आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
दशकों से लोगों को बताया जाता रहा है कि वजन की समस्या का समाधान एक आसान गणितीय फार्मूले में छिपा है- जितनी कैलोरी लो और उतनी कम करो। अगर वजन घटाने का गणित वास्तव में इतना सरल होता, तो शायद अधिकतर लोग अपने मनचाहे वजन तक पहुंच चुके होते, लेकिन हकीकत इससे कहीं अधिक जटिल है।
वजन कम करना इतना मुश्किल क्यों होता है, इसे लेकर कई सिद्धांत मौजूद हैं। कुछ विशेषज्ञ इसके लिए आनुवंशिकी और उपापचय को जिम्मेदार मानते हैं, जबकि कुछ का कहना है कि पर्यावरण और सामाजिक परिस्थितियां अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सवाल यह है कि इनमें से कौन-सा सिद्धांत सही है? क्या किसी व्यक्ति का वजन उसकी आनुवंशिकी, उपापचय या माहौल पहले से तय कर देता है?
मैं मधुमेह और मोटापे के इलाज से जुड़ा चिकित्सक हूं। इन सिद्धांतों के बारे में क्या ज्ञात है और क्या अब भी अनिश्चित है, उसे समझने से आपको अपनी जैविक संरचना से पार पाकर वजन बदलने में मदद मिल सकती है।