किशोर सिंह सोलंकी/अजमेर
सर्दियों की सुहानी सुबह और अजमेर की सड़कों पर अकीदत का सैलाब। मौका है सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के 815वें सालाना उर्स का। इस बार दिसंबर का महीना कुछ खास रहने वाला है। जश्न का दौर ऐसा शुरू होगा कि जो सीधे नए साल के स्वागत तक जाकर थमेगा। देश और दुनिया के कोने-कोने से आने वाले जायरीन अभी से अपनी तैयारियों में जुट गए हैं। अजमेर की फिजाओं में अभी से कव्वाली की गूंज और जियारत की तैयारियां महसूस होने लगी हैं।
दिसंबर में क्यों खास है इस बार का उर्स
इस बार का सालाना उर्स दिसंबर के महीने में पड़ रहा है। महीने की शुरुआत से ही अजमेर शहर की रौनक बदल जाएगी। उर्स के तुरंत बाद क्रिसमस और फिर नए साल का जश्न शुरू हो जाएगा। यानी इस बार दिसंबर का पूरा महीना धार्मिक आस्था और उत्सव के रंग में रंगा नजर आएगा।
जो लोग अजमेर शरीफ दरगाह आने का मन बना रहे हैं, उनके लिए यह समय बेहद खास है। इस बार उर्स के दिनों में जायरीन को दो जुमे की नमाज अदा करने का सौभाग्य भी मिलेगा। ऐसा संयोग बहुत कम देखने को मिलता है।
कब से शुरू होगा 815वां सालाना उर्स
सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह का 815वां उर्स रजब का चांद दिखने के साथ शुरू होगा। तय कार्यक्रम के अनुसार 9 दिसंबर से उर्स की औपचारिक शुरुआत होने की पूरी उम्मीद है। हालांकि रस्में पहले ही शुरू हो जाएंगी।
5 दिसंबर को ऐतिहासिक बुलंद दरवाजे पर परचम कुशाई की रस्म अदा की जाएगी। इसके साथ ही उर्स के आगाज़ का संदेश दूर-दूर तक पहुंच जाएगा। 9 दिसंबर को चांद रात पर जन्नती दरवाजा खोला जाएगा।
इसके खुलते ही देश भर से आए अकीदतमंदों की आंखें नम और दुआएं बुलंद होंगी। दरगाह के महफिल खाना में पहली महफिल सजेगी, जहां सूफी कलाम गूंजेंगे। ख्वाजा गरीब नवाज की मजार शरीफ को गुस्ल देने की रस्म भी नियत समय पर पूरी शिद्दत से निभाई जाएगी।
देशभर में पहुंच रहा है उर्स का दावतनामा
अजमेर शरीफ दरगाह के खुद्दाम-ए-ख्वाजा ने तैयारियां बहुत पहले शुरू कर दी हैं। खादिम सैयद कुतुबुद्दीन सखी के मुताबिक, उर्स का दावतनामा देश के हर कोने में भेजा जा रहा है। इसे डाक और सोशल मीडिया के जरिए अकीदतमंदों तक पहुंचाया जा रहा है। जो जायरीन अजमेर पहुंच रहे हैं, उन्हें खुद्दाम अपने हाथों से दावतनामा दे रहे हैं।
इस दावतनामे में सिर्फ तारीखों का जिक्र नहीं है। इसमें दरगाह की पुरानी परंपराओं, रस्मों-रिवाज और उर्स के दौरान होने वाले हर छोटे-बड़े कार्यक्रम की पूरी जानकारी दी गई है। लोग इसे सोशल मीडिया पर भी खूब शेयर कर रहे हैं, ताकि हर चाहने वाले तक यह पैगाम समय पर पहुंच सके।
दो जुमे और छठी शरीफ की तारीखें
इस बार उर्स के दौरान दो जुमे पड़ना जायरीन के लिए किसी बड़े तोहफे से कम नहीं है।
इन तारीखों के ऐलान के बाद से ही होटलों, गेस्ट हाउस और धर्मशालाओं में बुकिंग तेजी से होने लगी है। रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर भी भीड़ बढ़ने की पूरी उम्मीद है। प्रशासन ने भी सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम करने की रूपरेखा तैयार कर ली है।
अजमेर में उर्स के दौरान उमड़ती है आस्था
अजमेर शरीफ में हर साल लाखों लोग हाजिरी देने आते हैं। गरीब नवाज की दरगाह पर अमीर, गरीब, हर मजहब और हर वर्ग के लोग एक साथ सिर झुकाते हैं। यहां आने वाले हर शख्स की मुराद पूरी होती है, ऐसी गहरी आस्था लोगों के दिलों में बसी है। इस बार दिसंबर की ठंड में जियारत करने का जो सुकून मिलेगा, वो शब्दों में बयां करना मुश्किल है।
अगर आप भी इस बार उर्स में शामिल होने का प्लान बना रहे हैं, तो अपनी बुकिंग अभी से पक्की कर लें। दरगाह बाजार की तंग गलियों में फूलों की महक और चादरों की दुकानें सजने लगी हैं। ख्वाजा का दर हर किसी के लिए खुला है। आइए और इस रूहानी सफर का हिस्सा बनिए।
खास नोट:क्या आप इस बार अजमेर उर्स में जाने का प्लान बना रहे हैं? सफर से जुड़ी कोई खास जानकारी चाहिए तो हमें जरूर बताएं।