हैदराबाद
मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (MANUU) में छात्रों को उच्च शिक्षा के अवसरों से परिचित कराने के उद्देश्य से शुरू किए गए ‘विजिट उर्दू यूनिवर्सिटी’ कार्यक्रम का दूसरा चरण सोमवार को आरंभ हुआ। कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सैयद ऐनुल हसन ने कहा कि हैदराबाद हमेशा से गंगा-जमुनी तहजीब, शांति और सांस्कृतिक सौहार्द का केंद्र रहा है। दकनी उर्दू की संस्कृति ने समाज को जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है और इसी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए तत्कालीन शासक मीर उस्मान अली खान ने उस्मानिया विश्वविद्यालय की स्थापना की थी।
कार्यक्रम के तहत इस बार शहर के तीन प्रमुख मदरसों—दारुल उलूम रहमानिया, अल-मुहद अल-आली वल अरबी और आयशा निस्वान—के विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय परिसर का भ्रमण कराया गया। इस पहल का उद्देश्य मदरसा छात्रों को MANUU में उपलब्ध शैक्षणिक, तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की जानकारी देना तथा उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करना है।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. सैयद ऐनुल हसन ने कहा कि उस्मानिया विश्वविद्यालय में शिक्षा का माध्यम बदलने के बाद आज MANUU ही ऐसा प्रमुख विश्वविद्यालय है, जो बड़ी संख्या में उर्दू भाषी विद्यार्थियों को पारंपरिक, तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा उर्दू माध्यम के साथ उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय छात्रों को अंग्रेजी भाषा का भी प्रशिक्षण देता है ताकि रोजगार के क्षेत्र में उन्हें किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े और वे राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बन सकें।
मदरसा छात्रों को संबोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि MANUU एक समावेशी और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि यहां किसी भी छात्र या छात्रा के पहनावे, पारंपरिक वेशभूषा या बुर्क़ा पहनने को लेकर कोई भेदभाव नहीं किया जाता, बल्कि सभी का सम्मान किया जाता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां हर विद्यार्थी आत्मविश्वास के साथ अपनी शिक्षा पूरी कर सके।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन डे-स्कॉलर्स (आने-जाने वाले छात्रों) के लिए रियायती दरों पर दोपहर का भोजन उपलब्ध कराने की योजना पर भी काम कर रहा है। इसके अलावा शहर के विभिन्न हिस्सों से आने वाले विद्यार्थियों की सुविधा के लिए विशेष RTC बसें चलाने का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है। इस योजना के तहत बस किराए का आधा खर्च विश्वविद्यालय वहन करेगा, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को राहत मिल सके।
कार्यक्रम में एलुमनाई अफेयर्स के समन्वयक प्रो. सैयद नजमुल हसन ने विद्यार्थियों से MANUU में उपलब्ध विभिन्न पाठ्यक्रमों का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास और बेहतर भविष्य निर्माण के लिए लगातार प्रयासरत है।
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) डॉ. मोहम्मद मुस्तफा अली सरवरी ने अपने संबोधन में MANUU के पूर्व छात्रों की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के अनेक छात्र आज भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर रहे हैं और प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
डॉ. सरवरी ने विशेष रूप से मदरसा छात्रों को सलाह दी कि यदि वे बीए या एमए के अलावा विज्ञान, विधि (लॉ), प्रबंधन या अन्य तकनीकी एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेना चाहते हैं, तो उन्हें राज्य सरकार के ओपन स्कूलिंग सिस्टम तेलंगाना ओपन स्कूल सोसाइटी (TOSS) के माध्यम से 10वीं और 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करनी चाहिए। इसके बाद वे विश्वविद्यालय के विभिन्न तकनीकी और पेशेवर पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेकर अपने करियर को नई दिशा दे सकते हैं।
इस अवसर पर मौलाना आजाद एलुमनाई एसोसिएशन (MAA) के अध्यक्ष एवं अधिवक्ता एजाज अली कुरैशी, विभिन्न मदरसों के प्रतिनिधियों, विश्वविद्यालय के एस्टेट सेक्शन के सहायक कुलसचिव डॉ. एम. ए. कुद्दूस तथा MAA के महासचिव नासिर हुसैन शोएब सहित अनेक शिक्षक, अधिकारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
‘विजिट उर्दू यूनिवर्सिटी’ कार्यक्रम का उद्देश्य उर्दू भाषी विद्यार्थियों, विशेषकर मदरसा छात्रों को उच्च शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें आधुनिक शिक्षा तथा रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों के प्रति जागरूक बनाना है।