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मुस्लिम समाज में बहुविवाह,जुबानी तलाकऔर हलाला जैसी गैर-बराबरी वाली कुप्रथाओं के खिलाफ हैदराबाद में हाल ही में जनजागृति प्रोग्राम हुआ। 'मुस्लिम सत्यशोधक मंडल' और 'भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन' के साथ मिलकर रखे गए इस दो दिन के प्रोग्राम में, मुस्लिम महिलाओं से लेकर समाज के बुद्धिजीवियों तक, सबने इन कुप्रथाओं के खिलाफ खुलकर अपनी आवाज़ बुलंद की।
जुने हैदराबाद में नाइंसाफी के खिलाफ आवाज़
1 अगस्त को पुराने हैदराबाद इलाके की मुस्लिम महिलाओं को एक जगह जमा किया गया। 'मुस्लिम महिला मंडल' नाम की स्थानीय तंज़ीम के सहयोग से इस प्रोग्राम को रखा गया था। आज भी ज़्यादातर महिलाएं पुरानी सोच के साये में ज़िंदगी गुज़ार रही हैं। उनके सामने उनके ही पर्सनल लॉके भेदभाव वाले नियमों, पुरुष-प्रधान मानसिकता और आज के दौर में उन पर हो रहे ज़ुल्म के मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की गई।
इस मौके पर मौजूद महिलाओं ने जुबानी तलाक और बहुविवाह की ज़बरदस्त विरोध की। इस नाइंसाफी के खिलाफ खुद आगे आते हुए उन्होंने दस्तखत मुहिम में हिस्सा लिया। इस प्रोग्राम में डॉ. बेनज़ीर तांबोली, नूरजहां शफी नियाज़ और डॉ. ज़रीना खान ने महिलाओं का हौसला बढ़ाया। उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी की तकलीफ़ों को समझते हुए उन्हें उनके हकों का एहसास दिलाया।

सुंदरय्या विज्ञान केंद्र में बुद्धिजीवियों का मंथन
अगले दिन, यानी 2 अगस्त को सुंदरय्या विज्ञान केंद्र में एक सेमिनार रखा गया था। यह प्रोग्राम खास तौर पर बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, प्रोफेसरों, लेखकों और अलग-अलग संगठनों के नुमाइंदों के लिए था। इस प्रोग्राम का इंतज़ाम हैदराबाद की 'दुनियादारी मुस्लिम सुधारणावादी चळवळ' की अगुवाई करने वाले शेख युसूफ बाबा (स्काय बाबा) ने किया था।
इस काम में 'कास्टलेस सोसाइटी ऑफ इंडिया' के मोहम्मद वहीद ने बहुत मदद की। मोहम्मद वहीद की अध्यक्षता में ही यह पूरा सेमिनार हुआ। स्काय बाबा ने शुरुआत में इस मुहिम का मकसद बताते हुए साफ किया, "सुधार के मुद्दों को अवाम का सपोर्ट दिलाना ही हमारा असल मकसद है।"
'ब्रेकिंग द साइलेंस' किताब का ज़िक्र
भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की डॉ. नूरजहां शफी नियाज़ और डॉ. ज़रीना खान ने हाल ही में एक बहुत बड़ा अध्ययन पूरा किया है। 2500 मुस्लिम महिलाओं की हिस्सेदारी से उन्होंने बहुविवाह की परेशानी पर रिसर्च की।
इसी बुनियाद पर उन्होंने 'ब्रेकिंग द साइलेंस' नाम की किताब पब्लिश की है। इस किताब का हवाला देते हुए डॉ. नूरजहां ने बताया कि कैसे बहुविवाह के मसले ने मुस्लिम महिलाओं की ज़िंदगी बर्बाद कर दी है।
डॉ. ज़रीना खान ने इससे जुड़े आंकड़े भी पेश किए। देश की ज़्यादातर मुस्लिम महिलाएं बहुविवाह के खिलाफ हैं और पूरे भारत के लिए एक ही फैमिली लॉ (Uniform Civil Code) चाहती हैं, यह बात उन्होंने आंकड़ों के साथ साबित की।
दुनिया के बाकी इस्लामी देशों की मिसालें
मुस्लिम सत्यशोधक मंडल की डॉ. बेनज़ीर तांबोली ने दुनिया भर के इस्लामी देशों में हुए कानूनी बदलावों की मिसालें दीं। ट्यूनीशिया, तुर्किए, बांग्लादेश और यहां तक कि पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी मुस्लिम महिलाओं की हिफाज़त के लिए कानून बदले गए हैं। वहां मौखिक तलाक बंद हो चुका है। बहुविवाह पर सख्त पाबंदियां हैं और हलाला जैसी कुप्रथा को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।
डॉ. तांबोली ने सवाल उठाया कि जब दुनिया भर में मुस्लिम समाज आगे बढ़ रहा है, तो भारत में पर्सनल लॉ के नाम पर महिलाओं को मध्ययुगीन ज़ुल्म में क्यों धकेला जा रहा है? मुस्लिम सत्यशोधक मंडल के नबाब अल्ताफ हुसैन ने भी सेमिनार में हमीद दलवाई और मुस्लिम सत्यशोधक मंडल द्वारा मुस्लिम महिलाओं के हकों के लिए किए गए कामों की अहमियत बताई।
मज़हबी संगठनों की राजनीति का पर्दाफाश
सेमिनार में मुस्लिम सत्यशोधक मंडल के अध्यक्ष शम्सुद्दीन तांबोली ने सुधारवादी आंदोलनों के सामने मौजूद मुश्किलों को साफ तौर पर रखा। उन्होंने कहा, "मुस्लिम पर्सनल लॉ के भेदभाव वाले नियमों की वजह से महिलाओं पर लगातार ज़ुल्म हो रहा है। दूसरे इस्लामी देशों में जो कुप्रथाएं बंद हो चुकी हैं, वे यहां अभी भी कायम रखी जा रही हैं।"
विरोधी सोच की निंदा करते हुए तांबोली ने कहा, "चाहे हिंदुत्ववादी संगठन हों, मुस्लिम जमातवादी संगठन हों या आम शहरी, ये सब पहले से तय सोच के साथ इस मसले को देखते हैं। हम असल इस्लाम की तरफ लौट गए तो सारे मसले हल हो जाएंगे, यह नज़रिया अपनाकर जमातवादी लोग बुनियादी सवालों से बच निकलते हैं। दूसरी तरफ यह दलील देकर सुधार को टालने की कोशिश की जाती है कि दूसरे मज़हबों में भी ऐसी ही परेशानियां हैं।"
सुप्रीम कोर्ट में बहुविवाह रोकने की अर्ज़ी
हैदराबाद में लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ कानूनी लड़ाई भी उतनी ही मज़बूती से लड़ी जा रही है। शम्सुद्दीन तांबोली, ज़किया सोमन, नूरजहां शफी नियाज़ और जावेद ने मिलकर सुप्रीम कोर्ट में एक बहुत अहम याचिका दाखिल की है।
इसमें मांग की गई है कि मुसलमानों पर भी बहुविवाह रोकने वाला कानून लागू किया जाए। इस अर्ज़ी को बहुत गंभीरता से लेते हुए, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने केंद्र सरकार और अलग-अलग संस्थाओं को नोटिस भेजा है।
देश भर में मुहिम चलाने का संकल्प
हैदराबाद में हुए इस दो दिन के प्रोग्राम को हर तरफ से ज़बरदस्त रिस्पॉन्स मिला। बहुविवाह और मौखिक तलाक के खिलाफ चलाई गई दस्तखत मुहिम में सैकड़ों औरतों और मर्दों ने खुद आगे आकर हिस्सा लिया।
लोगों के बीच जाकर सीधी बातचीत के ज़रिए सुधार की सोच को पहुंचाना ही इस मुहिम का असली मकसद है। हैदराबाद में मिली कामयाबी के बाद, अब मुल्क के अलग-अलग राज्यों में भी इसी तरह के मेले और सेमिनार करके मुस्लिम महिलाओं के कानूनी हकों की लड़ाई को और तेज़ करने का फैसला आयोजकों ने लिया है।
आयोजक मुस्लिम संस्थाओं के बारे में:
दुनियादारी मुस्लिम सुधारवादी आंदोलन (तेलंगाना)
दुनियादारी मुस्लिम सुधारवादी आंदोलन' तेलंगाना के बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा मिलकर शुरू की गई एक अहम संस्था है। मुस्लिम समाज की सामाजिक ज़िंदगी में अच्छे सुधार लाना इस मुहिम का असल मकसद है।
आधुनिक तालीम, मज़हबी भाईचारा, महिलाओं के हक और संवैधानिक उसूलों को फैलाने के लिए यह संगठन लगातार काम कर रहा है। इस संगठन का पक्का मानना है कि मज़हबी बातें और सार्वजनिक जीवन दोनों अलग-अलग चीज़ें हैं। मज़हब घर या मस्जिद तक सीमित रहना चाहिए और सार्वजनिक जीवन सेक्युलर और संवैधानिक उसूलों पर आधारित होना चाहिए।
लेखकों, पत्रकारों, प्रोफेसरों, शिक्षकों और कारोबारियों ने मिलकर इस मुहिम को खड़ा किया है। मदरसा तालीम का गहराई से अध्ययन करके उसमें आधुनिक विषयों को शामिल करने के लिए इस संगठन ने खास कोशिशें की हैं। बराबरी और सेक्युलरिज्म पर यकीन रखने वाले दूसरे सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर यह मुहिम आगे बढ़ रही है। मशहूर लेखक और पत्रकार शेख युसूफ बाबा उर्फ स्काय बाबा इस मुहिम के मुख्य सूत्रधार हैं।

मुस्लिम महिला मंडल (जुने हैदराबाद इलाका)
'मुस्लिम महिला मंडल' जुने हैदराबाद इलाके में ज़मीनी स्तर पर महिलाओं के हकों के लिए काम करने वाला एक बेहद एक्टिव और संवेदनशील संगठन है। मुस्लिम महिलाओं पर होने वाले ज़ुल्म और नाइंसाफी को दूर करना इस मंडल का असल मकसद है।
घरेलू झगड़े और निजी ज़िंदगी की परेशानियां सुलझाने के लिए यह संस्था काउंसलिंग सेंटर चलाती है। महिलाओं को ताक़तवर और आत्मनिर्भर बनाने के लिए मंडल की तरफ से लगातार अलग-अलग प्रोग्राम चलाए जाते हैं।
यह संस्था महिलाओं की तालीम, स्किल डेवलपमेंट, मानवाधिकारों की जानकारी और रोज़गार की राह दिखाने जैसी ट्रेनिंग क्लास बहुत कामयाबी के साथ चलाती है। डॉ. मोहम्मद इमाम तहसीन इस मंडल के अध्यक्ष हैं और इशरत बेगम, अतिया बेगम, सना सुल्ताना और आयशा बेगम मुख्य कार्यकर्ताओं के तौर पर इस मुहिम की अगुवाई कर रही हैं।