अर्सला खान
कुछ यादें वक्त के साथ धुंधली नहीं होतीं, बल्कि सीने में एक खामोश टीस बनकर हमेशा के लिए ठहर जाती हैं। पर्दे पर अपनी कॉमिक टाइमिंग से लाखों चेहरों पर मुस्कान बिखेरने वाले अभिनेता अरशद वारसी के हंसते हुए चेहरे के पीछे भी एक ऐसा ही गहरा दर्द छुपा है। एक ऐसा अपराधबोध (गिल्ट), जो रात के सन्नाटों में अक्सर उन्हें सोने नहीं देता।
जब भी किसी इंटरव्यू या बातचीत में अरशद से उनकी मां का ज़िक्र किया जाता है, तो पल भर में उनकी चमकती आंखों में मायूसी की एक काली परत छा जाती है। वे सकपका जाते हैं, अलफ़ाज़ होंठों पर आकर थम जाते हैं। उस वक्त वे एक सफल स्टार नहीं, बल्कि वही छोटे से बेबस बेटे नज़र आते हैं जो आज भी खुद को अपनी मां का गुनहगार मानता है।
गंभीर मुद्रा में अरशद वारसी
जब मुफ़लिसी और बीमारी ने एक साथ घेरा
अरशद का बचपन किसी आम बच्चे की तरह खिलखिलाता हुआ नहीं था। बहुत कम उम्र में ही जिंदगी ने उनके सामने मुश्किलों का ऐसा पहाड़ खड़ा कर दिया था, जिसकी ढलान पर फिसलना बहुत आसान था। परिवार एक-एक पैसे का मोहताज था। घर की माली हालत इतनी ख़राब थी कि बुनियादी जरूरतें भी पूरी होना मुश्किल लग रहा था।
इसी तंगहाली के बीच अरशद की मां गंभीर रूप से बीमार पड़ गईं। घर में न तो सही इलाज के पैसे थे और न ही दवाइयों के। बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती गई और एक दिन ऐसा आया जब उन्हें अस्पताल के ठंडे और खामोश वार्ड में भर्ती कराना पड़ा।
वो आखिरी रात और बेबस निगाहें
अस्पताल के उस कमरे में सफ़ेद चादर पर लेटी मां ज़िंदगी और मौत के बीच झूल रही थीं। नसों में सलाइन के ज़रिए दवाइयां दी जा रही थीं। डॉक्टरों ने सख्त हिदायत दे रखी थी कि मरीज को भूलकर भी एक बूंद पानी नहीं देना है।
रात गहराती जा रही थी। सिरहाने बैठे छोटे से अरशद अपनी मां का हाथ थामे जाग रहे थे। तभी मां ने सूखे होंठों को हिलाते हुए बहुत ही धीमी आवाज़ में कहा, "बेटा, थोड़ा पानी पिला दे..."
अरशद के कानों में डॉक्टर की वो सख्त हिदायत गूंज गई। उन्होंने अपना दिल मसोस लिया और मना कर दिया। मां ने बार-बार पानी मांगा। उनकी आंखों में तड़प थी, होंठ प्यास से सूख रहे थे। वे गिड़गिड़ाती रहीं, पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसती रहीं। लेकिन अरशद, जो केवल डॉक्टरों की बात मानकर अपनी मां की जान बचाना चाहते थे, हर बार अपनी मां की उस पुकार को अनसुना करते रहे।
उन्हें क्या पता था कि जिस डॉक्टर की हिदायत को वे अपनी मां की भलाई मान रहे थे, वो पल उनकी मां के जीवन के आखिरी पल साबित होंगे।सन्नाटे को चीरती मां की वो आखरी सिसकी और पानी की वो तड़प... और फिर अचानक सब कुछ शांत हो गया। मां ने पानी मांगते-मांगते अरशद के सामने ही दम तोड़ दिया।

अरशद वारसी के बचपन की एक दुर्लभ तस्वीर
एक घूंट पानी का हमेशा न मिटने वाला मलाल
उस रात के बाद अरशद की दुनिया हमेशा के लिए बदल गई। आज भी जब वे उस पल को याद करते हैं, तो उनका गला भर आता है। हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान जब यह सवाल उठा, तो अरशद की आवाज़ कांप रही थी।
उन्होंने भारी मन से कहा, "मेरी मां बार-बार पानी मांगती रही... और मैं सिर्फ डॉक्टरों की सलाह पर अमल करता रहा। काश! उस रात मैंने डॉक्टरों की बात न मानकर अपनी मां को पानी पिला दिया होता... तो शायद आज वो ज़िंदा होतीं।"
यह सोचकर ही उनका कलेजा कांप उठता है कि वे अपनी मां की आखरी इच्छा भी पूरी नहीं कर सके। एक बेटे के लिए इससे बड़ा दर्द क्या हो सकता है कि उसकी मां उसकी आंखों के सामने प्यासी दुनिया से रुखसत हो जाए और वह बेबस खड़ा देखता रहे।

पत्नी और बच्चों के साथ अरशद
तन्हाई, संघर्ष और कामयाबी का सफ़र
मां के जाने का साया अभी कम भी नहीं हुआ था कि कुछ ही समय बाद सिर से पिता का साया भी उठ गया। एक किशोरी उम्र का लड़का, जो अभी दुनिया को ठीक से समझा भी नहीं था, अचानक इस विशाल दुनिया में पूरी तरह अकेला रह गया।
पढ़ाई छूट गई। पेट भरने की मजबूरी ने हाथ में किताबें छोड़ने पर मजबूर कर दिया। अरशद ने सड़कों पर उतरकर घर-घर जाकर सामान बेचा, छोटी-मोटी नौकरियां कीं। हर दिन भूख और तन्हाई से एक नई जंग थी। लेकिन इस लड़के के अंदर टूटने से इनकार करने का एक जिद्दी जज़्बा था।
उन्होंने अपने दर्द को अपनी ताकत बनाया। डांस की दुनिया में कदम रखा, दिन-रात पसीना बहाया, कड़ी मेहनत की और अपनी अदाकारी से हर हिंदुस्तानी के दिल में जगह बनाई।
आज अरशद वारसी कामयाबी के शिखर पर हैं। दुनिया उनके अभिनय की कायल है। लेकिन उस चमकदार रोशनी के पीछे, दिल के किसी अंधेरे कोने में आज भी वो प्यासी मां पानी मांग रही है... और एक बेटा आज भी उस रात के साये में खामोश खड़ा रो रहा है।
राज शमानी से बातचीत पर आधारित
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