मप्र: जलती बस में देवदूत बने मुस्लिम युवक, बचाई कई जानें

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 18-05-2026
MP: Muslim Youths Turn Angels in Burning Bus, Save Several Lives
MP: Muslim Youths Turn Angels in Burning Bus, Save Several Lives

 

मंसूरूद्दीन फरीदी/नई दिल्ली

मध्य प्रदेश के शाजापुर से मानवता को गौरवान्वित करने वाली एक बेहद भावुक और साहसिक कहानी सामने आई है। यहाँ राष्ट्रीय राजमार्ग 52पर देर रात एक ऐसा भयानक हादसा हुआ जिसने हर किसी का दिल दहला दिया। इंदौर से ग्वालियर जा रही इंटरसिटी ट्रेवल्स की एक एसी स्लीपर वोल्वो बस में अचानक भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में एक चार साल का मासूम बच्चा असमय ही मौत के मुंह में समा गया। लेकिन इसी काली रात में इंसानियत का एक ऐसा उजला चेहरा भी सामने आया जिसने साबित कर दिया कि दुनिया में आज भी परोपकार से बड़ा कोई धर्म नहीं है।

जब बस धू-धू कर जल रही थी और लोग अपनी आखिरी सांसें गिन रहे थे, तब छह मुस्लिम युवकों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए आग की लपटों के बीच छलांग लगा दी। इन जांबाज युवाओं ने जलती हुई बस से तैरह यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

यह खौफनाक वाकया शाजापुर और मुक्सी के बीच गोलवा के पास हुआ। यहाँ स्थित होटल जैनपत के सामने यह वोल्वो बस नाश्ते के लिए रुकी थी। तभी अचानक बस के अगले हिस्से में इंजन के पास से धुआं उठने लगा। शुरुआती जांच में इस आग का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है।

देखते ही देखते बस आग का गोला बन गई। इस हादसे ने एक बार फिर हमारी यात्री बसों में सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलकर रख दी है। लेकिन इस भयावह आपदा के बीच तराना के रहने वाले छह दोस्तों ने जो अद्भुत साहस दिखाया, वह मिसाल बन गया है।

जन्मदिन का जश्न और किस्मत का फैसला

रिजवान मंसूरी, तोहिद, अयान, राजा, सोहेल और अर्शन नाम के यह छह दोस्त उस रात होटल में अपने एक साथी का जन्मदिन मनाने के लिए इकट्ठा हुए थे। वे सब बैठकर खाना खा रहे थे और हंसी-मजाक का दौर चल रहा था। तभी अचानक प्रकृति ने उनके सामने जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा रख दी।

होटल के गार्ड ने सबसे पहले बस से उठती आग की लपटों को देखा था। उसने तुरंत शोर मचाया और चिल्लाते हुए होटल के अंदर भागा। वह बदहवास हालत में इन युवकों के पास पहुंचा और बोला कि बाहर खड़ी बस में भयानक आग लग गई है।

चौकीदार की बात सुनते ही इन छह दोस्तों ने एक पल की भी देरी नहीं की। वे अपना खाना और जश्न छोड़कर तुरंत बाहर की तरफ भागे। बाहर का नजारा बेहद डरावना था। आग की लपटें आसमान छू रही थीं। चारों तरफ काला धुआं फैला हुआ था। सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि उस पूरी वोल्वो बस में चढ़ने और उतरने के लिए आगे की तरफ केवल एक ही दरवाजा था।

आग ठीक उसी दरवाजे के पास लगी थी, जिसके कारण अंदर बैठे यात्रियों के बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह बंद हो चुका था। लोग बस के पिछले हिस्से में फंस गए थे और जान बचाने के लिए खिड़कियों को पीट रहे थे। चारों तरफ चीख-पुकार और तबाही का मंजर था।

मौत के मुंह में घुसकर बचाई मासूम जिंदगियां

जब आम लोग डर के मारे इधर-उधर भाग रहे थे, तब रिजवान मंसूरी और उनके साथियों ने मौत से खेलने का फैसला किया। रिजवान ने तुरंत स्थिति को समझा और भांप लिया कि यात्रियों को बचाने के लिए बस के पिछले हिस्से से ही रास्ता बनाना होगा। उन्होंने बिना सोचे पास में पड़ा एक भारी पत्थर उठाया और बस के पिछले हिस्से पर चढ़कर खिड़की के मोटे शीशे पर दे मारा। पत्थर लगते ही शीशा टूट गया। इसके बाद जो हुआ, वह किसी चमत्कार से कम नहीं था।

रिजवान मंसूरी खुद उस जलती हुई खिड़की के रास्ते बस के भीतर घुस गए। अंदर का नजारा नरक जैसा था। भयंकर गर्मी, जहरीला धुआं और प्लास्टिक के जलने की गंध से सांस लेना नामुमकिन हो रहा था। लपटें उनके चेहरों को छू रही थीं।

रिजवान ने अंदर से एक-एक करके फंसे हुए यात्रियों को उठाना शुरू किया और खिड़की के पास खड़े अपने दोस्तों तोहिद, अयान, राजा, सोहेल और अर्शन की तरफ बढ़ाना शुरू किया। बाहर खड़े दोस्तों ने मुस्तैदी से यात्रियों को थामा और नीचे उतारा। इस तरह इन युवाओं ने एक-एक करके करीब 12से 13यात्रियों को मौत के मुंह से खींचकर बाहर निकाल लिया। इस पूरे बचाव कार्य में रिजवान के हाथ भी काफी झुलस गए, लेकिन उन्होंने दर्द की परवाह नहीं की।

वो एक मलाल जो हमेशा सालता रहेगा

इन जांबाज युवाओं ने अपनी तरफ से पूरी ताकत झोंक दी थी। उन्होंने लगभग सभी यात्रियों को बाहर निकाल लिया था। लेकिन घटना के करीब इक्कीस मिनट बाद अचानक किसी यात्री ने रोते हुए चिल्लाया कि एक चार साल का बच्चा अभी भी अंदर ही छूटा हुआ है। यह सुनते ही रिजवान और उनके दोस्तों के रोंगटे खड़े हो गए। वे बिना सोचे दोबारा बस के अंदर जाने के लिए आगे बढ़े। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

आग इतनी विकराल हो चुकी थी कि बस का ढांचा पूरी तरह लपटों से घिर गया था। अब उसके भीतर पैर रखना भी साक्षात मौत को गले लगाने जैसा था। चाहकर भी वे उस मासूम बच्चे तक नहीं पहुंच सके। बाद में दमकल कर्मियों ने उस बच्चे के शव को बाहर निकाला।

यह एक ऐसा पल था जिसने इन बहादुर नौजवानों को झकझोर कर रख दिया। इतने सारे लोगों को बचाने की खुशी पर उस एक मासूम की मौत का गम भारी पड़ गया। रिजवान ने बाद में रुंधे गले से कहा कि ईश्वर का शुक्र है कि हम इतने लोगों की जान बचा पाए, लेकिन उस बच्चे को न बचा पाने का दर्द हमें जिंदगी भर रहेगा।

मानवता के असली नायकों को सलाम

इस घटना के बाद पूरे इलाके में इन छह मुस्लिम युवकों की बहादुरी की चर्चा हो रही है। घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों, होटल मालिक और खुद मौत के मुंह से बचकर आए यात्रियों ने इन युवाओं को गले से लगा लिया और उनका शुक्रिया अदा किया। लोगों का कहना है कि ये युवा किसी मजबूरी या ड्यूटी के कारण वहां नहीं कूदे थे, बल्कि उनके भीतर मौजूद इंसानियत और खुदा के प्रति आस्था ने उन्हें यह हौसला दिया था।

सूचना मिलते ही उज्जैन जिले के तराना पुलिस स्टेशन की टीम भी मौके पर पहुंच गई थी। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने भी इन युवाओं के जज्बे को सलाम किया है। स्थानीय नागरिकों और चश्मदीदों का कहना है कि सरकार को ऐसे साहसी युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करना चाहिए। उन्हें वीरता पुरस्कार दिया जाना चाहिए ताकि समाज में आज के दौर में भी अच्छाई, भाईचारे और बहादुरी की भावना को बढ़ावा मिल सके।

इस डिजिटल और भागदौड़ भरी दुनिया में जहाँ अक्सर लोग हादसों के समय वीडियो बनाने में मशगूल हो जाते हैं, वहाँ इन युवाओं ने अपनी जान दांव पर लगाकर मानवता की एक नई इबारत लिखी है। रिजवान, तोहिद, अयान, राजा, सोहेल और अर्शन ने यह साबित कर दिया है कि असली हीरो फिल्मों में नहीं होते, बल्कि वे हमारे बीच ही आम शक्लों में रहते हैं जो वक्त आने पर दूसरों की जिंदगी के लिए खुद को आग में झोंक देते हैं। इन युवाओं का यह निस्वार्थ कार्य समाज के लिए एक महान सीख है।