India retains top spot in global flexible office market maturity; projected to expand to 160 msf by 2030
नई दिल्ली
कुशमैन एंड वेकफील्ड की 'ग्लोबल ट्रेंड्स इन फ्लेक्सिबल ऑफिस 2026' रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 'फ्लेक्सिबल ऑफिस मार्केट मैच्योरिटी इंडेक्स' में 100% का टॉप स्कोर हासिल करके दुनिया के सबसे मैच्योर फ्लेक्सिबल ऑफिस मार्केट के तौर पर अपनी जगह बनाए रखी है। रिपोर्ट में बाजार के अनुमान बताते हैं कि भारत की फ्लेक्स इन्वेंट्री 2026 तक 100 msf (मिलियन स्क्वायर फीट) से ज़्यादा हो जाएगी और 2030 तक लगभग 160 msf तक बढ़ जाएगी, जो मौजूदा स्तर से लगभग दोगुनी होगी।
देश की फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस इन्वेंट्री 2026 की पहली छमाही में 88.7 मिलियन स्क्वायर फीट (msf) तक पहुंच गई, जो भारत के कुल कमर्शियल ऑफिस स्टॉक का 10.5% है। फ्लेक्सिबल ऑफिस स्पेस की खपत ने 2026 की पहली छमाही (H1 2026) में सबसे मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया, जिसमें ऑपरेटर्स ने भारत के टॉप आठ शहरों में 8.5 msf जगह लीज़ पर ली। यह सेक्टर अब देश भर में कुल ऑफिस लीज़िंग का लगभग 20% हिस्सा है। 2023 और 2025 के बीच, ऑपरेटर्स ने 44.1 msf जगह लीज़ पर ली, जो 720,000 से ज़्यादा सीटों के बराबर है। कुल सीट खपत 2020 में लगभग 38,000 सीटों से बढ़कर 2026 में अनुमानित 300,000 सीटों तक पहुंच गई।
कुशमैन एंड वेकफील्ड में बेंगलुरु की एग्जीक्यूटिव मैनेजिंग डायरेक्टर और भारत में फ्लेक्स हेड, रमिता अरोड़ा ने कहा, "ग्लोबल फ्लेक्स मार्केट में भारत की स्थिति यह दिखाती है कि यह मॉडल देश के ऑफिस इकोसिस्टम में कितनी गहराई से समा गया है। आज फ्लेक्सिबल ऑफिस व्यवसायों को उनकी रियल एस्टेट ज़रूरतों के पूरे लाइफ़साइकल में मदद कर सकते हैं - चाहे वह मौजूदगी बनाना हो, टीमों को बढ़ाना हो या लंबे समय की पोर्टफोलियो ज़रूरतों को मैनेज करना हो।" उन्होंने कहा कि बाजार के कारकों का मेल इस सेक्टर की मज़बूती को लगातार बढ़ा रहा है। "सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम मांग, पूंजी और प्रोडक्ट की गुणवत्ता को एक साथ आगे बढ़ते हुए देख रहे हैं, जो लगातार विकास के लिए एक मज़बूत आधार बना रहा है।" H1 2026 में पारंपरिक मुख्य केंद्रों के अलावा क्षेत्रीय मांग के पैटर्न में ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई; पुणे में कुल लीज़िंग का 35%, अहमदाबाद में 33% और हैदराबाद में 26% हिस्सा फ्लेक्स ऑपरेटरों का रहा।
लगभग 23,000 बुकिंग के अपफ्लेक्स (Upflex) मूल्यांकन से पता चला कि ऑन-डिमांड इस्तेमाल के मामले में भारत की वैश्विक हिस्सेदारी H1 2025 के 2.2% से बढ़कर H1 2026 में 10.2% हो गई, जिससे यह अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर आ गया।
अरोड़ा ने कहा, "संस्थागत भागीदारी बढ़ने से इस सेक्टर में लंबे समय के लिए पूंजी और अनुशासन आ रहा है, जबकि जगह लेने वालों (ऑक्यूपायर) की बदलती उम्मीदें ऑपरेटरों को बेहतर क्वालिटी और ज़्यादा आधुनिक सुविधाएं देने के लिए प्रेरित कर रही हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "AI-आधारित व्यवसायों सहित मांग के नए स्रोत उभरने से फ्लेक्स के लिए अवसर व्यापक और अधिक टिकाऊ होते जा रहे हैं।"
रिपोर्ट में बताया गया है कि संस्थागत फंडिंग के साथ-साथ सीमा-पार गतिविधियों में भी तेज़ी आई है; चार ऑपरेटर सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध (लिस्टेड) हो चुके हैं और एक अन्य का पब्लिक इश्यू तैयार किया जा रहा है। स्मार्टवर्क्स (Smartworks) ने सिंगापुर में प्रवेश किया और टेबल स्पेस (Table Space) ने फिलीपींस में KMC सॉल्यूशंस में हिस्सेदारी का प्रस्ताव रखा, जबकि जस्टको (JustCo) और मध्य-पूर्व की कंपनियों जैसे क्षेत्रीय ऑपरेटरों ने भारत में अपने कामकाज का विस्तार किया।