ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली
“मेहनत और अनुशासन वो चाबी हैं, जो हर बंद दरवाज़ा खोल देती हैं।” सीमित संसाधनों, कठिन परिस्थितियों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अगर इरादे मजबूत हों तो सफलता जरूर मिलती है। इसका जीवंत उदाहरण धनबाद की रहने वाली राशीदा नाज ने पेश किया है। झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) की 12वीं विज्ञान संकाय परीक्षा में डीएवी प्लस टू हाई स्कूल पाथरडीह की छात्रा राशीदा नाज ने 500 में 489 अंक प्राप्त कर पूरे झारखंड में टॉप किया है। उनकी इस ऐतिहासिक सफलता ने न केवल धनबाद जिले बल्कि पूरे राज्य को गौरवान्वित किया है।
रशीदा नाज की सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने किसी कोचिंग या ट्यूशन का सहारा नहीं लिया। सेल्फ स्टडी, अनुशासित दिनचर्या और यूट्यूब के माध्यम से पढ़ाई कर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। आज उनकी सफलता हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
साधारण परिवार की बेटी ने असाधारण सफलता से बढ़ाया मान
रशीदा नाज के पिता मो. रुस्तम अंसारी पश्चिम बंगाल के नियामतपुर स्थित चीनाकुड़ी में एक कंपनी में ठेका मजदूर के रूप में काम करते हैं। उनकी मां गुलअफ़्सा परवीन गृहिणी हैं। आर्थिक रूप से साधारण परिवार से आने वाली राशीदा ने कठिन परिस्थितियों के बीच अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर राज्य में पहला स्थान प्राप्त किया। उनके बड़े भाई मो. जुनैद अली बीसीए और बीए की पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि बड़ी बहन कनिज फातिमा बीएड कर शिक्षिका बनने की तैयारी में हैं। राशीदा अपनी बड़ी बहन को अपना आदर्श मानती हैं और भविष्य में खुद भी शिक्षिका बनकर समाज की सेवा करना चाहती हैं।
सात किलोमीटर टेंपो से तय करती थीं स्कूल का सफर
रशीदा पहले भूलन बरारी में रहती थीं, लेकिन वर्तमान में उनका परिवार जामाडोबा रमजानपुर स्थित सामुदायिक भवन के पास रहता है। वह प्रतिदिन करीब सात किलोमीटर टेंपो से सफर कर स्कूल जाती थीं। तमाम कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने कभी पढ़ाई से समझौता नहीं किया। उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बनाकर केवल पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया। उनका मानना है कि सफलता के लिए फोकस और अनुशासन सबसे जरूरी है।

सुबह 4 बजे से शुरू होती थी पढ़ाई
रशीदा की दिनचर्या बेहद अनुशासित रही। वह रोज सुबह चार बजे उठकर पढ़ाई शुरू करती थीं और प्रतिदिन 8 से 10 घंटे तक अध्ययन करती थीं। परीक्षा के दिनों में यह समय और बढ़ जाता था। ठंड के मौसम में कई बार वह रात एक बजे तक पढ़ाई करती थीं। उन्होंने हर विषय के लिए अलग लक्ष्य तय किया था और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का लगातार अभ्यास कर अपनी तैयारी को मजबूत बनाया। किसी भी समस्या के समाधान के लिए वह शिक्षकों से व्हाट्सएप के जरिए संपर्क करती थीं।
बिना कोचिंग हासिल की बड़ी सफलता
आज के दौर में जहां अधिकांश छात्र महंगी कोचिंग और ट्यूशन पर निर्भर रहते हैं, वहीं राशीदा ने केवल सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की मदद से राज्य टॉपर बनने का गौरव हासिल किया। उन्होंने यूट्यूब का उपयोग केवल पढ़ाई और कठिन विषयों को समझने के लिए किया। राशीदा ने अन्य छात्रों को संदेश देते हुए कहा कि अगर विद्यार्थी नवंबर-दिसंबर तक पूरा सिलेबस खत्म कर लें और उसके बाद नियमित अभ्यास करें, तो सफलता निश्चित रूप से मिल सकती है।
स्कूल और परिवार में खुशी का माहौल
रशीदा की इस उपलब्धि के बाद परिवार और विद्यालय में खुशी की लहर है। डीएवी प्लस टू हाई स्कूल पाथरडीह के प्रधानाचार्य अरविंद कुमार पांडेय सहित सभी शिक्षकों ने उन्हें बधाई दी और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। परिजनों का कहना है कि राशीदा बचपन से ही पढ़ाई को लेकर गंभीर थीं और हमेशा अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहती थीं।
रशीदा नाज ने विभिन्न विषयों में शानदार अंक हासिल किए हैं—
रशीदा नाज की सफलता यह साबित करती है कि आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती। मजबूत इच्छाशक्ति, निरंतर मेहनत और अनुशासन के बल पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। धनबाद की इस बेटी ने पूरे झारखंड को गौरवान्वित करते हुए यह संदेश दिया है कि सपने बड़े हों तो परिस्थितियां छोटी पड़ जाती हैं।