कश्मीर की वादियों में स्ट्रॉबेरी की मिठास: किसानों के लिए उम्मीदों की नई फसल

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 09-05-2026
The Sweetness of Strawberries in the Valleys of Kashmir: A New Crop of Hope for Farmers
The Sweetness of Strawberries in the Valleys of Kashmir: A New Crop of Hope for Farmers

 

श्रीनगर से फोटो और रिपोर्ट बासित जरगर

श्रीनगर की सुबह अभी धुंध की चादर में लिपटी ही थी कि सूरज की पहली किरण ने खेतों में चमकती लाल स्ट्रॉबेरी को छू लिया। कश्मीर की वादियों में इस बार स्ट्रॉबेरी की फसल ने समय से पहले दस्तक दे दी है। शहर के बाहरी इलाकों में फैले खेतों में चारों तरफ सुर्ख लाल रंग की चमक दिखाई दे रही है। यह न केवल स्वाद की मिठास है बल्कि उन किसानों के लिए एक बड़ी राहत भी है जो पिछले कई सालों से मौसम की अनिश्चितता की मार झेल रहे थे।
 
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मौसम का साथ और बेहतर पैदावार

पिछले एक दशक से स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे अब्दुल रशीद बताते हैं कि इस साल की पैदावार पिछले सीजन के मुकाबले काफी अच्छी है। रशीद के मुताबिक इस बार फूल आने के दौरान मौसम स्थिर रहा। स्ट्रॉबेरी की खेती में मौसम का मिजाज बहुत मायने रखता है। अगर तापमान में अचानक बदलाव न आए तो फल का आकार और स्वाद दोनों ही लाजवाब होते हैं। इस बार फल न केवल बड़े हैं बल्कि उनमें मिठास भी पहले से ज्यादा है।
 
कश्मीर घाटी में स्ट्रॉबेरी की खेती धीरे-धीरे काफी लोकप्रिय हो रही है। पारंपरिक फसलों के मुकाबले इसमें किसानों को पैसा जल्दी वापस मिल जाता है। स्ट्रॉबेरी की फसल कुछ ही महीनों में तैयार हो जाती है। कम समय में तैयार होने वाली यह फसल उन छोटे किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है जिनके पास जमीन कम है। वे अपनी आय बढ़ाने के लिए अब धान और सेब के साथ स्ट्रॉबेरी को भी अपना रहे हैं।
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चुनौतियों के बीच पसीना बहाते किसान

भले ही पैदावार अच्छी हुई है लेकिन किसानों की राह आसान नहीं है। खेतों में काम कर रही शबनम बानो कहती हैं कि बढ़ती परिवहन लागत हमारे लिए एक बड़ी मुसीबत है। स्ट्रॉबेरी एक बेहद नाजुक फल है। अगर इसे सही समय पर बाजार न पहुँचाया जाए तो यह खराब होने लगता है। घाटी के बाहर इस फल की भारी मांग है लेकिन कोल्ड स्टोरेज की कमी की वजह से किसान इसे दूर के बाजारों तक नहीं भेज पा रहे हैं। बिना अच्छी स्टोरेज व्यवस्था के बहुत सा माल खराब होने का डर बना रहता है।
 
श्रीनगर के बाजारों में भी इस मौसमी फल की धूम मची हुई है। सड़कों के किनारे लगे स्टालों पर सजी लाल स्ट्रॉबेरी पर्यटकों और स्थानीय लोगों को अपनी ओर खींच रही है। फल विक्रेता तारिक अहमद बताते हैं कि ग्राहकों में इस फल को लेकर जबरदस्त उत्साह रहता है। लोग ताजी स्ट्रॉबेरी के इंतजार में सुबह-सुबह ही बाजार पहुँच जाते हैं। खासकर युवा पीढ़ी और सैलानी इसे खूब पसंद कर रहे हैं।
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प्रशासनिक पहल और भविष्य की राह

प्रशासन भी अब बागवानी में विविधता लाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि अगर किसानों को बेहतर बुनियादी ढांचा और बाजार तक सीधी पहुँच दी जाए तो यह क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकता है। स्ट्रॉबेरी जैसी नकदी फसलों में निवेश करने से न केवल किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
 
हालांकि जमीनी स्तर पर किसान अभी और मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं। अब्दुल रशीद का कहना है कि हमें बेहतर प्रशिक्षण और सिंचाई की आधुनिक सुविधाओं की जरूरत है। अच्छी गुणवत्ता वाले बीज मिलना भी एक बड़ी चुनौती है। अगर सरकार इन बुनियादी चीजों पर ध्यान दे तो स्ट्रॉबेरी की खेती कश्मीर के किसानों की किस्मत बदल सकती है।
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मिठास के साथ जुड़ी उम्मीद की किरण

जैसे-जैसे आने वाले हफ्तों में कटाई का काम जोर पकड़ेगा श्रीनगर के खेत लाल और हरे रंगों से सराबोर रहेंगे। यह केवल एक फसल की कटाई नहीं है बल्कि एक पूरे समुदाय की मेहनत का नतीजा है। कश्मीर की मिट्टी में उपजी यह मिठास अब देश के दूसरे हिस्सों तक पहुँचने को बेताब है। किसानों के लिए यह सीजन केवल स्वाद का नहीं बल्कि उस उम्मीद का है कि छोटी सी स्ट्रॉबेरी उनके जीवन में बड़े बदलाव लेकर आएगी।
 
 
हजरतबल के बाहरी इलाके गसू जैसे क्षेत्रों में किसान कड़ी धूप में पसीना बहा रहे हैं। उनकी आंखों में बेहतर भविष्य के सपने हैं। अगर परिवहन और स्टोरेज की समस्याओं को सुलझा लिया जाए तो कश्मीर की स्ट्रॉबेरी दुनिया भर में अपनी पहचान बना सकती है। फिलहाल के लिए इन खेतों की लाली किसानों के चेहरों पर मुस्कान बनकर लौट आई है। आने वाले दिन इस क्षेत्र की खेती और किसानों के लिए और भी सुनहरे होने की उम्मीद है।