Amit Shah stresses on cultural nationalism, promotion of Indian languages at Rajbhasha programme
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का मतलब भारत की संस्कृति और इतिहास के बारे में जागरूकता पैदा करना है।
शाह ने इस बात पर जोर दिया कि देश की अलग-अलग भाषाओं का स्वर भले ही अलग हो लेकिन राष्ट्रीय भावना एक ही होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए सभी राजनीतिक मतभेदों को भुला देना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कोई बच्चा देश को अपनी मातृभाषा के जरिए ही बेहतर ढंग से समझ सकता है।
शाह ने भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के काम को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस संकल्प से जोड़ा, जिसमें उन्होंने देश को ‘‘गुलामी की मानसिकता’’ से मुक्त करने की बात कही थी।
नवी मुंबई में आयोजित छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि बाल गंगाधर तिलक ने समझ लिया था कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के माध्यम से देश की संस्कृति और इतिहास के बारे में जागरूकता पैदा की जा सकती है।