छिपा हुआ तनाव उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त को नुकसान पहुंचा सकता है: अध्ययन

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 09-05-2026
Hidden stress may harm memory as we age: Study
Hidden stress may harm memory as we age: Study

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
एक नई स्टडी में सामने आया है कि अंदर ही अंदर तनाव और निराशा को दबाकर रखना उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त कमजोर होने का बड़ा कारण बन सकता है। खासतौर पर बुजुर्ग चीनी-अमेरिकियों पर किए गए इस शोध में पाया गया कि जो लोग अपने तनाव को व्यक्त करने के बजाय भीतर ही दबाए रखते हैं, उनमें स्मृति कमजोर होने का खतरा अधिक होता है।
 
यह अध्ययन Rutgers Health के शोधकर्ताओं ने किया, जिसे The Journal of Prevention of Alzheimer's Disease में प्रकाशित किया गया है। शोध में 60 वर्ष से अधिक उम्र के 1,500 से ज्यादा लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
 
वैज्ञानिकों के मुताबिक “मॉडल माइनॉरिटी” जैसी सामाजिक धारणाएं एशियाई समुदायों पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं। लोग सफल और मजबूत दिखने की कोशिश में अपनी मानसिक परेशानियों को छिपा लेते हैं। भाषा संबंधी कठिनाइयां, सांस्कृतिक बदलाव और अकेलापन भी तनाव बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं।
 
स्टडी की प्रमुख शोधकर्ता मिशेल चेन ने कहा कि निराशा और अंदरूनी तनाव अक्सर नजरअंदाज हो जाते हैं, लेकिन ये मस्तिष्क की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते तनाव कम करने पर ध्यान दिया जाए, तो बुजुर्गों की मानसिक सेहत को बेहतर बनाया जा सकता है।
 
शोध में यह भी पाया गया कि सामुदायिक सहयोग या बाहरी सहायता का याददाश्त पर उतना असर नहीं दिखा, जितना अंदर दबे तनाव का असर दिखाई दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और भावनाओं को खुलकर साझा करना भविष्य में अल्जाइमर जैसी बीमारियों के खतरे को कम करने में मददगार हो सकता है।