चासोटी बादल फटने की घटना के एक साल बाद एसएसबी जवान ने याद की परिवार के साथ आखिरी वीडियो कॉल

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 13-08-2026
A year after the Chasoti cloudburst, SSB jawan recalls his last video call with his family
A year after the Chasoti cloudburst, SSB jawan recalls his last video call with his family

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में मचैल माता मंदिर की तलहटी में स्थित चसोती में हुई बादल फटने की भयानक घटना और अचानक आई बाढ़ के एक साल बाद भी, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के मुख्य आरक्षक हुसन दास को अपने करीबी रिश्तेदारों—पत्नी, दो बच्चों, मां, बहन, दो भतीजों और भाभी—को खोने का ऐसा नुकसान हुआ है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती।

दास (38) के लिए, यह त्रासदी सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि कुछ ही घंटों में बर्बाद हुई जिंदगी को फिर से खड़ा करने का रोज का संघर्ष है। जम्मू के आरएस पुरा सेक्टर के बेनागढ़ गांव में उनका घर अब वीरान और ज्यादातर समय बंद रहता है – जो उस परिवार की दर्दनाक याद दिलाता है जिसे उन्होंने खो दिया।
 
घटना के समय बिहार में तैनात दास ने आखिरी बार अपने बच्चों को 14 अगस्त 2005 को वीडियो कॉल पर देखा था, जब परिवार मचैल माता के मंदिर में दर्शन करके लौट रहा था। उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि वह छोटी सी वीडियो कॉल ही उनके बच्चों की आखिरी झलक साबित होगी।
 
दास ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “उस मनहूस दिन की सुबह मेरी अपने बच्चों से वीडियो कॉल पर बात हुई थी। वे तीर्थ-स्थल पर मत्था टेककर लौट रहे थे।” दास जब यह बात कह रहे थे आवाज और आंखों से साफ जाहिर था कि वह आंसुओं को रोकने की कोशिश कर रहे हैं जो उस मजबूती को दर्शाता था जो बरसों के कड़े प्रशिक्षण से आती है।
 
कुछ घंटों बाद, दोपहर करीब 12.25 बजे, मचैल माता मंदिर के रास्ते पर पड़ने वाले मोटर से जाने योग्य आखिरी गांव ‘चसोटी’ में बादल फटने से अचानक बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति पैदा हो गई।
 
पानी का तेज बहाव अचानक बस्ती में घुस आया और उसने एक अस्थायी बाजार, तीर्थयात्रियों के लिए लंगर और एक सुरक्षा चौकी को नष्ट कर दिया, जिससे चारों ओर मौत और तबाही का मंजर पसर गया।