नई दिल्ली
NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अपनी चार्जशीट में बड़ा दावा किया है। एजेंसी के अनुसार, आरोपी यश यादव के निर्देश पर अभ्यर्थियों से कक्षा 10वीं और 12वीं के शैक्षणिक प्रमाणपत्र तथा एक हस्ताक्षरित खाली चेक सिक्योरिटी के तौर पर जमा करवाए गए थे। बाद में ये दस्तावेज एक गवाह के हॉस्टल कमरे से बरामद किए गए।
इस मामले में CBI ने 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिस पर राउज एवेन्यू स्थित स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट सुनवाई करने वाली है।
CBI के मुताबिक, यश यादव ने सह-आरोपी शुभम मधुकर खैरनार से लीक हुआ NEET UG 2026 प्रश्नपत्र हासिल किया और परीक्षा से पहले उम्मीदवारों तथा बिचौलियों तक इसे पैसों के बदले पहुंचाने का काम किया।
जांच एजेंसी का दावा है कि फरीदाबाद, जम्मू समेत कई स्थानों के अभ्यर्थियों ने बयान दिया कि यश यादव ने सीधे या परोक्ष रूप से परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा था।
चार्जशीट के अनुसार, एक गवाह ने बताया कि यश यादव के कहने पर उसने आरोपी मंगलीलाल बिवाल और दिनेश बिवाल से एक अभ्यर्थी की 10वीं-12वीं की मूल मार्कशीट, ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) और मंगलीलाल बिवाल का हस्ताक्षरित खाली चेक सिक्योरिटी के रूप में लिया था। ये सभी दस्तावेज बाद में जयपुर के महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज के साबरमती हॉस्टल में गवाह के कमरे से बरामद किए गए।
CBI ने यह भी दावा किया कि यश यादव के जब्त मोबाइल फोन से मिले डिजिटल साक्ष्यों से उसकी शुभम मधुकर खैरनार से लगातार बातचीत की पुष्टि हुई है। फोन में शुभम का नंबर "Shubham Maharashtra" और एक अन्य नंबर "Ap Broker" नाम से सेव था। चैट और कॉल रिकॉर्ड में 28 और 29 अप्रैल 2026 के दौरान लीक प्रश्नपत्र, शैक्षणिक दस्तावेजों की तस्वीरें साझा करने और सिक्योरिटी के तौर पर दस्तावेज लेने से जुड़ी बातचीत होने का आरोप है।
एजेंसी के अनुसार, 30 अप्रैल 2026 की व्हाट्सएप चैट में "ph.com (1).pdf", "BT chem.pdf" और "BT bio.pdf" नाम की फाइलें साझा की गई थीं। जांच में यश यादव के मोबाइल से टाइप किए गए बायोलॉजी प्रश्न और हाथ से लिखे केमिस्ट्री नोट्स भी मिले, जिन्हें कथित तौर पर लीक सामग्री का हिस्सा बताया गया है। CBI का कहना है कि केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) ने इन दस्तावेजों की हैंडराइटिंग की पुष्टि की है।
CBI ने आरोप लगाया कि गुरुग्राम स्थित यश यादव के घर से भी लीक केमिस्ट्री और बायोलॉजी प्रश्नों के प्रिंटआउट बरामद हुए, जिनकी पुष्टि सरकारी प्रश्नित दस्तावेज परीक्षक (GEQD) ने की।
जांच एजेंसी का दावा है कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल चैट, ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों से यह सामने आया कि शुभम मधुकर खैरनार ने धनंजय निवृत्ति लोखंडे से लीक प्रश्न प्राप्त किए, उन्हें नासिक में प्रिंट कराया, छात्रों के ठहरने की व्यवस्था की और बाद में यह सामग्री यश यादव समेत अन्य लोगों तक पहुंचाई।
नोट: CBI के ये सभी दावे उसकी चार्जशीट का हिस्सा हैं। मामले में आरोपियों का दोषी या निर्दोष होना अदालत में सुनवाई और अंतिम फैसले के बाद ही तय होगा।