Centre should approach court to quash all FIRs lodged during NEET protests: Aditya Thackeray
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता आदित्य ठाकरे ने बृहस्पतिवार को कहा कि केंद्र सरकार को नीट-यूजी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक को लेकर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान दर्ज सभी प्राथमिकी को रद्द कराने के लिए उच्चतम न्यायालय जाना चाहिए।
ठाकरे का यह बयान उच्चतम न्यायालय के उस स्पष्टीकरण के कुछ दिनों बाद आया है जिसमें कहा गया है कि अदालत का पिछला आदेश राज्य सरकारों को कानून के अनुसार छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी से जुड़ी कार्यवाही बंद करने या वापस लेने के लिए कदम उठाने से नहीं रोकता है।
शीर्ष अदालत ने तीन अगस्त के आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि छात्र प्रदर्शनकारियों की रिहाई पर अपने पिछले आदेश में अदालत ने ‘‘आपराधिक पृष्ठभूमि’’ शब्द का इस्तेमाल किया जिनका आशय केवल उन लोगों से है जो गंभीर और जघन्य अपराधों में शामिल रहे हैं।
ठाकरे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि आरोपपत्र दाखिल करने के बाद मामला वापस लेने संबंधी महाराष्ट्र सरकार की अधिसूचना पूरी तरह से समय, ऊर्जा और संसाधनों की बर्बादी है।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर अन्य राज्यों ने ऐसा किया है तो महाराष्ट्र क्यों नहीं कर सकता? असल में, केंद्र सरकार को अनुच्छेद 142 के तहत उच्चतम न्यायालय जाना चाहिए और सभी प्राथमिकी रद्द करवानी चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘राज्य सरकार के इस लुका-छिपी के खेल के बावजूद, हम उन सभी लोगों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर कायम हैं जिन्होंने हमें ईमेल भेजे हैं। हम उन सभी की बैठक बुलाकर उन्हें पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी देंगे। अधिवक्ता सागर देवरे इस पर काम कर रहे हैं।’’
ठाकरे ने कहा कि यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या महाराष्ट्र सरकार प्राथमिकी वापस लेने के केंद्र के वादे का पालन करती है या नहीं।
शिवसेना (उबाठा) नेता ने कहा कि उनकी पार्टी इस मामले पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संपर्क में है।
उन्होंने कहा कि पार्टी ‘कॉजपा’ की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह और ‘कॉजपा’ के सह-संयोजक सौरव दास के भी संपर्क में है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह समन्वय गृह मंत्रालय द्वारा ‘कॉजपा’ को किए गए वादों के अनुरूप हो।