कार्यशाला में शिक्षकों को मिली आधुनिक शिक्षण की नई दिशा

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 11-07-2026
Teachers gained new direction in modern teaching at the workshop.
Teachers gained new direction in modern teaching at the workshop.

 

जलगांव।

मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (मनू), हैदराबाद के सेंटर फॉर प्रोफेशनल डेवलपमेंट ऑफ उर्दू मीडियम टीचर्स (सीपीडीयूएमटी) ने इकरा शाहीन अकादमी, जलगांव के सहयोग से "ट्रांसफॉर्मेटिव पेडागॉजीज़" विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का सफल आयोजन किया। कार्यशाला का उद्देश्य उर्दू माध्यम के शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, नवाचार आधारित शिक्षण रणनीतियों और छात्र केंद्रित शिक्षा के प्रभावी तरीकों से परिचित कराना था, ताकि वे बदलते शैक्षिक परिवेश में अधिक प्रभावी ढंग से अपनी भूमिका निभा सकें।

कार्यशाला के समापन सत्र में इकरा एजुकेशन सोसायटी, जलगांव के अध्यक्ष डॉ. अब्दुल करीम सालार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज के दौर में शिक्षकों का निरंतर व्यावसायिक विकास समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और तेजी से बदल रही शैक्षिक तकनीकों के दौर में शिक्षकों को लगातार अपनी योग्यता और कौशल विकसित करने होंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षक तभी विद्यार्थियों की रचनात्मक सोच, आलोचनात्मक दृष्टि और व्यावहारिक क्षमताओं को मजबूत बना सकेंगे, जब वे स्वयं आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से जुड़ेंगे।

कार्यशाला का मुख्य अकादमिक सत्र मनू के सीपीडीयूएमटी के निदेशक प्रोफेसर मोहम्मद अब्दुल समीउ सिद्दीकी ने प्रस्तुत किया। उन्होंने परिवर्तनकारी शिक्षण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षण संसाधनों और 21वीं सदी के आवश्यक कौशलों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एआई केवल तकनीकी सुविधा नहीं, बल्कि शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, व्यक्तिगत और परिणामोन्मुख बनाने का सशक्त माध्यम बनती जा रही है। उन्होंने शिक्षकों से नई तकनीकों को अपनाने और उन्हें कक्षा शिक्षण का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

दूसरे अकादमिक सत्र में मनू के सेंटर फॉर डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन (सीडीओई) के प्रोफेसर शेख वसीम ने आधुनिक शिक्षण रणनीतियों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के व्यावहारिक उपायों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज का शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि मार्गदर्शक, प्रेरक और सीखने की प्रक्रिया को आसान बनाने वाला सहयोगी भी है। उन्होंने शिक्षकों को प्रश्न आधारित शिक्षण, समूह गतिविधियों, सहभागिता आधारित कक्षाओं और तकनीक के प्रभावी उपयोग को अपनाने की सलाह दी, ताकि कक्षा का वातावरण अधिक रोचक, रचनात्मक और परिणामकारी बनाया जा सके।

कार्यशाला में जलगांव और आसपास के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से आए उर्दू माध्यम स्कूलों के बड़ी संख्या में शिक्षकों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें नई शिक्षण तकनीकों, कक्षा प्रबंधन, छात्र सहभागिता और डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग के बारे में व्यावहारिक जानकारी मिली, जिसका लाभ वे अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा देने के लिए उठा सकेंगे।

इस कार्यक्रम की सफल योजना और प्रभावी संचालन में इकरा शाहीन अकादमी, जलगांव के डॉ. हारून रशीद तथा इकरा बीएड कॉलेज के प्राचार्य डॉ. शेख इरफान ने समन्वयक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों ने आयोजन की प्रशासनिक व्यवस्था, प्रतिभागियों के मार्गदर्शन और पूरे कार्यक्रम के सफल संचालन को सुनिश्चित किया। इसके अलावा उन्होंने आधुनिक शिक्षण विधियों, प्रभावी कक्षा प्रबंधन, रचनात्मक शिक्षण तकनीकों और शिक्षा में डिजिटल संसाधनों के उपयोग से जुड़े अपने अनुभव भी प्रतिभागियों के साथ साझा किए।

कार्यशाला का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि उर्दू माध्यम के शिक्षक समय की मांग के अनुरूप अपने ज्ञान और कौशल को लगातार विकसित करते रहें तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध करा सकें।