शर्मीले अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला के बचपन का प्यार कैसे चढ़ा परवान ?

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 07-08-2026
How did the childhood romance of shy astronaut Shubhanshu Shukla blossom?
How did the childhood romance of shy astronaut Shubhanshu Shukla blossom?

 

मलिक असगर हाशमी
 
लखनऊ की गलियों में शुरू हुई एक बचपन की दोस्ती आज देश की सबसे खूबसूरत प्रेम कहानियों में से एक बन चुकी है। बात हो रही है भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और गगनयान मिशन के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की। दुनिया उन्हें एक निडर फाइटर पायलट और एस्ट्रोनॉट के रूप में जानती है। लेकिन इस मजबूत इंसान के दिल में एक बेहद खूबसूरत और भोली प्रेम कहानी भी छिपकर पली- बढ़ी है। 
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विदेश में झुट्टियां मनाते शुभांशु शुक्ला पत्नी कामना के साथ

पहली मुलाकात और मासूम दोस्ती

शुभांशु शुक्ला और कामना मिश्रा की मुलाकात लखनऊ के स्कूल में तीसरी कक्षा में हुई थी। उस समय शुभांशु बेहद शर्मीले और शांत स्वभाव के बच्चे थे। दूसरी तरफ कामना समझदार और सरल मिजाज की थीं। दोनों के बीच दोस्ती हुई। स्कूल के साथ-साथ यह दोस्ती भी गहरी होती चली गई। कक्षा की बेंच से शुरू हुआ यह साथ कब प्यार में बदल गया, दोनों में से किसी को इसका पता ही नहीं चला।
 
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दूरियां बढ़ीं पर प्यार नहीं घटा

बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों के रास्ते अलग हो गए। मात्र 16 साल की उम्र में शुभांशु का चयन नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के लिए हो गया। वहीं दूसरी तरफ कामना ने मेडिकल कॉलेज में दाखिला ले लिया और आगे चलकर डेंटिस्ट बनीं। शारीरिक रूप से दोनों अलग जरूर हो गए थे। लेकिन दिलों की दूरी कभी नहीं बढ़ी। 
 
शुभांशु दिल की बात जुबान पर लाने में हमेशा हिचकिचाते थे। लेकिन उनकी खामोशी को कामना बिना कहे समझ जाती थीं। कठिन ट्रेनिंग, अनुशासित जीवन और अलग-अलग शहरों में रहने के बावजूद दोनों का भरोसा एक-दूसरे पर बना रहा। 
 
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बेटे को गोद में उठाए शुभांशु शुक्ला
 
राजदार दोस्त विशाल श्रीवास्तव

दोनों के इस रिश्ते के सबसे बड़े साक्षी बने उनके बचपन के दोस्त विशाल श्रीवास्तव। विशाल पिछले 30 सालों से कामना के राखी भाई हैं और शुभांशु के साथ उनकी 36 साल पुरानी गहरी दोस्ती है। विशाल बताते हैं कि स्कूल के दिनों से लेकर शादी तक, दोनों के रिश्ते के हर मोड़ को उन्होंने करीब से देखा है। दोनों के बीच एक-दूसरे के लिए गहरा सम्मान और निष्ठा हमेशा रही है।
 
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किताबों के बीच घिरे शुभांशु शुक्ला
शादी और एक नया सफर

वर्षों के इस सफर के बाद आखिरकार शुभांशु और कामना का यह प्यार शादी के बंधन में बंधा। परिवार के आशीर्वाद से दोनों एक हो गए। आज उनका एक 6 साल का प्यारा सा बेटा भी है। रिटायर्ड अधिकारी पिता दयाल शुक्ला और गृहिणी मां आशा शुक्ला के सबसे छोटे बेटे शुभांशु आज देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन कर चुके हैं। 
 
जब शुभांशु स्पेस स्टेशन में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, तब धरती पर बैठकर उनका सबसे बड़ा हौसला कामना ही बनी रहीं। शुभांशु की सबसे बड़ी प्रशंसक कामना कहती हैं कि उनका पहला प्यार हमेशा से आसमान ही रहा है। 
 
यह कहानी केवल दो लोगों के एक साथ आने की नहीं है। यह कहानी समर्पण, धैर्य और सच्चे प्यार की मिसाल है। जहाँ एक शर्मीला लड़का अंतरिक्ष की ऊंचाइयों को छूता है, और उसका बचपन का प्यार हर कदम पर उसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर साथ खड़ा रहता है।
 
शुभांशु के बचपन के दोस्त विशाल श्रीवास्तव की एक पाॅडकाॅस्ट पर आधारित
 
 
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