डाक्टर फिरोज़ खान | देवबंद
उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक कस्बेदेवबंद में शिक्षा की एक शानदार परंपरा देखने को मिली। पब्लिक गर्ल्स इंटर कॉलेज और पब्लिक नर्सरी एंड जूनियर हाई स्कूल में एक खास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मौका था संस्थान की वार्षिक मैगजीन इल्म की रोशनी के विमोचन का। शेख उल हिंद हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रमुख शिक्षाविदों, पत्रकारों और गणमान्य लोगों ने शिरकत की।
इस अवसर पर वक्ताओं ने बेटियों की शिक्षा और उनके बौद्धिक विकास पर अपने विचार रखे। साथ ही संस्थान के संस्थापक स्वर्गीय मौलाना हसीब सिद्दीकी की दूरदर्शी सोच को याद किया गया। उन्होंने साल 1971 में उस दौर में इस संस्थान की नींव रखी थी जब दीवबंद में बच्चियों के लिए सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का कोई बेहतर विकल्प मौजूद नहीं था।
50 सालों से जल रही है बालिका शिक्षा की अलख
देवबंदका यह शैक्षणिक संस्थान आधी सदी से भी अधिक समय से इलाके में शिक्षा का उजाला फैला रहा है। 1971 में जब समाज में लड़कियों को स्कूल भेजने को लेकर तमाम झिझक थी, तब मौलाना हसीब सिद्दीकी ने एक साहसिक कदम उठाया था। उन्होंने बेहद सीमित संसाधनों में बालिकाओं के लिए इस स्कूल की शुरुआत की।
आज वही छोटा सा पौधा एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है। यहाँ से पढ़कर निकली छात्राएं देश के अलग-अलग हिस्सों में अपना नाम रोशन कर रही हैं। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों ने मौलाना साहब के इस योगदान को सलाम किया। वक्ताओं ने कहा कि मौलाना हसीब सिद्दीकी एक दूरदर्शी और व्यावहारिक इंसान थे। वे कभी भी जल्दबाजी में निर्णय नहीं लेते थे। उनका हर कदम समाज के हित में होता था।
पुस्तकें और पत्रिकाएं खोलती हैं ज्ञान के नए द्वार
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद जामिया मिलिया इस्लामिया की वरिष्ठ शिक्षिका और प्रसिद्ध लेखिका डॉ. रक्षंदारूही मेहदी ने छात्राओं का मार्गदर्शन किया। उन्होंने अपने भावुक संबोधन में बताया कि उनकी शुरुआती शिक्षा भी इसी संस्थान से हुई थी। आज इस स्कूल को इस मुकाम पर देखकर उन्हें बेहद खुशी हो रही है।
डॉ. रक्षंदाने कहा कि किताबें और पत्रिकाएं हमारे सोचने का दायरा बढ़ाती हैं। ये हमारे लिए ज्ञान की नई दुनिया के दरवाजे खोलती हैं। विद्यार्थियों को केवल अपनी स्कूली किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें साहित्य पढ़ने की आदत डालनी चाहिए। अपने विचारों को शब्दों में ढालना सीखना चाहिए। उन्होंने स्कूल की मैगजीन की तारीफ करते हुए कहा कि इसमें छात्राओं के लिखे लेख उनके मौलिक चिंतन को दर्शाते हैं।
शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों का विकास भी है जरूरी
वरिष्ठ पत्रकार शिवमणि त्यागी ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी स्कूल की असली पहचान सिर्फ परीक्षा के नतीजों से नहीं होती। असली पहचान इस बात से होती है कि वहाँ से निकलने वाले बच्चों के संस्कार और सोच कैसी है। बच्चे समाज के प्रति कितने संवेदनशील हैं, यह बात सबसे ज्यादा मायने रखती है। 'इल्म की रोशनी' जैसी पत्रिकाएं बच्चों के अंदर इसी सामाजिक जिम्मेदारी और रचनात्मकता को जगाने का काम करती हैं।
वरिष्ठ पत्रकार अशोक गुप्ता ने भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ साहित्यिक गतिविधियां बहुत जरूरी हैं। इससे बच्चों की झिझक दूर होती है। वे अपनी बात खुलकर सामने रख पाते हैं।
मुस्लिम फंड दीवबंद के मैनेजर सुहेल सिद्दीकी और ईदगाह वक्फ कमेटी के सचिव मोहम्मद अनस सिद्दीकी ने कहा कि यह संस्थान छात्राओं को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़े रखने का काम कर रहा है।
छात्राओं की प्रस्तुति ने मोहा सभी का मन
कार्यक्रम की शुरुआत छात्रा नबीला और नबिया की तिलावते कलामे पाक से हुई। इसके बाद छात्राओं ने सुरीली आवाज में नअत पेश की। छात्राओं ने कॉलेज का तराना और राष्ट्रगीत भी सुनाया, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
कॉलेज की कार्यवाहक प्रिंसिपल सबा हसीब सिद्दीकी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने एक सुंदर कविता पाठ के माध्यम से अपने पिता और संस्थान के संस्थापक मौलाना हसीब सिद्दीकी के सपनों को याद किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता का सपना था कि इस इलाके की हर बेटी शिक्षित और आत्मनिर्भर बने। स्कूल प्रबंधन उसी सपने को पूरा करने में जुटा है।
कार्यक्रम का संचालन स्कूल की शिक्षिका ज़ीबा जाहिद ने बहुत ही व्यवस्थित ढंग से किया। सभा की अध्यक्षता स्वर्गीय मौलाना हसीब सिद्दीकी के भाई मोहम्मद अयाज सिद्दीकी ने की। अपने अध्यक्षीय भाषण में उन्होंने कहा कि शिक्षा सिर्फ डिग्री हासिल करने का जरिया नहीं है। यह एक अच्छा इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनने की सीढ़ी है।
समाज के गणमान्य लोग और अभिभावक रहे मौजूद
इस विमोचन समारोह में क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक, शिक्षाविद और छात्राओं के माता-पिता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। नज़र फाउंडेशन के चेयरमैन नज़म उस्मानी, मास्टर शमीम कीरतपुरी, अदील सिद्दीकी, इस्माइल कुरैशी, फ़ैज़ी सिद्दीकी, ग़ज़ाली सिद्दीकी और हाजी फिरोज़ खान ने कार्यक्रम में भाग लिया।
इसके अलावा एजुकेशन इंचार्ज शबाना सफ़वान, शिक्षिका साजिदा फहीम, शाकरा, शबाना शाहीन, रुबीना, शहज़ादा हयात, हमीर चौधरी और मोहम्मद साजिद सहित पूरा स्टाफ मौजूद रहा।
समारोह के अंत में प्रिंसिपल सबा हसीब सिद्दीकी ने सभी अतिथियों, शिक्षकों और अभिभावकों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि सबके सहयोग से ही यह मैगजीन प्रकाशित हो सकी है। यह आयोजन दीवबंद में शिक्षा और भाईचारे के एक नए अध्याय की गवाही देता है।