कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में हुई एएमयू की प्रोफेसर की पुस्तक पर विशेष चर्चा

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 10-07-2026
Special discussion on an AMU professor's book held at the University of Cambridge.
Special discussion on an AMU professor's book held at the University of Cambridge.

 

अलीगढ़

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के अंग्रेजी विभाग की प्रोफेसर सामी रफ़ीक़ की हाल ही में प्रकाशित पुस्तक ‘Innocent Raptures: Stories on the Non-Human’ पर ब्रिटेन के प्रतिष्ठित कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में एक विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के वुल्फसन कॉलेज में आयोजित हुआ, जिसमें विश्वविद्यालय के छात्र, शोधार्थी और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का आयोजन हाइब्रिड मोड में किया गया, जिससे दुनिया के विभिन्न देशों से भी प्रतिभागी ऑनलाइन जुड़ सके।

हवाकल पब्लिकेशन द्वारा वर्ष 2026 में प्रकाशित इस पुस्तक में मनुष्य और गैर-मानव जीवों के बीच मौजूद जटिल, संवेदनशील और बहुआयामी संबंधों को कहानियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक केवल साहित्यिक रचना नहीं, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण और जीव-जंतुओं के प्रति मनुष्य की जिम्मेदारी पर गंभीर विचार करने का अवसर भी प्रदान करती है।

कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर सामी रफ़ीक़ ने अपनी पुस्तक की रचना-प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि बचपन में पशु-पक्षियों और प्रकृति के साथ बिताए गए अनुभवों ने उनके लेखन को गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता केवल साहित्य का विषय नहीं, बल्कि मानवीय जीवन का मूल मूल्य है। उन्होंने युवाओं से पर्यावरण संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने और पृथ्वी पर मौजूद सभी जीवों के प्रति करुणा एवं जिम्मेदारी का भाव विकसित करने की अपील की।

परिचर्चा में किंग्स कॉलेज लंदन के पीएचडी शोधार्थी अब्दुल सबूर किदवई ने भी पुस्तक की विषय-वस्तु पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि यह कृति आधुनिक साहित्य में पर्यावरण और गैर-मानव जीवन के विमर्श को नई दिशा देती है तथा पाठकों को मनुष्य-केंद्रित सोच से आगे बढ़कर व्यापक पारिस्थितिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करती है।

एएमयू के अंग्रेजी विभाग के डॉ. आयुष गौर ने भी कार्यक्रम में भाग लेते हुए पुस्तक के साहित्यिक और वैचारिक पक्षों का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक समकालीन साहित्य में प्रकृति और पर्यावरण से जुड़े विमर्श को मजबूत करती है और पाठकों को संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर प्रदान करती है।

कार्यक्रम का संचालन कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की पीएचडी शोधार्थी मदीहा नोमान ने किया। उन्होंने प्रोफेसर सामी रफ़ीक़ से पर्यावरण, रचनात्मक लेखन, कहानी कहने की प्रक्रिया तथा गैर-मानव पात्रों के चयन जैसे विषयों पर कई विचारोत्तेजक प्रश्न पूछे। संवाद के दौरान साहित्य, पर्यावरण और समाज के बीच संबंधों पर भी गहन चर्चा हुई।

यह आयोजन एएमयू के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। विश्व के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में भारतीय शिक्षकों और शोधकर्ताओं की रचनाओं पर चर्चा न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारतीय उच्च शिक्षा और साहित्य की वैश्विक पहचान को भी मजबूत करती है। प्रोफेसर सामी रफ़ीक़ की पुस्तक पर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में आयोजित यह परिचर्चा इस बात का प्रमाण है कि भारतीय शिक्षाविदों का शोध और साहित्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीरता से पढ़ा और सराहा जा रहा है।