नौकरी के बदले जमीन केस में फिर सुनी जाएंगी दलीलें

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 30-09-2026
Court to hear arguments afresh on charges in land for Job PMLA case against Lalu, others
Court to hear arguments afresh on charges in land for Job PMLA case against Lalu, others

 

नई दिल्ली
 
राउज़ एवेन्यू कोर्ट पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती, तेजस्वी यादव, हेमा यादव, तेज प्रताप यादव और कई अन्य लोगों से जुड़े कथित 'ज़मीन के बदले नौकरी' वाले मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने पर नए सिरे से दलीलें सुनेगी। अब इस मामले की सुनवाई स्पेशल जज प्रशांत कुमार करेंगे और आरोप तय करने पर दलीलें 14 और 15 अक्टूबर को सुनी जाएंगी। यह नई सुनवाई इसलिए ज़रूरी हो गई क्योंकि इस मामले में आदेश सुरक्षित रखने वाले पूर्व स्पेशल जज विशाल गोगने का तबादला दिल्ली हाई कोर्ट में हो गया था। 
 
दिल्ली हाई कोर्ट की मौजूदा रजिस्ट्रार सूची के अनुसार, डॉ. विशाल गोगने 22 सितंबर, 2026 से रजिस्ट्रार के तौर पर काम करेंगे। राउज़ एवेन्यू कोर्ट में चल रहा मनी लॉन्ड्रिंग का यह मामला CBI के 'ज़मीन के बदले नौकरी' वाले केस से जुड़ा है। इसमें आरोप है कि 2004-2009 के दौरान, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे, तब रेलवे में ग्रुप D पदों पर नौकरी देने के बदले लालू प्रसाद यादव के परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़ी कंपनियों को ज़मीन ट्रांसफर की गई थी। आरोपी इन आरोपों का खंडन कर रहे हैं।
 
एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) ने शुरू में अपनी प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (अभियोजन शिकायत) में बिज़नेसमैन अमित कात्याल, राबड़ी देवी, मीसा भारती, हेमा यादव और अन्य को आरोपी बनाया था। बाद में एजेंसी ने सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट में लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और अन्य के नाम शामिल किए। ED ने जनवरी 2024 में अमित कात्याल, राबड़ी देवी, मीसा भारती, हेमा यादव और अन्य के खिलाफ इस मामले में अपनी पहली प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की थी। एजेंसी ने कात्याल को लालू प्रसाद यादव का सहयोगी बताया था। बाद में ED ने 6 अगस्त, 2024 को एक सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की, जिसमें लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और अन्य के नाम शामिल थे। कोर्ट ने 18 सितंबर, 2024 को सप्लीमेंट्री कंप्लेंट का संज्ञान लिया और आरोपियों को नोटिस जारी किए। ED की सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट में तेज प्रताप यादव का नाम आरोपी के तौर पर शामिल नहीं था, लेकिन कोर्ट को उन्हें और दूसरे आरोपियों को समन भेजने के लिए पर्याप्त सबूत मिले थे।
 
14 मार्च 2026 को, ED ने तत्कालीन स्पेशल जज विशाल गोगने के सामने आरोप तय करने पर अपनी दलीलें पूरी की थीं। एजेंसी ने तर्क दिया कि लालू प्रसाद यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत थे और आरोप लगाया कि अपराध से हुई कमाई का इस्तेमाल उन्होंने किया था। ED ने आरोप लगाया है कि A K Infosystems को 2006-07 में अमित कात्याल के प्रमोटरों में से एक होने के साथ शुरू किया गया था और कंपनी ने कोई खास बिज़नेस एक्टिविटी करने के बजाय कई ज़मीन के टुकड़े खरीदे थे। एजेंसी के अनुसार, एक प्रॉपर्टी कथित ज़मीन-के-बदले-नौकरी मामले से जुड़ी थी और बाद में 2014 में कंपनी राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को 1 लाख रुपये में ट्रांसफर कर दी गई थी।
 
एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि 1996 में बनी कंपनी A B Exports Pvt Ltd का इस्तेमाल न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में एक प्रॉपर्टी खरीदने के लिए किया गया था। ED के अनुसार, 2007 में पांच कंपनियों के ज़रिए 5 करोड़ रुपये का फंड भेजा गया और बाद में प्रॉपर्टी खरीदी गई। ED ने पहले मार्च 2024 में अपनी जांच के सिलसिले में दिल्ली-NCR, पटना, मुंबई और रांची में 24 जगहों पर तलाशी ली थी। एजेंसी के अनुसार, तलाशी में बिना हिसाब-किताब वाला कैश, विदेशी मुद्रा, सोने की ईंटें, सोने के गहने और प्रॉपर्टी व सेल डीड से जुड़े दस्तावेज़ मिले थे। एजेंसी ने जांच के दायरे में अपराध से हुई कमाई का अनुमान लगभग 600 करोड़ रुपये लगाया था, जिसमें अचल संपत्तियां और कथित तौर पर बेनामीदारों के ज़रिए किए गए ट्रांज़ैक्शन शामिल थे।
 
ED ने आगे आरोप लगाया है कि पटना और अन्य इलाकों में ज़मीन के कई टुकड़े लालू प्रसाद यादव के परिवार के सदस्यों ने रेलवे में नौकरी के बदले हासिल किए थे। एजेंसी का आरोप है कि 7.5 लाख रुपये में खरीदी गई ज़मीन के चार टुकड़ों को बाद में राबड़ी देवी ने RJD के पूर्व विधायक सैयद अबू दोजाना को 3.5 करोड़ रुपये में बेच दिया था। एजेंसी का यह भी दावा है कि इस रकम का एक बड़ा हिस्सा बाद में तेजस्वी यादव के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया।
 
ED की यह शिकायत CBI की उस FIR के आधार पर दायर की गई है, जो 2004 से 2009 के बीच भारतीय रेलवे में ग्रुप-D के सब्स्टिट्यूट कर्मचारियों की नियुक्ति में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ी है। एजेंसी ने कहा है कि उसकी PMLA जांच, मुख्य अपराध (प्रेडिकेट ऑफेंस) से हुई कथित कमाई पर आधारित है। आरोपियों ने इन आरोपों से इनकार किया है। अब यह मामला स्पेशल जज प्रशांत कुमार के सामने चलेगा, जो 14 और 15 अक्टूबर को आरोप तय करने (फ्रेमिंग ऑफ चार्जेज) पर नए सिरे से दलीलें सुनेंगे।