आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
गर्मियों के दौरान यूरोप ने जलवायु परिवर्तन की भयावह तस्वीरों का एक नया रूप देखा। जंगलों और घास के मैदानों में तेजी से फैलती जंगल की आग, सूखे के कारण सूखती नदियां और जलाशय तथा भीषण गर्मी से प्रभावित जनजीवन ने संकट की गंभीरता को सामने रखा।
अब गर्मी की खबरों के साथ समुद्र तटों पर छुट्टियां मनाते लोगों की सामान्य तस्वीरों की जगह उनके विनाशकारी प्रभावों को दिखाने वाली तस्वीरें ज्यादा दिखाई देने लगी हैं।
इसके अलावा सूखा, जल संरक्षण और खाद्य सुरक्षा जैसी समस्याएं अब केवल दूर-दराज के देशों तक सीमित नहीं रह गई हैं। इनके असर यूरोप और ब्रिटेन में लोगों के अपने घरों के आसपास भी साफ दिखाई देने लगे हैं। इन हालातों में जान-माल का नुकसान भी हुआ है।
जलवायु परिवर्तन से जुड़ी तस्वीरें लोगों की सोच और उनके व्यवहार को प्रभावित करती हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि ब्रिटेन और यूरोप में जलवायु संकट को तस्वीरों के माध्यम से किस तरह दिखाया जा रहा है और इनका दर्शकों पर क्या असर पड़ रहा है।