नई दिल्ली. अमेरिका और उसके सबसे बड़े व्यापार भागीदार चीन के बीच टैरिफ युद्ध का नवीनतम दौर में, भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने एक ऐसे कदम में, जिसे व्यापार असंतुलन को कम करने के लिए एक संरक्षणवादी उपाय के रूप में देखा जाता है, बैटरी, ईवी, स्टील, सौर सेल और एल्यूमीनियम सहित चीनी उत्पादों पर भारी शुल्क लगाया. इन टैरिफ में इलेक्ट्रिक वाहनों पर 100 प्रतिशत टैरिफ, सेमीकंडक्टर पर 50 प्रतिशत टैरिफ और चीन से आयातित इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी पर 25 प्रतिशत टैरिफ शामिल है.
अन्य वस्तुएं जिन पर अधिक टैरिफ लगेगा, वे हैं मेडिकल दस्ताने, सीरिंज और सुई, कुछ महत्वपूर्ण खनिज और सौर सेल आदि हैं. ये प्रस्तावित बढ़ोतरी 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत अमेरिका की व्यापक रणनीति का एक हिस्सा है, जिसका उद्देश्य चीन द्वारा अनुचित व्यापार प्रथाओं का मुकाबला करना है.
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि, कैथरीन ताई ने इस बात पर जोर दिया कि कम लागत वाले चीनी उत्पादों के साथ वैश्विक बाजारों में बाढ़ का मुकाबला करने के लिए ये उपाय आवश्यक हैं.
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन के महानिदेशक अजय सहाय ने एएनआई को बताया, ‘‘प्रभावित उत्पादों में से, भारत में फेस मास्क, पीपीई, सीरिंज और सुई, चिकित्सा दस्ताने, एल्यूमीनियम और लोहा और इस्पात में अवसर हैं. प्रतिशोध के साथ चीन में भी अवसर आ सकता है, बशर्ते हमारे पास चीन द्वारा लक्षित उत्पादों तक बाजार पहुंच हो.’’
सहाय के मुताबिक, अमेरिका के इस कदम से दोनों देशों के बीच टैरिफ युद्ध शुरू हो जाएगा और चीन की ओर से जवाबी कार्रवाई की उम्मीद है. अमेरिका को चीन के 420 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात में से 18 अरब अमेरिकी डॉलर प्रभावित हुआ है, जो कि 4 प्रतिशत से थोड़ा अधिक है और इस प्रकार मामूली है.
सहाय ने कहा, ‘‘आने वाले समय में इसमें और वृद्धि होगी.’’ उन्होंने कहा कि इससे भारत और अन्य प्रतिस्पर्धियों को आपूर्ति अंतर को पाटने का अवसर मिलता है. यह पूछे जाने पर कि क्या चीन पड़ोसी देश भारत में टैरिफ लगाए गए उत्पादों को डंप करेगा, सहाय ने कहा कि चीन में अत्यधिक क्षमता है और इस प्रकार डंपिंग के खतरे से इंकार नहीं किया जा सकता है और खासकर तब, जब उनके निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बंद हो जाता है.
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे यकीन है कि उद्योग और सरकार आयात पर कड़ी नजर रखेगी और यदि वृद्धि या डंपिंग होती है, तो डीजीटीआर हमारे उद्योग की सुरक्षा के लिए उचित कार्रवाई करेगा.’’
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि अमेरिका और यूरोपीय संघ दोनों चीन से इलेक्ट्रिक वाहनों के आयात में कटौती कर रहे हैं. श्रीवास्तव ने आगे कहा, ‘‘अमेरिका द्वारा ईवी, बैटरी और कई अन्य नई प्रौद्योगिकी वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ाने से चीन इन उत्पादों को भारत सहित अन्य बाजारों में डंप करने के लिए मजबूर हो सकता है.’’
सहाय के समान दृष्टिकोण को दोहराते हुए, श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि चीनी फेस मास्क, सीरिंज और सुई, चिकित्सा दस्ताने और प्राकृतिक ग्रेफाइट पर उच्च शुल्क भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर पेश करते हैं. उन्होंने कहा, ‘‘इन मांग वाले उत्पादों के उत्पादन और निर्यात को बढ़ाकर, भारत अमेरिकी बाजार में अपने व्यापार पदचिह्न बढ़ा सकता है.’’
भारत को ईवी और सेमीकंडक्टर जैसे शेष उत्पादों पर कोई निर्यात लाभ नहीं मिल सकता है, क्योंकि भारत इन उत्पादों का शुद्ध आयातक है. लेकिन लंबे समय में, भारत 2025 से बड़े पैमाने पर सेमीकंडक्टर शुरू करने के साथ, इसमें से कुछ को अमेरिका और यूरोप के अन्य देशों में निर्यात करने में सक्षम होगा. भारत में चार सेमीकंडक्टर संयंत्रों पर काम चल रहा है - तीन गुजरात में और एक असम में.
इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए भी यही बात लागू होती है. विभिन्न ऑटोमोबाइल कंपनियां घरेलू बिक्री और निर्यात दोनों के लिए भारत में ईवी का निर्माण कर रही हैं. भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन पारिस्थितिकी तंत्र वर्तमान में विकास के प्रारंभिक चरण में है, लेकिन गति पकड़ रहा है. 2021 में, ईवी पंजीकरण 330,000 इकाइयों तक पहुंच गया, जो 2020 से 168 प्रतिशत की वृद्धि है. बिक्री में क्रमशः 2-पहिया और 3-पहिया वाहनों में 48 प्रतिशत और 47 प्रतिशत का योगदान रहा.
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