आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के एक दूरस्थ गांव में सुरक्षा शिविर को परिवर्तित करके बनाए गए पहले जनसेवा केंद्र का उद्घाटन किया। दशकों तक जारी उग्रवाद के बाद हाल ही में नक्सली हिंसा से मुक्त घोषित किए गए छत्तीसगढ़ में यह उद्घाटन विकास के एक नए अध्याय की शुरुआत है।
मंत्री ने कहा कि राज्य में पूर्व में वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित कुल 196 सुरक्षा बल शिविरों में से 70 को अगले डेढ़ वर्षों में ‘सेवा शिविरों’ (जनसेवा केंद्रों) में परिवर्तित किया जाएगा।
अधिकारियों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि यह कार्यक्रम ‘बस्तर 2.0 रूपरेखा’ की शुरुआत का प्रतीक है, जिसके तहत सुरक्षा शिविरों को जन कल्याणकारी कार्यों के लिए पुनर्परिभाषित किया जाएगा। यह केंद्र और राज्य सरकार की एक आवश्यक कार्य योजना है, जिसका उद्देश्य विकास की कमी के कारण इन क्षेत्रों में माओवाद की पुनरावृत्ति को रोकना है।
शाह मध्य भारत के इस राज्य के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। मार्च में केंद्र सरकार द्वारा देश से वामपंथी उग्रवाद के अंत की घोषणा के बाद यह उनका पहला दौरा है।
वह रविवार रात को राज्य की राजधानी रायपुर पहुंचे, जो यहां से 300 किलोमीटर से अधिक दूर है।
मंत्री ने नेतानार गांव में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 80वीं बटालियन के ‘ब्रावो’ कंपनी परिसर में स्थित ‘जन सुविधा केंद्र’ का उद्घाटन किया।
सीआरपीएफ ने 2013 में इस शिविर को एक अभियानगत बेस के रूप में स्थापित किया था और अब उसने इस शिविर का एक हिस्सा सेवा केंद्र के निर्माण के लिए साझा किया है।
शाह ने कहा, ‘‘आज इस क्षेत्र के शहीद वीर गुंडाधुर के नाम पर इस शिविर का उद्घाटन एक क्रांतिकारी घटना है। एक समय यहां छह पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई थी और नक्सलियों ने अस्पतालों और स्कूलों को नष्ट कर दिया था।’’