आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
आईबीएम के प्रबंध निदेशक (भारत और दक्षिण एशिया) संदीप पटेल ने मंगलवार को कहा कि भारत एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है और उसके पास कृत्रिम मेधा (एआई) जैसी तेजी से विकसित हो रही प्रौद्योगिकियों को आकार देने का अनूठा अवसर है।
उन्होंने कहा जब भारत कुछ बनाता है, तो वह अरबों लोगों के लिए बनाता है, जिससे उसका प्रभाव बड़े पैमाने पर पहुंचता है।
मुंबई में 'आईबीएम थिंक 2026' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पटेल ने कहा कि एआई क्रांति का अभी शुरुआती चरण है।
उन्होंने कहा कि ज्यादातर कंपनियां पहले से ही एआई का इस्तेमाल कर रही हैं, लेकिन सीमित स्तर पर। कहीं किसी कार्यप्रणाली में तो कहीं किसी विशेष उपयोग में इसका इस्तेमाल हो रहा है।
पटेल ने कहा कि यह उपयोगी है, लेकिन इससे केवल मामूली लाभ मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में सफल होने वाली कंपनियां केवल एआई का अधिक इस्तेमाल नहीं करेंगी, बल्कि एआई एजेंट, वास्तविक समय के आंकड़ों, स्वचालन, हाइब्रिड आर्किटेक्चर और सबसे महत्वपूर्ण भरोसे को ध्यान में रखते हुए अपने काम करने के तरीकों को नए सिरे से तैयार करेंगी।