशील आलू की किस्मों पर ‘मैनकोजेब’ या ‘क्लोरोथालोनिल’ युक्त फफूंदनाशी का छिड़काव करें।
 
उन्होंने बताया कि इसकी अनुशंसित मात्रा 0.2-0.25 प्रतिशत है, यानी प्रति हेक्टेयर 1,000 लीटर पानी में 2.0-2.5 किलोग्राम रसायन घोलकर उसका छिड़काव किया जाए।
 
विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य तौर पर फफूंदनाशी का छिड़काव 10 दिन के अंतराल पर दोहराया जा सकता है। हालांकि, इसकी गंभीरता के आधार पर इस अंतराल में बदलाव किया जा सकता है।